युवराज सिंह सोढा

युवराज सिंह सोढा मेरे अपने कहीं कम न हो जाएँ ............!!
इस डर से
मुसीबत में किसी को आजमाता नहीं.....!!!
मैं आजकल।
...युवा

15/08/2026
दिनांक 14 जुलाई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित करियर मार्गदर्शन कार्यशाला का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस चार दिवसीय प्...
17/07/2026

दिनांक 14 जुलाई 2026 से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित करियर मार्गदर्शन कार्यशाला का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान हमें करियर काउंसलिंग, साइकोमेट्रिक परीक्षण, संकाय चयन, रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर, रोल प्ले, केस स्टडी तथा विभिन्न व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से अनेक नई जानकारियाँ एवं उपयोगी अनुभव प्राप्त हुए।

मैं डाइट बाड़मेर के प्राचार्य महोदय, सभी संसाधन व्यक्तियों, प्रशिक्षकों तथा आयोजन से जुड़े प्रत्येक सदस्य का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने पूरे समर्पण एवं उत्कृष्ट मार्गदर्शन के साथ इस कार्यशाला को सफल बनाया। साथ ही सभी साथी प्रतिभागियों का भी धन्यवाद, जिनके सहयोग, सहभागिता एवं सकारात्मक वातावरण ने इस प्रशिक्षण को यादगार बना दिया।

विश्वास है कि यहाँ प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव को हम अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों के हित में प्रभावी रूप से लागू करेंगे तथा उन्हें सही करियर मार्गदर्शन प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

आप सभी के उज्ज्वल भविष्य एवं उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामनाओं सहित।

सादर धन्यवाद। 🙏

मुक्तिनाथ की ओर – एक यात्री की नेपाल यात्रा इस यात्रा के कुल 11 भाग हैं जो आप सभी से साझा करना चाहूंगा अगर कोई गलती हो म...
12/06/2026

मुक्तिनाथ की ओर – एक यात्री की नेपाल यात्रा
इस यात्रा के कुल 11 भाग हैं जो आप सभी से साझा करना चाहूंगा अगर कोई गलती हो माफ़ करना।

लेखक: Yatrihunmain

यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का नाम नहीं है।

यदि ऐसा होता तो हर ट्रेन टिकट, हर बस यात्रा और हर विमान यात्रा एक जैसी होती।

असल में यात्रा उन अनुभवों का नाम है जो रास्ते में मिलते हैं। उन लोगों का नाम है जो अचानक जीवन में आते हैं और याद बनकर रह जाते हैं। उन दृश्यों का नाम है जिन्हें कैमरा कैद तो कर लेता है, लेकिन आंखें और दिल कभी भूल नहीं पाते।

मेरी यह नेपाल यात्रा भी कुछ ऐसी ही रही।

3 जून की शाम राजस्थान के बाड़मेर से शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य केवल नेपाल घूमना नहीं था। मन में वर्षों से एक इच्छा थी कि हिमालय की गोद में बसे मुक्तिनाथ धाम के दर्शन किए जाएं।

यह मेरी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा भी थी।

जब दिल्ली एयरपोर्ट पर पासपोर्ट पर पहली बार विदेशी मुहर लगी, तब एक अलग ही खुशी महसूस हुई। हालांकि नेपाल पहुंचने के बाद जल्दी ही एहसास हो गया कि यह देश विदेशी कम और अपना अधिक लगता है।

भाषा परिचित।

संस्कृति परिचित।

खान-पान परिचित।

और सबसे बढ़कर लोग बेहद आत्मीय।

इस यात्रा में मैंने पशुपतिनाथ की आध्यात्मिकता देखी, थमेल की चहल-पहल देखी, पोखरा की झीलों का सौंदर्य देखा, मुक्तिनाथ की दिव्यता का अनुभव किया, कागबेनी की घाटियां देखीं, मार्फ़ा की परंपराएं देखीं और काठमांडू की ऐतिहासिक विरासत को करीब से महसूस किया।

लेकिन इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद स्थान नहीं थे।

सबसे बड़ी उपलब्धि थे अनुभव।

एक रात की मूसलाधार बारिश।

हिमालय की ठंडी हवाएं।

108 जलधाराओं का स्नान।

राजकुमार भाई जैसी अनमोल मुलाकात।

और घर लौटते समय यह एहसास कि दुनिया अभी बहुत बड़ी है और देखना अभी बहुत बाकी है।

यह यात्रा-वृत्तांत उन्हीं अनुभवों का संग्रह है।

यदि आप इसे पढ़ते समय कहीं मुस्कुराएं, कहीं भावुक हों, कहीं स्वयं को मेरे साथ यात्रा करते हुए महसूस करें, तो समझूंगा कि मेरा प्रयास सफल हुआ।

तो आइए...

