Shane Tudu

Shane Tudu Jawge dular jiyar tahen ma

राजनीतिक झारखंड  का स्थापना दिवस मे अस्थायी जनजाति का राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर15 नवंबर___ जनजाति    झारखंड अवतरण दि...
16/11/2023

राजनीतिक झारखंड का स्थापना दिवस मे अस्थायी जनजाति का राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर

15 नवंबर___ जनजाति


झारखंड अवतरण दिवस में इतना गाहे-बगाहे किस ख़ुशी में
, परगना के ऊपर में परत चढ़ाने की कोशिश या झारखंडी को कभी आदिवासी तो कभी वनवासी से “जनजाति “ शब्द के साँचे में ढालने की कोशिश।
हमे लगता है शोधकर्ता में रुचि रखने और झारखंड को एक बार फिर अध्ययन करने की अत्यंत आवश्यक है ।

झारखंड के समूहों को “झारखंडी “ नही पुकार सकते , लेकिन चैतन्य महाप्रभु ने अपने पूरी यात्रा के दौरान झारखंड में बिताये गये संस्कृति की झलक को , पूरी से प्रकाशित माड़ीका पत्रिका में “झारख़ंडी विधियते “ का ज़िक्र करते हैं ।
इसलिये शोधकर्ता को पुनः एक बार दोबारा झांकना चाहिये ।

Tribe /schedule tribe /tribal अंग्रेज़ी के ये 3 शब्द हमेशा से बुद्धिमानो को छकाया है । आज़ाद भारत में भी ये एक पहेली हुआ है जबकि पहेली का जवाब मयूरभंज ,ओडिसा में है । लेकिन सवाल है , 1950- 1972 तक झारखंड कहाँ था ?

जाहेरखोंड परगना बाबा कि ओर से इस शुभ अवसर पर और इस बोर ओत के सभी आर्जाव होड़ को शुभ संदेश देता है
(जावगे दुलड़ जीयड़ ताहेन मे)

जुवन परगना- शेन टुडू

उगता हुआ सूरज सुनो क्या कहता हैउदय हो या अस्तएक समान रहता है।सोच नई रखो उमंग नया रखोविश्वास के साथ कदम नया रखोजीवन में अ...
14/04/2023

उगता हुआ सूरज

सुनो क्या कहता है
उदय हो या अस्त
एक समान रहता है।
सोच नई रखो उमंग नया रखो
विश्वास के साथ कदम नया रखो
जीवन में अपने उम्मीद नई रखो।
उगता हुआ सूरज
सुनो क्या कहता है।
दूसरों को भी प्रकाशित करो
अपने प्रकाश से
भरा हो मन तुम्हारा
सदैव आत्मविश्वास से
असंभव को संभव बनाओ
नित प्रयास से
उगता हुआ सूरज
सुनो क्या कहता है।
जीवन का सारा अंधेरा छंट जाएगा
नई सुबह के साथ नया कल भी आएगा
उजाला तुम जग में फैलाओ अपने काम से
उगता हुआ सूरज
सुनो यही कहता है।।

ᱡᱟᱭᱡᱤᱱ᱾ᱯᱟᱨᱜᱟᱱᱟ ᱵᱟᱵᱟमेरा निजी तौर  से मानना है  गुरुकुल शिक्षा स्वरुप सबसे कारगर है ...बशर्ते की  #गुरु का भाषायिक मुल जे...
12/04/2023

ᱡᱟᱭᱡᱤᱱ᱾ᱯᱟᱨᱜᱟᱱᱟ ᱵᱟᱵᱟ

मेरा निजी तौर से मानना है गुरुकुल शिक्षा स्वरुप सबसे कारगर है ...बशर्ते की #गुरु का भाषायिक मुल जेहन मेँ आ जाये तो ....शिक्षा कोई पेट -पालन का श्रोत कभी नहीं होना चाहिए .. वर्तमान की व्यवशायिक हवायें का रुख कहाँ इसका अंत है ये भी एक मानसिकता का द्रिढ़ता है .. आखिर हम खुद को प्रकृति से लबरेज पाते हैं ...समूचा ब्रहमांड अलौकिक है फिर हम छोटा सा धुल के बराबर का मानव ज़िसमे समझने की शक्ति है ..फिर भी हम प्राकृति के विरूद्ध सोच कैसे सकते हैं .. ..

