जामिया दारुल उलूम ब्यावर -मेवाड़ी गेट- राजस्थान

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जामिया दारुल उलूम ब्यावर -मेवाड़ी गेट- राजस्थान جامعہ دارالعلوم بیاور راجستھان

Jamia Darul Uloom Beawar Rajasthan

18/08/2026

My son Muhammad Hasnain Owaisi S/O M***i Salim owaisi Nadwi

Jamia Daru Uloom Beawar Rajasthan

9461011262 Owaisi Nadwi

14/08/2026

माहे रबीउल अव्वल शुरू हो चुका है,इस माह में नबी मुहम्मद स. पैदा हुए,।

🕌 मस्जिद-ए-जिराना — नबी ﷺ के उमरे की यादगार जगहमक्का मुकर्रमा के उत्तर-पूर्व में स्थित मस्जिद-ए-जिराना इस्लामी इतिहास की...
13/08/2026

🕌 मस्जिद-ए-जिराना — नबी ﷺ के उमरे की यादगार जगह

मक्का मुकर्रमा के उत्तर-पूर्व में स्थित मस्जिद-ए-जिराना इस्लामी इतिहास की एक महत्वपूर्ण जगह है। इस स्थान को खास महत्व इसलिए प्राप्त है क्योंकि ग़ज़वा-ए-हुनैन के बाद रसूलुल्लाह ﷺ ने यहीं से उमरे के लिए एहराम बांधा था।

🌿 ग़ज़वा-ए-हुनैन के बाद जिराना में ठहराव

8 हिजरी में ग़ज़वा-ए-हुनैन के बाद मुसलमानों को काफी मात्रा में माल-ए-ग़नीमत मिला। रसूलुल्लाह ﷺ ने इस माल को जिराना में जमा करवाया और बाद में मुसलमानों में उसका वितरण किया।

माल-ए-ग़नीमत बांटने के बाद रसूलुल्लाह ﷺ ने जिराना से उमरे का एहराम बांधा और मक्का मुकर्रमा तशरीफ ले गए, जहां आपने उमरा अदा किया।

इसी वजह से आज भी जिराना मक्का के पास उन मशहूर स्थानों में शामिल है, जहां मक्का में मौजूद लोग हरम की सीमा से बाहर जाकर उमरे के लिए एहराम बांधते हैं।

🌿 एक जरूरी बात

यह कहना सही नहीं है कि मौजूदा मस्जिद-ए-जिराना की इमारत रसूलुल्लाह ﷺ ने बनवाई थी। आज जो मस्जिद दिखाई देती है, वह बाद के समय में बनाई और कई बार बढ़ाई गई है।

इस जगह की असली अहमियत इसकी ऐतिहासिक और सीरत से जुड़ी हुई है। यही वह स्थान है जहां नबी करीम ﷺ ने ग़ज़वा-ए-हुनैन के बाद ठहराव किया, माल-ए-ग़नीमत बांटा और फिर उमरे के लिए एहराम बांधा।

जिराना हमें नबी करीम ﷺ की सीरत के उस महत्वपूर्ण दौर की याद दिलाता है, जब ग़ज़वा-ए-हुनैन के बाद आपने बड़ी समझदारी और हिकमत के साथ हालात को संभाला और फिर अल्लाह के घर की ओर उमरे के लिए रवाना हुए। 🕋

📍 स्थान: जिराना, मक्का मुकर्रमा, सऊदी अरब
🕋 ऐतिहासिक महत्व: ग़ज़वा-ए-हुनैन के बाद नबी ﷺ का यहां ठहरना, माल-ए-ग़नीमत का वितरण और यहीं से उमरे का एहराम बांधना।

🤲 दुआ:
अल्लाह तआला हर मुसलमान को मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा की हाजिरी और बार-बार बैतुल्लाह का उमरा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

📌 नोट: यह जानकारी इस्लामी और ऐतिहासिक रिवायतों के आधार पर दी गई है। वर्तमान मस्जिद की इमारत और इस स्थान से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम को अलग-अलग समझना चाहिए।

मुफ्ती मुहम्मद सालिम उवैसी नदवी जामिया दारुल उलूम ब्यावर मेवाड़ी गेट राजस्थान

यह रहा इसका सरल और आसान हिंदी रूप:🕋 तवाफ़ की शुरुआत की निशानीहरम शरीफ़ के खुले आँगन में दिखाई देने वाली हरी बत्ती (Green...
04/08/2026

यह रहा इसका सरल और आसान हिंदी रूप:

🕋 तवाफ़ की शुरुआत की निशानी

हरम शरीफ़ के खुले आँगन में दिखाई देने वाली हरी बत्ती (Green Light) उस जगह की निशानी है जहाँ से काबा शरीफ़ का तवाफ़ शुरू किया जाता है और हर चक्कर पूरा होने पर फिर वहीं पहुँचा जाता है। क्योंकि इसी स्थान के सामने हजर-ए-अस्वद स्थित है। दुनिया भर से आने वाले लाखों मुसलमान यहीं से अपने तवाफ़ की शुरुआत करते हैं।

🤲 दुआ:
अल्लाह तआला हम सभी को बार-बार बैतुल्लाह शरीफ़ का तवाफ़ करने, हजर-ए-अस्वद के सामने हाज़िर होने और अपनी दुआओं की कबूलियत पाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

ताइफ़ का वह मुबारक बाग़, जहाँ नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद ﷺ ने पत्थरों से घायल होने के बाद एक पेड़ के सहारे आराम किया था।रस...
01/08/2026

ताइफ़ का वह मुबारक बाग़, जहाँ नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद ﷺ ने पत्थरों से घायल होने के बाद एक पेड़ के सहारे आराम किया था।

