07/08/2024
#धबौली_हाईस्कूल
आदर्श ग्राम धबौली
#हमारा_विद्यालय_हमारी_प्रतिष्ठा
धबौली पंचायत
हां आज हम बात कर रहे हैं उस संस्था की जो वर्षों से अपने उद्धारक की बाट जोह रहा है वही विद्यालय जिसके पास 2 से 3 अरब की चल तथा अचल संपत्ति होते हुए वहां पढ़ा रहे शिक्षकों को मात्र 2000 रुपए के आसपास मंथली सैलरी मिलती है ।
यह विद्यालय अपने स्थापना काल से ही गांव की गंदी राजनीति की चपेट में आ गया और आज तक यह उसी दलदल में फंसकर अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है।
जब इस विद्यालय की स्थापना हुई तो यहां के लोगों में एक नवचेतना ने जन्म लिया की हमे अब दूसरे गांव दूसरे पंचायत नहीं जाना पड़ेगा खासकर लड़कियों को।
राजनीति कहिए या षड्यंत्र जो विद्यालय 1999 में ही सरकार से मान्यता प्राप्त विद्यालय (वित सहित ) के रूप में कार्य करता वह कुछ लोगों के कुटिल प्रयास के कारण संभव नहीं हो पाया और दूसरे विद्यालय के ऊपर निर्भर रहकर कुछ वर्षों तक पढ़ाई होती रही जो उस समय के छात्र होंगे उन्हें यह भलीभांति ज्ञात होगा । लेकिन समय के साथ वो भी खत्म हो गया और विद्यालय बंद हो गया इसके शिक्षक अपने अपने स्वरोजगार में लग गए।
पुनः 2011 में सरकार ने एक संबद्धता नियम लाया जो यह था कि हम विद्यालय के छात्रों को सरकार से मिलने वाली फैसिलिटी देंगे लेकिन शिक्षकों को वेतन नहीं देंगे , उस फिर से गांव के कुछ प्रबुद्ध जनों ने इसपर पहल करते हुए उन शिक्षकों को काफी मान मन्नोवल के बाद वापस लाया और वेतन के रूप में 2000 रुपया प्रतिमाह पर पुनः विद्यालय का काम शुरू करवाया गया, 2 वर्षों के अथक प्रयास के परिणामस्वरूप अंततः 2013 में विद्यालय को श्राप से मुक्ति मिलते हुए बिहार सरकार से संबद्धता की स्वीकृति (वित्त रहित) के रूप में मिली और उसी रूप में किसी तरह आज तक विगत 10 वर्षों से अपने आप को खींच रही है।
जब संबद्धता की बात हुई तो बोर्ड ने यह जानकारी ली की आप विद्यालय किस प्रकार चलाएंगे तो यहां से बताया गया कि विद्यालय के पास अपनी अकूत संपत्ति है जिससे हम विद्यालय की सारी खर्च को मैनेज करेंगे तथा तमाम जरूरतों को पूरा करेंगे लेकिन समय के साथ साथ जमीन की बढ़ती कीमतों को देखते हुए यहां के कुछ लोगों की नज़र इसके कीमती जमीन तथा संसाधन पर पड़ी और धीरे धीरे इसे लोग हथियाने में लग गए जिससे इसके शिक्षकों को वेतन नहीं मिला और बहुत सारे शिक्षकों ने इसका साथ छोड़ दिया, छोड़े भी क्यों नहीं 80 रुपया प्रतिदिन में आज सब्जी नहीं हो पाता, कुछेक शिक्षकों के भरोसे यह विद्यालय अपना आखिरी वक्त पर चला जा रहा है क्योंकि पुराने शिक्षक आज के बढ़ते कंप्यूटरीकृत दौर में खुद को असहज महसूस करते हैं वहीं उचित मानदेय नहीं होने के कारण युवा शिक्षक इसमें आना नहीं चाहते ।
सबसे बड़ी बात यह है कि आज जिस हिसाब से शिक्षा विभाग का निर्णय आ रहा है कि पंचायत के विद्यालय में ही एडमिशन होगा #धबौली_पंचायत के दक्षिणतम बिंदु पर स्थित एकमात्र माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालय है जिसमे भी लिमिटेड seats हैं जिसके कारण यहां के बच्चों के सामने एक बार पुनः समस्या जस की तस बनी हुई है इंटर में यहां के छात्रों को दियारा क्षेत्रो में भेज दिया गया है जो पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं।
अभी भी समय है अगर समय रहते आपलोग नही जगे तो यह शिक्षा का मंदिर में फिर से ताले लटके मिलेंगे और जो बचा हुआ भी संसाधन है वह भी किसी की निजी संपत्ति बन जायेगी
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