आधुनिकता के दौर मेँ .बड़ा बड़ा डिग्री ले के ..बरगद ऐसा विशाल पेड़ को बौना क़र के रखना , और खुश हो जाना .. तकनिक वो है जो प्राकृति के अनुरूप चले मानवजगत के लिये ...
पेड़ को काटना ,development के नाम पर ..आज ना जाने कितने बेघर है साथ मेँ पक्षी प्रजाती का चहचहाना तक बंद हो चला है . सिर्फ मानव ही बेघर ही नहीं साथ मेँ हर जीव ज़िसमे सांसे बसती है ..सभी बेघर है .आखिर ये शिक्षा प्रणाली जहां हम खुद की ज़िम्मेदारी से दूर , लूटने की शिक्षा की कमरे मेँ बैठते हैं ..
गुरुकुल का एहसास मुझे फेड -रे -सेन दिया ..जहां गुरु का मतलब और शिक्षित होने का मतलब सिखाया .. .

     A rhyme of "  " is a repetition of similar sounds (usually, exactly the same sound) in the final stressed syllables...
11/04/2023






A rhyme of " " is a repetition of similar sounds (usually, exactly the same sound) in the final stressed syllables and any following syllables of two or more words. Most often, this kind of "perfect" rhyming is consciously used for effect in the final positions of lines of poems and songs.

30/03/2023

Santali Linguistic Syllabus :

Part-2
Socio_Political, historical and cultural discourse:
(Role of Desh_Majhi_Pargana and Modern Santali Writers)
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भारत आजादी की ओर अग्रसर होता है ज़िसमे राजशाही खत्म होने को है , लेकिन भारत का भविष्य को ले कर अंग्रेजी सरकार द्वारा cabinet mission plan -1946 का गठन होता है जिसके फलस्वरुप indian independence act 1947 के तहत Two -Nation theory में 565 से ज्यादा प्रांतीय राज्य का भाग्य का फैसला , राजाओं को अधिकारिक रुप से अधिकार दिया गया की , या तो वो भारत -पाकिस्तान में कहीं भी विलय हो जाये,, या नहीं तो स्वतंत्र रख सकता है ... इसलिये 15 Aug 1947 ज़म्मुकश्मीर , हैदरावाद , जुनागढ़ और मयूरभंज ने अपने आपको स्वतंत्र अलग घोषित किया |

मयूरभंज राजा ने अपना पावर 9 Dec 1947 को लिखित रुप से प्रजामंडल को सौंप दिया , 51 प्रजामंडल लीडर में से 12 प्रजामंडल लीडर को ले कर , 10 Dec 1947 को मयूरभंज ने विधानसभा का गठन किया , उन 12 में से , 11 संताली और 1 गोंड थे | 15 Dec 1947 को स्वराज्य दिवस जश्न मनाया जाता है और स्वराज्य दिवस का अधिकारिक अवकाश भी घोषित होता है ..

मयूरभंज राज्य के विधानसभा में march -1948 में बज़ट सत्र के दुसरे कार्यकाल में सुनाराम सोरेन द्वारा मयूरभंज राज्य के संप्रभूत्व को ले कर बात रखा , ज़िसमे संताली को राजकीय भाषा के साथ सर्वसम्मति से पारित हुआ और राजा के आशुलिपिक पृथ्वीनाथ मूर्मु ने संताली भाषा का सदन के अंदर बातचित को डिकोडिंग करने के लिये short -hand विकसित किया ज़िसको "अडांग-गार " कहा गया ..

राजनितिक की ऊहा-पोहा में .Foreign Jurisdiction Act 1947 के तहत भारत सरकार ने ..ministry of state , Gazatte notification 388-P , 31 dec 1948 , कर के मयूरभंज राज्य को अपने अधीन लिय़ा ,ज़िसमे पंडित नेहरू के four point formulation के रुप में "जल -जंगल -ज़मीन और आर्थिक रुप से बराबरी " के उपरोक्त रुप में जाना जाता है 10 साल के निश्चित समयविधि के लिये (Starting of so called caste base Reservation under Constitutional Order 1950 )

और 1/1/1949 से , in exercise of the power conferred by section 4 of the Extra provincial jurisdiction act , 1947 (XLVII of 1947 ) with notification no. 388-48-P , dated the 31st dec 1948 of the Government of india in ministry of states. और Administration of Mayurbhanj statr order ,1949. notification no -2A , ओडिसा सरकार को ज़िम्मा सौंप दिया प्रभावी करने के लिये .

