01/09/2021
सादर प्रणाम अभिभावकों🙏
नया शैक्षिक सत्र आज यानी 01-09-2021को प्रारंभ हो गया है इस उपलक्ष में आपको और बच्चों को बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं....💐💐
प्यारे बच्चों एवं अभिभावकों इन दो ढाई साल के कालक्रम में सबसे ज्यादा अगर loss(नुकसान)हुआ है तो वो है शिक्षा का....क्योंकि विद्यालय लम्बे समय से बन्द पड़े हैं और इस दौरान सारी शैक्षिक गतिविधियां ठप पड़ी है और आगे भी फिलहाल अभी तक क्लास 9to12ही ओपन होने जा रही है मतलब अभी भी आधी स्कूलें खुलेगी... *उधर सरकार ने सरकारी स्कूली शिक्षकों के ट्रांसफर करवाना* शुरू कर दिए हैं *""बच्चों से स्कूलें भरनी शुरू हुई,उधर अध्यापकों से स्कूल खाली हो रहे हैं""फिर स्थितियां तो जस की तस.* ..वैसे ही हमारा यह सीमांत क्षेत्र शिक्षा के हिसाब से शुरू से ही पिछड़ा हुआ था और अब थोड़ा सुधार जरूर हुआ है और *उसमें भी निजी स्कूलों का बहुत बड़ा योगदान है यह हम सब अच्छी तरह से जानते हैं,* ,क्योंकि यहां के स्थानीय युवाओं को अभी तक सरकारी शिक्षक वर्ग में इतना बड़ा लाभ/भूमिका मिली नहीं हैं जितनी मिलनी चाहिए/आवश्यकता हमारे यँहा रहती है ! *बाहर वाले शिक्षक यँहा सर्विस तो पा लेते हैं(हालांकि इसके लिए कई कारक जिम्मेदार है )लेकिन दो चार सालों में वे अपने मूल स्थान मतलब अपने गृह जिले या कंही आसपास चले जाते हैं और हमारी हालत वही रहती है.....*
इस पूरे घटनाक्रम में इन दो सालों में यह देखने को मिला है कि आप (अभिभावक)बच्चों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने को लेकर काफी उत्साहित हैं इसके भी कई कारण है ,,,जैसे आपको लगता है कि कोरोनाक़ाल में बन्द पड़े निजी स्कूलों के अंदर भी शुल्क ले लेंगे, या अन्य कई तरह की भ्रांतियां( *हालांकि हमने गत वर्ष भी जितनी स्कूलें संचालित हुई है उतनी ही शुल्क ली है और आगे भी यही प्रक्रिया चलेगी),* ,पैदा होती है और स्वाभाविक भी है हालांकि सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाना कोई गलत नहीं है बच्चों को शिक्षा मिलनी चाहिए चाहे कंही से मिले,,,लेकिन *जब शिक्षक ही ट्रांसफर होकर जा रहे हैं तो केवल स्कूलों में जाने मात्र से पढाई सम्भव नहीं हैं,,* अतः सभी स्थितियों पर विचार करके,आप *सबसे पहले बच्चों की शिक्षा पर ही फोकस करें,,हमारा बच्चा अगर दो रुपये खर्च होते हुए भी अगर अच्छी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले तो कोई हर्ज नहीं हैं ,* ,हम जानते हैं कि पिछले दो साल से बच्चों का पढाई का स्तर काफी डाउन हो चुका है उसको *पटरी पर लाने के लिए न केवल नियमित कक्षाएं लगे बल्कि अतिरिक्त(एक्सट्रा क्लासें)मेहनत कर के ही अच्छे अंक सम्भव है यह व्यवस्था निजी स्कूलें लम्बे समय से देती आ रही है* और आगे भी उनका सिस्टम बेहतर ही करेगा,क्योंकि उनकी रोजी रोटी व जीवन उसी के लिए समर्पित है,,
हमारी मेहनत आप सब अच्छे से जानते हैं हमारे रात दिन के अथक प्रयासों से हमारा क्षेत्र आज शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर ऊंचाइयों को छूने जा रहा है,
हमारा उद्देश्य किसी को कमत्तर करके आंकने का नहीं हैं केवल हकीकत है उसी से रूबरू करवाने का है बाकी सरकारी स्कूलें भी अपने सिस्टम के और संसाधनों के अनुरूप अच्छा ही कर रहे हैं लेकिन *निजी और सरकारी में अपनी अपनी सीमाएं और क्षमताएं हैं* सरकार की पालिसी के अनुसार सारी प्रक्रियाएं होती है तो कोई चाह कर भी कुछ ज्यादा करने की स्थिति में नहीं होता है *और इधर हम (निजी स्कूल)बच्चों की आवश्यकता और संख्या के आधार पर सेवाओं में विस्तार के लिए स्वतंत्र हैं* और कंही न कंही हमारी जिम्मेदारी भी है क्योंकि हमारे ऊपर आपकी सीधी सीधी जिम्मेदारी है और हम सीधे तौर से आपके प्रति उत्तरदायी भी हैं *अतः आप इस अपील पर ध्यान देकर अपने नौ निहालों के भविष्य हेतु उचित निर्णय अवश्य लेंगे,,,ध्यान रहें हमारी तरफ से जितनी पढाई उतनी ही फीस के फार्मूले के अनुरूप चलकर आपके सहयोग के लिए आपके साथ हैं* हमें उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि हम बच्चे, आप और हम मिलकर इस मुश्किल दौर में भी अच्छा करेंगे..!! *धन्यवाद* 🙏🙏विनीत:-निजी शिक्षण संस्थान संघ गुड़ामालानी