रसूलुल्लाह हज़रत मुहम्मद ﷺ का ताइफ़ का सफ़र इस्लामी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और सीख देने वाली घटनाओं में से एक है। यह सफ़र हमें सब्र, हिम्मत, रहमत और अच्छे अख़लाक़ का बेहतरीन संदेश देता है।

नुबुव्वत के शुरुआती दौर में आप ﷺ लोगों को इस्लाम का पैग़ाम देने के लिए ताइफ़ गए। लेकिन वहाँ के सरदारों ने आपकी बात स्वीकार नहीं की। बल्कि उन्होंने कुछ लोगों और बच्चों को आपके पीछे लगा दिया। उन लोगों ने आप ﷺ पर पत्थर फेंके, जिससे आपका मुबारक जिस्म ज़ख्मी हो गया और आपके पैरों से ख़ून बहने लगा।

इसके बाद आप ﷺ एक बाग़ में पहुँचे और वहाँ एक पेड़ के सहारे बैठकर आराम किया तथा अल्लाह तआला से दुआ की।

सहीह बुख़ारी और सहीह मुस्लिम की रिवायत के अनुसार, उसी समय हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम आए। उनके साथ पहाड़ों के फ़रिश्ते (मलकुल-जिबाल) भी थे। उन्होंने कहा कि अगर आप हुक्म दें, तो ताइफ़ के दोनों पहाड़ इन लोगों पर मिला दिए जाएँ।

लेकिन रहमतुल्लिल आलमीन हज़रत मुहम्मद ﷺ ने बदला लेने के बजाय फ़रमाया कि मुझे उम्मीद है कि अल्लाह तआला इनकी आने वाली नस्लों में ऐसे लोग पैदा करेगा जो सिर्फ़ एक अल्लाह की इबादत करेंगे और उसके साथ किसी को शरीक नहीं ठहराएँगे।

ताइफ़ के इसी सफ़र में अद्दास नाम के एक ईसाई ग़ुलाम ने भी आप ﷺ से मुलाक़ात की। आपकी बातें सुनकर उसने आपकी नुबुव्वत की सच्चाई को पहचान लिया। बाद में क़ुरआन मजीद में जिन्नों के एक समूह के ईमान लाने का भी ज़िक्र मिलता है, जिसे उलमा-ए-किराम इस सफ़र की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल करते हैं।

यह पूरा वाक़िआ हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन हालात में भी सब्र, माफ़ी, रहमत और अल्लाह पर भरोसा रखना ही नबी-ए-करीम ﷺ की सुन्नत है।

*मुफ्ती मुहम्मद सालिम उवैसी नदवी जामिया दारुल उलूम ब्यावर मेवाड़ी गेट राजस्थान*

7014929894

15/07/2026

🕋 मक्का मुकर्रमा — दूसरा दिन

अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन

आज मक्का मुकर्रमा में मेरा दूसरा दिन था। अल्लाह तआला ने अपने फ़ज़्ल व करम से बैतुल्लाह का तवाफ़ करने और मस्जिद-ए-हरम में नमाज़ें अदा करने की सआदत अता फ़रमाई।

हरम की फ़िज़ा में क़दम रखते ही दिल पर एक अजीब कैफ़ियत तारी हो जाती है। यहाँ इंसान को अपनी हक़ीक़त, अपनी कमज़ोरी और अपने रब की अज़मत का एहसास पहले से कहीं अधिक गहराई के साथ होता है। दुनिया की चकाचौंध और उसकी तमाम व्यस्तताएँ पीछे छूट जाती हैं, और दिल इस सच्चाई को स्वीकार करता है कि वास्तविक सुकून केवल अल्लाह की याद, उसकी बंदगी और उसकी क़ुर्बत में है।

बैतुल्लाह का तवाफ़ केवल कुछ चक्करों का नाम नहीं, बल्कि यह इस बात का नवीनीकरण है कि जीवन का हर क़दम अपने पालनहार की रज़ा के लिए हो। मस्जिद-ए-हरम में अदा की जाने वाली हर नमाज़ बंदे और उसके रब के रिश्ते को और अधिक मज़बूत करती है।

दुआ है कि अल्लाह तआला इस मुबारक हाज़िरी, तवाफ़, नमाज़ों और तमाम इबादतों को अपनी बारगाह में क़बूल फ़रमाए, मेरे माता-पिता, उस्तादों, अहबाब और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा पर अपनी रहमतें नाज़िल फ़रमाए, और हम सबको बार-बार अपने मुक़द्दस घर की हाज़िरी नसीब फ़रमाए।

﴿رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ﴾

"ऐ हमारे पालनहार! हमसे (यह इबादत) स्वीकार फ़रमा। निःसंदेह तू ही सब कुछ सुनने वाला और सब कुछ जानने वाला है।"

✍️ मुफ़्ती मुहम्मद सालिम उवैसी नदवी
जामिया दारुल उलूम, ब्यावर मेवाड़ी गेट, राजस्थान
📞 9461011262 | 7014929894

स्कूल खुल गयी है अपने बच्चों का ज्यादा से ज्यादा मदरसा दाऊदीया मे एडमिशन करा सकते है ये एक ऐसी स्कूल है जहाँ पे दुनियावी...
04/07/2026

स्कूल खुल गयी है अपने बच्चों का ज्यादा से ज्यादा मदरसा दाऊदीया मे एडमिशन करा सकते है ये एक ऐसी स्कूल है जहाँ पे दुनियावी तालीम के साथ साथ क़ुरआन और उर्दू भी सिखाया जाता है...जल्द से जल्द राब्ता करें....🤲

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