26/12/2021
बिन्दु -
1. पिछले 25 साल से हम राजपूतों से अलग पहचान के राजनीति में जूझ रहे हैं, लेकिन राजपूत हमें अपना वोट बैंक समझ कर अपना काम चला रहे हैं।
2. आनन्दपाल फेक एनकाउंटर पर न्याय की लड़ाई सहित सैकड़ों अन्य समाज बन्धुओं के न्याय हेतु, महासभा की लड़ाई व आन्दोलन के परिणाम।
3. हमारी आबादी 7 प्रतिशत व राजपूत 2 प्रतिशत, हम हमारी निष्क्रियता से पिछड़े हुवे हैं लेकिन राज्य में कांग्रेस को 3 बार ओबीसी का मुख्यमंत्री देने के बावजूद हमारे समाज व संगठन में प्रतिनिधित्व की कमी।
4. राजनीति में अपराधियों के प्रतिनिधित्व पर रोक लगे।
5. निजीकरण से ओबीसी को आरक्षण में नुकसान, निजीकरण से महंगाई में प्रतिदिन बढ़ोतरी।
6. रावणा राजपूत समाज भूमिहीन व अति पिछड़ा समाज है, निजीकरण के कारण बढ़ रही महंगाई से जीवनचर्या अस्त व्यस्त हो रही है। कुछ परिवार गरीबी व भूख के कारण जिन्दगी से हार मान चुके हैं।
7. हमारे समाज की वास्तविक स्थिति सरकारों तक नहीं पहुंच पा रही है।
8. अति पिछड़े समाज को अपनी बात रखने के लिए शक्ति प्रदर्शन की आवश्यकता पड़ती है तो उसके लिए अर्थ का होना अतिआवश्यक है, जो एक पिछड़े व स्वाभिमान समाज के लिए असम्भव है।
9. निजी संचार कम्पनी पर नियन्त्रण न होने से मनचाहा भुगतान देना पड़ रहा है, जिस पर केन्द्र सरकार का कोई नियन्त्रण नहीं है। यह निजीकरण की अर्थव्यवस्था का एक मात्र छोटा सा उदाहरण है।
10. लोकतन्त्र के बचाव हेतु आपके क्या प्रयास हैं और हमारी क्या सहभागिता हो सकती है???