01/11/2025
हरियाणा दिवस हर साल 1 नवंबर को मनाया जाता है, जो 1966 में पंजाब से अलग होकर हरियाणा के स्वतंत्र राज्य बनने की ऐतिहासिक घटना को याद करता है। इस दिन हरियाणा में उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम होती है। साइकिल रैलियों से लेकर पाक कला प्रतियोगिताओं तक, राज्य भर में अनेक आयोजन होते हैं, जो हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करते हैं।
चंडीगढ़ से पंचकूला तक की साइकिल रैलियाँ और पारंपरिक हरियाणवी व्यंजनों की पाक प्रतियोगिताएं इस दिन की खासियत होती हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हरियाणवी संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियाँ लोगों का मन मोह लेती हैं। समाज सेवा के उद्देश्य से रक्तदान शिविर और रन फॉर फन जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की जाती हैं। राज्य की प्रमुख इमारतों को रंगीन रोशनी से सजाया जाता है, जो पूरे राज्य में उत्सव का माहौल बनाता है। हरियाणा के गठन में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पंजाब सीमा आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर हरियाणा का गठन हुआ।
राज्य निर्माण के लिए Commission का गठन
23 अप्रैल 1966 को पंजाब राज्य को विभाजित करने और नये हरियाणा राज्य की सीमाए निर्धारित करने के लिए भारत सरकार ने जे.सी. शाह की अध्यक्षता में शाह कमीशन की स्थापना की। 31 मई 1966 को कमीशन ने अपनी रिपोर्ट जारी की जिसके अनुसार करनाल, गुडगाँव, रोहतक, महेंद्रगढ़ और हिसार जिलों को नये राज्य हरियाणा का भाग बनाया गया। साथ ही इसमें संगरूर जिले की जींद और नरवाना तहसील और नारैनगढ़, अम्बाला और जगाधरी तहसील को भी शामिल किया गया।
हरियाणा कृषि प्रधान क्षेत्र है जिसमें कृषि उत्पादन के लिए काफी जमीन है जो खेती के लिए काफी उपजाऊ भी है। कृषि प्रधान क्षेत्र होने की वजह से इसे ग्रीन लैंड कहा जाता है (Green land of India)। यहां के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है जिसमें तकरीबन एक चौथाई आबादी खेती करती है। हरियाणा में तिलहन, कपास, गन्ना, आलू, दालें, जौ, ज्वार, बाजरा इत्यादि फसलें उगाई जाती हैं तथा गेहूं और चावल यहां की प्रमुख फसलें हैं जिनका काफी मात्रा में निर्यात होता है। इसके इलावा जब डेरी पशुओं की बात आती है तो हरियाणा के डेरी पशु सबसे प्रसिद्ध हैं और सबसे महंगे भी बिकते हैं।
हरियाणा की वेशभूषा तथा खान पान
हरियाणा की पारंपरिक पोशाक और आभूषण इसकी संस्कृति की पहचान हैं। पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता और सफ़ेद पगड़ी आम हैं, जबकि महिलाएं चूड़ीदार-कुर्ता और पारंपरिक गहनों के साथ सजती हैं। त्योहारी अवसरों पर और शादी-ब्याह के मौकों पर इन परंपरागत वस्त्रों और आभूषणों का विशेष महत्व होता है। इन वेशभूषाओं के माध्यम से हरियाणा की सांस्कृतिक विविधता झलकती है।
आप सभी को हरियाणा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवम् बधाई।
Little birds play school
Advocate Laxman Singh Chokan