10 साल के प्रतिबद्धता का जब वादाखिलाफी होने के बाद फिर 5/5//1962 को परगनाओं ने बैठक बुलाया विजेतड़ा गांव (मयूरभंज ) में और आधुनिक संताली भाषा -साहित्य प्रेमियों को ज़िम्मा दिया गया , मयूरभंज के बाहर संताली भाषा के राजकीय़ सम्मान का बात का प्रसार करने के लिये ..
जिसके त्वरित संताल परगाना में 1967-68 में संताली भाषा - साहित्य प्रेमी मे गति आ जाता है और संताल परगाना के पाडेरकोला के देश-परगाना शाम टूडू के पोता परगाना दुबराज टूडू द्वारा बेतकुंदरी डही (बंगाल ) से 1977 में दोबारा "ओल -चिकी " का आल इंडिय़ा में छटियेर करते हैँ.

और कुछ लोगों द्वारा संताली स्टेट को मुक्ती करने के लिये जाहेर खोंड परगाना शासोन मुक्ती के लिये राजनीतिक मोर्चा भी बना और खुद को झारखण्डी का हितैषी गुरु मान बैठा मगर दुखद है रोटी सेकने वाले के लिये " स्वभीमान " राजनीतिक रोटी का जरिया बना लिया साथ में तथाकथित संताली लेखक 1998 से भाषा आंदोलन के नाम पर दोनो ने अपने अपने स्तर से संताली के मानसम्मान को ठेंस पहुंचाया है ,, राजकीय भाषा संताली का इतिहास जाने बिना अपने रोटी का जरिया बना लिये हैँ और कोई संताली भाषा को दलित भाषा के रुप में अवार्ड स्वीकारता है तो कोई बांगाली के नीचे में जा के रोटी -बोटी नोचता है.

संताली भाषा का ना बंगाल से और ना ही "किं -कर्तव्य-विमुड़" वाला झारखण्ड से मतलब है. संताली भाषा का अपना राजकीय सम्मान है. ज़िसमे झारखण्डी आत्मा बसती है .....

Reference --
*Untold stories of 1st Responsible Govt of Mayurbhnaj by Kalpana das
*Cabinet Mission Plan 1946
*Independence Act -1947
*Foreign Jurisdiction Act -1947
* Govt of India in Ministry of states Gazattate Notification 388-P on 31dec 1947
* Administration of Mayurbhanj State order 1949

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27/03/2023

ᱡᱟᱦᱮᱨ ᱠᱷᱚᱱᱰ ᱯᱩᱨᱩᱫᱷᱩᱞ ᱠᱟᱛᱷᱟ
Jaher_Khond Philosophical thought:

᱑) ᱢᱚᱜᱚᱡᱽ ᱫᱟᱲᱮ ᱫᱚ ᱪᱮᱫ ᱠᱟᱱᱟ??
What is Mental health?

᱒) ᱱᱟᱦᱟᱜ ᱢᱚᱜᱚᱡᱽ ᱫᱟᱲᱮ ᱱᱟᱜᱟᱢ?
Modern history of Mental health

ᱡᱟ ᱞᱮᱠᱟᱛᱮ ᱢᱚᱜᱚᱡᱽ ᱫᱟᱲᱮ ᱟᱨᱡᱟᱣ
Natural way to train the Mind

Natural Philosophy of Universe is  anticlock … The Rotation of earth .. …creeping of creep …… a Foetus moves inside the ...
26/03/2023

Natural Philosophy of Universe is anticlock … The Rotation of earth .. …creeping of creep …… a Foetus moves inside the mother -womb before birth by 3 or 5 times in anti-clockwise … The Vortex …. Etc ..

The natural culture is anti-clock wise ….
The natural customary community of हड़प्पा are follower of natural philosophy.. this sign is Significance of SYMBOLIC _literature of natural philosophy .. and customary community of Bor_Ot Community follows natural activity of universe in their Customs and tradition to educate the people among socio circumstances ..

This can be understand by Meditation .. a natural way to trained the mind “
ᱜᱚᱥᱟᱶ ᱛᱚᱛ ᱥᱚᱛ ᱥᱟᱹᱨᱤ
ᱫᱚᱦᱟᱭ ᱠᱟᱹᱢᱨᱩ ᱜᱩᱨᱩ ᱵᱟᱵᱟ

भारतीय भाषा_साहित्य को कमजोर करना और भारतीय संस्किर्ती के scientific behavior को अंधविश्वास बोल के दुष्प्रचार करना , धार...
14/03/2023

भारतीय भाषा_साहित्य को कमजोर करना और भारतीय संस्किर्ती के scientific behavior को अंधविश्वास बोल के दुष्प्रचार करना , धार्मिक व्यवसाय का खेल,धर्मांतरण की आड़ में ,,, धर्मांतरण का खेल में , (Norway_perosn) का खुरपाती दिमाग #जाहेर_खोंड कल्चर में.
PO bodding ,जो In 1890, he arrived ,(Santal Parganas) as missionary priest. When Skrefsrud died in 1909, Bodding took over as the leader of the Norwegian missionary organization Santaline Mission (Den norske Santalmisjon). He served in India for 44 years (1889–1933), and operated mainly from the town Dumka in the Santhal Parganas-district..

