25/09/2026
नीम करोली बाबा का जीवनकाल लगभग 1900 से 11 सितंबर 1973 तक रहा।
फ़िल्म, भक्त और किताबों में बताया गया कि वे चमत्कारी थे।
बिना टिकट यात्रा करने पर जब कंडक्टर ने बाबा को ट्रेन से नीचे उतार दिया, तो ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। बहुत प्रयास के बाद जब बाबा को दोबारा ट्रेन में बैठाया गया, तभी ट्रेन चली।
बाबा अपने पास आने वाले हर भक्त के मन की बात और उसकी परेशानी बिना बताए ही पल भर में जान लेते थे।अमेरिकी प्रोफेसर रिचर्ड अल्बर्ट जब बाबा के पास आए, तो बाबा ने बिना किसी पूर्व परिचय के उनकी मां की बीमारी का हाल बता दिया और उनके मन का संदेह दूर कर दिया।
कई भक्तों का ऐसा विश्वास और दावा है कि बाबा एक ही समय में अलग-अलग स्थानों पर अपने भक्तों को दर्शन देते थे।बाबा हमेशा एक साधारण कंबल ओढ़े रहते थे। उनके भक्तों का मानना है कि वह कंबल केवल कपड़ा नहीं बल्कि उनकी असीम आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक था।
बस एक सवाल - जब बाबा चमत्कार कर रहे थे, लगभग 30 साल के हो गए थे, तब शहीदेआजम भगत सिंह और साथियों को फांसी पर चढ़ाया गया था।बाबाजी ने अपने चमत्कार से फांसी क्यों नहीं रुकवा दी?
याद रखना हर कस्बे में बीजेपी आरएसएस के लोग निराश जनता को मुफ्त में नीव करोली का सिनेमा दिखा रहे हैं। यानी अगले चुनाव में यह नया बाबा, चमत्कार से वोट उगाएंगे जाएंगे।बाकी यह न कहने लगे कि नीव करोली का सबसे बड़ा अंश ज्ञानेश कुमार हैं।