Ajeet Verma

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19/01/2026

बनाया है मैं ने ये घर धीरे धीरे
खुले मेरे ख़्वाबों के पर धीरे धीरे

किसी को गिराया न ख़ुद को उछाला
कटा ज़िंदगी का सफ़र धीरे धीरे

जहाँ आप पहुँचे छलांगें लगा कर
वहाँ मैं भी पहुँचा मगर धीरे धीरे

पहाड़ों की कोई चुनौती नहीं थी
उठाता गया यूँ ही सर धीरे धीरे

गिरा मैं कहीं तो अकेले में रोया
गया दर्द से घाव भर धीरे धीरे

16/01/2023

रूठूंगा मैं तुमसे इक दिन इस बात पे,
जब रूठा था मैं, तो मनाया क्यूं नहीं.

पकड़ कर तेरे हाथ पूछूंगा मैं तुमसे,
हक़ अपना मुझ पर, तुमने जताया क्यूं नहीं.

इस धागे का एक सिरा तुम्हारे पास भी तो था,
उलझा था अगर मुझसे, तो तुमने सुलझाया क्यूं नहीं."

03/12/2021

छिप छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है, नयन सेज पर
सोया हुआ आँख का पानी
और टूटना है उसका ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों
कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है।

माला बिखर गयी तो क्या है
खुद ही हल हो गयी समस्या
आँसू गर नीलाम हुए तो
समझो पूरी हुई तपस्या
रूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज़ सिलाने वालों
कुछ दीपों के बुझ जाने से, आँगन नहीं मरा करता है।

खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर
केवल जिल्द बदलती पोथी
जैसे रात उतार चांदनी
पहने सुबह धूप की धोती
वस्त्र बदलकर आने वालों, चाल बदलकर जाने वालों
चन्द खिलौनों के खोने से, बचपन नहीं मरा करता है।

14/10/2021

मंगाई के विरोध में धरना

12/10/2021

साइकिल की सवारी

27/08/2021
27/08/2021

शुभारंभ👍👍👍👍

Photos from Ajeet Verma's post 16/08/2021
25/12/2020

#इलाहाबाद एक ऐसा शहर जहां प्रदेश के लाखों होनहार कुछ कर गुजरने का सपना लेकर उम्मीदों कि नगरी में पैर रखते हैं
इसी शहर में ! एक नौजवान लड़की मन में हजारों ख्वाब संजोए जिंदगी को बेहतर बनाने की आस में घर की दहलीज को लांघकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश लेती है मगर उसके संघर्षों के सफर के बीच में ही बाप का साया सर से उठ जाता है। माता भी अपनी तबीयत से जूझने लगती है। इन हालातों में उसके परिवार के पेट पर ही संकट आ पड़ता है, मगर कहते हैं ना, जब हौसले बुलंद हो तो बड़े से बड़ा तूफान भी कुछ नहीं कर पाता। अपने शैक्षिक सफर को जारी रखने तथा परिवार का पेट पालने के लिए वह नौजवान लड़की चाय की दुकान खोलती है। संसाधनों का अभाव था तो उसने अपने स्टडी टेबल और गैस सिलेंडर से ही खुले आसमान के नीचे दुकान की बुनियाद रख दी। उसकी इस दुकान को खुले हुए मुश्किल से 4 दिन हुए हैं अतः आप सबसे विशेष सहयोग की आशा है। कभी फुर्सत मिले तो खुशी की चाय का आनंद जरूर लीजिए और उस नौजवान लड़की के सपनों को पूरा करने में अपना सहयोग दीजिए, धन्यवाद!

* #स्थान- शुक्ला मार्केट (हनुमान मंदिर के सामने), सलोरी, इलाहाबाद।

#खुशी_की_चाय 🙏

दया कि दृष्टि से नहीं आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन कि दृष्टि से आगे बढ़िए चाय का स्वाद लीजिए शायद आपकी एक चाय किसी के सपनो कि उड़ान बनने का सहारा बने 🙏

17/12/2020

36590 शिक्षकों के स्कूल आवंटन में देरी होने का मुख्य कारण बार बार संशोधन प्रक्रिया का चक
चलते रहना है।

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