ये महज एक धर्म प्रचारक के रूप में भारत में नियुक्त हुआ था और दुमका में रहा ,और बंगलादेश और भारत अन्य हिस्से में गया धर्म प्रचार के लिए ,, 1914 में "बाइबिल" को संताली में अनुवाद किया "ROMAN " script में , जिसका अभी ,,missionaries लोग Roman ka प्रचार करना चाहते हैं और चाह रहे हैं ,जो की देश और संविधान के विरुद्ध है ,, ये वाही PO bodding है , जो संताली भाषा को धार्मिक जाल में फसाना चाहा और संताली भाषा को दो भाग में बांटने का निरर्थक कोसिस किया था "north_santal_dialect & south_santal_dialect में ,,और संताली भाषा को धार्मिक स्वरुप देना चाहा , roman में कर के ,, और भाषा (language)" को dialect (बोली ) के प्रस्तुत कर के ,संताली भाषा के originality को बर्बाद कर के ,धार्मिक स्वरुप में , ईसाई धर्म में परिवर्तित लोग के लिए उपयोग किया और भारतीय भाषा में "roman" का promotion का जरिया बनाया ..

PO bodding ने संताली भाषा को roman promoteकर के एक भारतीय भाषा और साहित्य और कल्चर को संक्रमित किया है ,इसलिए आज भी , उसके follower ,roman का प्रचार करने पे दिन रात लगे रहते हैं ,जो की देश का विचारधारा और भारतीय संविधान के विपरीत है ,,, धार्मिक के खेल में PO bodding का नाम बचाने के लिए ,अपने ही देश का भाषा साहित्य और कल्चर के साथ खेलना ये कैसा धर्मनिति ... बाइबिल को "संताली भाषा " को roman लिपि में अनुवाद किया गया है धर्म प्रचार के लिए इसलिए OL_CHIKI जो संताली का आधिकारिक लिपि और (OL-CHIKI has retrieved the natural linguistics term of natural language ..) को गलत तरीके से तोड़ मरोड़ कर इसका अवहेलना करते हैं ,, PO bodding को दुमका में दफनाया गया है वो भी जाहेर _खोंड के रिवाज से ही (north-south) में ही ,,,,,

धार्मिक व्यापारिक PO Bodding ,ने बहुत कोसिस किया और बनने का ,PO bodding ने दुमका के ही "ओझा कुलयान हडाम" से जाहेर -खोंड का सिद्-विद ,रीति निति और थोड़ा सा कुछ वाकया कहीं कहीं का कुछ सिखा ,,और खुद को जाहेर -खोंड के समूह का ज्ञानी समंझने लगा था. ,ऐसा लगता है मानो , #मांझी_परगना को -vedh_chhedh ,jharni-maantaar ,serenj_baakhern ,,,po bodding ने ही सिखाया है क्या ? उसके पहले #जाहेर _खोंड के लोगों को कुछ नहीं आता था क्या ? दोहाय कमरू गुरु बाबा भी , po bodding से ज्ञान लिए थे क्या ... ?",,,,और खुद को indologist समझने लगा था और प्रमोट भी करने लगा था ,,, उसी ने ही ,,,रोड़ को parsi बता के संताली में विषाक्त करने का कोसिस किया था...

ᱥᱮᱨᱢᱟ ᱥᱚᱨᱚᱜᱽ ᱠᱟᱛᱷᱟ ᱦᱟ_ᱦᱟ_ᱲᱟ  ᱜᱮᱭᱟ, ᱥᱚᱛ ᱥᱟᱨᱤ ᱫᱚ ᱡᱩᱜᱮ ᱡᱩᱜᱮ .
09/03/2023

ᱥᱮᱨᱢᱟ ᱥᱚᱨᱚᱜᱽ ᱠᱟᱛᱷᱟ ᱦᱟ_ᱦᱟ_ᱲᱟ ᱜᱮᱭᱟ, ᱥᱚᱛ ᱥᱟᱨᱤ ᱫᱚ ᱡᱩᱜᱮ ᱡᱩᱜᱮ .

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