01/07/2023
⚠ बड़ी कठिन डगर है ये ⚠
'इह़्क़ाक़े हक़' व 'इब्त़ाले बात़िल' की राह से ज़्यादा कोई राह सख़्त नहीं होती. इसमें आपके बहुत से अपने भी, आपसे बदगुमान होकर, आपके दुश्मन बन जाते हैं. तो अगर दोनों में से किसी एक को ही चुनने की नौबत आ जाए, फिर अपनों को छोड़ दें, मगर इस राह को न छोड़ें. क्यूंकि ये राह अल्लाह (ﷻ) और उसके रसूल (ﷺ 💚) की रज़ा के लिए चुनी जाती है, लोगों की ख़ुशामद के लिए नहीं;
अल्लाह (ﷻ) ने क़ुरआन 9:24 में इरशाद फ़रमाया:
"قُلْ إِن كَانَ آبَاؤُكُمْ وَأَبْنَاؤُكُمْ وَإِخْوَانُكُمْ وَأَزْوَاجُكُمْ وَعَشِيرَتُكُمْ وَأَمْوَالٌ اقْتَرَفْتُمُوهَا وَتِجَارَةٌ تَخْشَوْنَ كَسَادَهَا وَمَسَاكِنُ تَرْضَوْنَهَا أَحَبَّ إِلَيْكُم مِّنَ اللَّهِ وَرَسُولِهِ وَجِهَادٍ فِي سَبِيلِهِ فَتَرَبَّصُوا حَتَّىٰ يَأْتِيَ اللَّهُ بِأَمْرِهِ ۗ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْفَاسِقِينَ"،
"तुम फ़रमाओ: 'अगर तुम्हारे बाप, और तुम्हारे बेटे, और तुम्हारे भाई, और तुम्हारी औरतें, और तुम्हारा कुनबा, और तुम्हारी कमाई के माल, और वो सौदा जिसके नुक़सान का तुम्हें डर है, और तुम्हारे पसंद का मकान; ये चीज़ें अल्लाह और उसके रसूल, और उसकी राह में लड़ने से ज़्यादा प्यारी हों, तो रास्ता देखो, यहां तक कि अल्लाह अपना हुक्म लाए', और अल्लाह फ़ासिक़ों को राह नहीं देता...!"
[कंज़ुल् ईमान]
जो सच्चा मुअमिन होगा, वो अपने दीन के लिए, ज़रूरत पढ़ने पर, सबको छोड़ने पर बख़ुशी राज़ी होगा, और क़रीबी से क़रीबी शख़्स भी अगर दीन का दुश्मन हो जाए तो उससे बिल्कुल उल्फ़त व मुह़ब्बत नहीं रखेगा;
फिर अल्लाह (ﷻ) ने क़ुरआन 58:22 में इरशाद फ़रमाया:
"لَّا تَجِدُ قَوْمًا يُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ يُوَادُّونَ مَنْ حَادَّ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَوْ كَانُوا آبَاءَهُمْ أَوْ أَبْنَاءَهُمْ أَوْ إِخْوَانَهُمْ أَوْ عَشِيرَتَهُمْ ۚ أُولَٰئِكَ كَتَبَ فِي قُلُوبِهِمُ الْإِيمَانَ وَأَيَّدَهُم بِرُوحٍ مِّنْهُ ۖ وَيُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ أُولَٰئِكَ حِزْبُ اللَّهِ ۚ أَلَا إِنَّ حِزْبَ اللَّهِ هُمُ الْمُفْلِحُونَ."
"तुम न पाओगे उन लोगों को, जो यक़ीन रखते हैं अल्लाह और पिछले दिन पर, कि दोस्ती करें उनसे जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल से मुख़ालफ़त की, अगरचे वो उनके बाप या बेटे या भाई या कुनबे वाले हों;
ये हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान नक्श फ़रमा दिया, और अपनी तरफ की रूह से उनकी मदद की, और उन्हें बाग़ों में ले जाएगा जिनके नीचे नहरें बहें, उनमें हमेशा रहें, अल्लाह उनसे राज़ी और वो अल्लाह से राज़ी;
ये अल्लाह की जमाअ़त है;
सुनता है! अल्लाह ही की जमाअ़त कामयाब है."
[कंज़ुल् ईमान]
क़ुरआन 9:23 में भी इरशाद हो चुका:
"یٰۤاَیُّهَا الَّذِیْنَ اٰمَنُوْا لَا تَتَّخِذُوْۤا اٰبَآءَكُمْ وَ اِخْوَانَكُمْ اَوْلِیَآءَ اِنِ اسْتَحَبُّوا الْكُفْرَ عَلَى الْاِیْمَانِؕ وَ مَنْ یَّتَوَلَّهُمْ مِّنْكُمْ فَاُولٰٓئكَ هُمُ الظّٰلِمُوْنَ"،
"ऐ ईमान वालो!
अपने बाप, और अपने भाइयों को दोस्त न समझो, अगर वो ईमान के मुक़ाबले में कुफ़्र को पसंद करें; और तुम में जो कोई उनसे दोस्ती करेगा, तो वही ज़ालिम है."
[कंज़ुल् इ़र्फ़ान]
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