ट्रेन अलग-अलग प्रकार का हॉर्न क्यों बजाता है
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17/08/2024
🕉️ भगवान शिव जी की "अर्द्ध-परिक्रमा" क्यों ?🔱
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🌿 शिवजी की आधी परिक्रमा करने का विधान है। वह इसलिए कि शिव के सोमसूत्र को लांघा नहीं जाता है। जब व्यक्ति आधी परिक्रमा करता है, तो उसे चन्द्राकार परिक्रमा कहते हैं। शिवलिङ्ग को ज्योति माना गया है और उसके आसपास के क्षेत्र को चन्द्र। आपने आकाश में अर्द्धचन्द्र के ऊपर एक शुक्र तारा देखा होगा। यह शिवलिङ्ग मात्र उसका ही प्रतीक नहीं है, अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ज्योतिर्लिङ्ग के ही समान है।
''अर्द्ध सोमसूत्रांतमित्यर्थ: शिव प्रदक्षिणीकुर्वन सोमसूत्र न लंघयेत।।
इति वाचनान्तरात।''
🕉️ सोमसूत्र :
शिवलिङ्ग की निर्मली को सोमसूत्र कहा जाता है। शास्त्र का आदेश है कि शङ्कर भगवान् की प्रदक्षिणा में सोमसूत्र का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, अन्यथा दोष लगता है। सोमसूत्र की व्याख्या करते हुए बताया गया है कि भगवान को चढ़ाया गया जल जिस ओर से गिरता है, वहीं सोमसूत्र का स्थान होता है।
🌿 क्यों नहीं लांघते सोमसूत्र :
सोमसूत्र में शक्ति-स्रोत होता है, अत: उसे लांघते समय पैर फैलाते हैं और वीर्य निर्मित और ५ अन्तःस्थ वायु के प्रवाह पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे देवदत्त और धनञ्जय वायु के प्रवाह में अवरोध उत्पन्न हो जाता है, जिससे शरीर और मन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अत: शिव की अर्द्ध-चन्द्राकार प्रदशिक्षा ही करने का शास्त्र का आदेश है।
'शिवस्यार्ध प्रदक्षिणा’ का अर्थ शिव की आधी ही प्रदक्षिणा करनी चाहिए।
🌿 किस ओर से करनी चाहिये परिक्रमा :
भगवान् शिवलिङ्ग की परिक्रमा सदैव बाँयीं ओर से आरम्भ कर जलाधारी के आगे निकले हुए भाग यानी जल स्रोत तक जाकर, पुनः विपरीत दिशा में लौटकर दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें।
🕉️🔱🌿 हर हर महादेव 🌿🔱🕉️
23/06/2024
#इतिहास
* अति सुन्दर, सनातन घड़ी *
*12:00* बजने के स्थान पर * आदित्य लिखा हुआ है जिसका अर्थ यह है कि * सूर्य 12 प्रकार * के होते हैं।
*1:00* बजने के स्थान पर * ईश्वर* लिखा हुआ है इसका अर्थ यह है कि * ईश्वर एक ही प्रकार का होता है। * एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति । *
*2:00* बजने की स्थान पर * पक्ष* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि * पक्ष दो* होते हैं । कृष्ण पक्ष और दूसरा * शुक्ल पक्ष।*
*3:00* बजने के स्थान पर * अनादि तत्व* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि * अनादि तत्व 3* हैं। * परमात्मा*, * जीवात्मा * और * प्रकृति* ये तीनों तत्व अनादि है,
*4:00* बजने के स्थान पर * वेद* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद । *
*5:00* बजने के स्थान पर *महाभूत* लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य है कि महाभूत पांच प्रकार के होते हैं। * पांच महाभूत हैं* - * सत्वगुण, रजगुण, कर्म, काल, स्वभाव"*
*6:00* बजने के स्थान पर *दर्शन* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि * दर्शन 6 प्रकार के होते हैं। छः दर्शन * सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदान्त* के नाम से विदित है।
*7:00* बजे के स्थान पर * धातु* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि * धातु 7* हैं। सात धातुओं के नाम * रक्त : खून (ब्लड)*
* रस : प्लाज्मा*
* मांस : मांसपेशियां *
* मेद : वसा (फैट)*
* अस्थि : हड्डियाँ *
* मज्जा : बोनमैरो *
* शुक्र : प्रजनन संबंधी ऊतक *
*8:00* बजने के स्थान पर * अष्टांग योग* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *योग के आठ प्रकार* होते है। योग के आठ अंग हैं: *1) यम, २) नियम, ३) आसन, ४) प्राणायाम, ५) प्रत्याहार, ६) धारणा ७) ध्यान ८) समाधि *
*9:00* बजने के स्थान पर * अंक लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि * अंक 9 प्रकार के होते हैं। 123456789*
*10:00* बजने के स्थान पर *दिशाएं* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि *दिशाएं 10 होती है।*
*11:00* बजने के स्थान पर उपनिषद* लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि * उपनिषद 11 प्रकार के होते हैं।*
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कीजिएगा दोस्तों...