मेरे साथ चलिए—

बाड़मेर से मुक्तिनाथ तक।

यात्रा सारांश (Journey Overview)

दिनांक स्थान मुख्य गतिविधियां

3 जून बाड़मेर → जोधपुर यात्रा प्रारंभ
4 जून दिल्ली → काठमांडू पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान
5 जून काठमांडू पशुपतिनाथ, बौद्धनाथ, थमेल
6 जून काठमांडू → पोखरा हिमालयी उड़ान, फेवा लेक
7 जून पोखरा शहर दर्शन, गुफाएं, झरने, मंदिर
8 जून पोखरा → मुक्तिनाथ सड़क यात्रा, रूप्से झरना, तातोपानी
8-9 जून मुक्तिनाथ दर्शन, 108 कुण्ड, ज्वाला माई
9 जून कागबेनी, मार्फ़ा हिमालयी गांव
9-10 जून पोखरा → काठमांडू रात्रिकालीन बस यात्रा
10 जून काठमांडू, भक्तपुर, ललितपुर राजकुमार भाई के साथ भ्रमण
11 जून खरीदारी, वापसी एयरपोर्ट प्रस्थान
12 जून दिल्ली खारी बावली, दिल्ली जंक्शन
13 जून बाड़मेर यात्रा समाप्त

नेपाल जाने वालों के लिए मेरे सुझाव

1. मुक्तिनाथ जा रहे हैं तो

ऊंचाई का ध्यान रखें।

पानी खूब पीते रहें।

एकदम तेजी से चढ़ाई न करें।

बुजुर्गों के लिए पोनी और पालकी सुविधा उपलब्ध है।

2. पोखरा में

फेवा लेक बोटिंग जरूर करें।

ताल बाराही मंदिर अवश्य जाएं।

लेकसाइड पर शाम की वॉक मिस न करें।

3. काठमांडू में

पशुपतिनाथ सुबह जल्दी जाएं।

थमेल शाम को देखें।

बौद्धनाथ और स्वयंभूनाथ दोनों अवश्य जाएं।

4. खरीदारी के लिए

थमेल

असन बाजार

खारी बावली (दिल्ली वापसी में)

5. होटल बुकिंग

मुक्तिनाथ क्षेत्र में होटल पहले देखकर तय करें।

केवल ड्राइवर की सलाह पर तुरंत बुकिंग न करें।

यात्रा के सबसे यादगार क्षण

🥇 पासपोर्ट पर पहली विदेशी मुहर

🥈 मुक्तिनाथ के 108 जलधाराओं का स्नान

🥉 हिमालय के ऊपर उड़ती पोखरा वाली फ्लाइट

🏅 कागबेनी का अद्भुत दृश्य

🏅 मार्फ़ा की जेरी गल्ली

🏅 राजकुमार भाई से मुलाकात

🏅 दिल्ली एयरपोर्ट से आखिरी मेट्रो पकड़ना

यात्रा के सबसे मजेदार पल

😄 थमेल की गलियों में "नाइट लाइफ निरीक्षण अभियान"

😄 बार के बाहर स्वागत के लिए तैयार लोग और मेरा तुरंत निकल लेना

😄 येलो लाइन का आखिरी टिकट मिलते ही काउंटर बंद होना

😄 विशाल रेलवे रिटायरिंग रूम में अकेले राजा की तरह सोना

😄 राजकुमार भाई का ड्राइवर से फोटोग्राफर बन जाना

मेरी रेटिंग

श्रेणी रेटिंग

नेपाल के लोग ⭐⭐⭐⭐⭐
पशुपतिनाथ ⭐⭐⭐⭐⭐
मुक्तिनाथ ⭐⭐⭐⭐⭐
पोखरा ⭐⭐⭐⭐⭐
कागबेनी ⭐⭐⭐⭐⭐
मार्फ़ा ⭐⭐⭐⭐⭐
थमेल ⭐⭐⭐⭐
काठमांडू ट्रैफिक ⭐⭐⭐
नेपाल की प्राकृतिक सुंदरता ⭐⭐⭐⭐⭐
संपूर्ण यात्रा अनुभव ⭐⭐⭐⭐⭐

अंतिम शब्द

"यात्राएं समाप्त नहीं होतीं, केवल अगली यात्रा तक विराम लेती हैं।"

नेपाल से लौटते समय मेरे बैग में ड्राई फ्रूट्स, स्मृति-चिह्न और हजारों तस्वीरें थीं।

लेकिन सबसे मूल्यवान चीज जो मैं साथ लाया—

वह अनुभव थे।

और शायद हर सच्चे यात्री की सबसे बड़ी कमाई भी यही होती है।

धन्यवाद नेपाल।

फिर मिलेंगे।

– Yatrihunmain 🙏🏔️🇳🇵🇮🇳

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