23/01/2026
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला,
या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वरदण्ड मण्डित करा,
या श्वेत पद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभि:
देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती,
निःशेष जाड्यापहा॥
02/01/2026