धन्यवाद
आपका एक Follow मेरे लिए बहुत मायने रखता है। धन्यवाद
कभी हिन्दी वर्णमाला का क्रमबद्ध इतना सुन्दर प्रयोग आप भी अद्भुत अद्वितीय अविस्मरणीय कह उठेंगे...
यह कविता जिसने भी लिखी प्रशंसनीय है।
* अ* चानक
* आ* कर मुझसे
* इ* ठलाता हुआ पंछी बोला
* ई* श्वर ने मानव को तो
*3* त्तम ज्ञान-दान से तौला
* ऊ* पर हो तुम सब जीवों में
* ऋ* ष्य तुल्य अनमोल
* ए* क अकेली जात अनोखी
* ऐ* सी क्या मजबूरी तुमको
* ओ* ट रहे होंठों की शोख़ी
* औ* र सताकर कमज़ोरों को
* अं* ग तुम्हारा खिल जाता है
* अ:* तुम्हें क्या मिल जाता है.?
* क* हा मैंने कि कहो
*ख* ग आज सम्पूर्ण
* ग* र्व से कि हर अभाव में भी
* घ* र तुम्हारा बड़े मजे से
* च* ल रहा है
* छो* टी सी टहनी के सिरे की
* ज* गह में, बिना किसी
*झ* गड़े के, ना ही किसी
* ट* कराव के पूरा कुनबा पल रहा है
* ठौ* र यहीं है उसमें
* डा* ली-डाली, पत्ते-पत्ते
*ढ* लता सूरज
*त* रावट देता है
*थ* कावट सारी, पूरे
* दि* वस की-तारों की लड़ियों से
* ध* न-धान्य की लिखावट लेता है
* ना* दान-नियति से अनजान अरे
* प्र* गतिशील मानव
* फ़* ल के चक्कर में
* ब* न बैठे हो असमर्थ
* भ* ला याद कहाँ तुम्हें
*म* नुष्यता का अर्थ.?
* य* ह जो थी, प्रभु की
*२* चना अनुपम...
* ला* लच-लोभ के
*व* शीभूत होकर
* श* र्म-धर्म सब तजकर
* ष* ड्यंत्रों के खेतों में
* स* दा पाप-बीजों को बोकर
* हो* कर स्वयं से दूर
*क्ष* णभंगुर सुख में अटक चुके हो
*त्रा* स को आमंत्रित करते
* ज्ञा* न-पथ से भटक चुके हो।
* अंग्रेजी के अल्फाबेट्स पर बहुत कुछ पढ़ा होगा... पहली बार हिंदी में *
30/05/2024
17/05/2024
09/05/2024
गिरिराज सिंह के विवादित बोल, मुखियाजी खोल दिए पोल |@vipin_sir giriraj singh, vipin sir,
16/04/2024
आधी आँख बंद करके देखे
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