ज्ञानगंगा शिक्षक संगम परिवार Gyanganga Shikshak Sangam Family
शिक्षा और साहित्य का अनोखा संगम।
11/04/2026
With Pooran Lal Chaudhry – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
02/03/2026
प्रेम रंग होली
भगवद्द्घाप्ति का रास्ता हैं त्योहार होली शब्द अपने आप में आनंदित कर देने वाला शब्द हैं। होली को अगर विभाजित करते हैं तो दो वर्ण निकलते हैं होली तात्पर्य हुआ तुम्हारी संग होली, मैं तुम्हारी / तुम्हारा हो गया, तुम्हारी / तुम्हारा हो गई। इतना समर्पण बड़ा त्यौहार है जो भारत को महान बनाने का द्योतक है। सभी चिर परिचित है की होली बसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली रंगों का तथा हंसी खुशी का त्यौहार है। मनाने का कारण भी हम भारतीयों की मन मस्तिष्क पर अपना छाप छोड़े हैं। क्योंकि हमारी दादी-नानी के द्वारा हम जो सुनते आ रहे हैं - एक हिरण्यकश्यप नामक राक्षस था
जिसका कुल राक्षस कुल था। उसकी संतान प्रहलाद भगवद् प्रेमी था, ओम नमो भगवते वासुदेवाय जाप से भगवान विष्णु की भक्ति प्राप्त कर चुका था। हिरण्यकश्यप की बहन होलिका थी हिरण्यकश्यप चाहता था कि उसका पुत्र उसको भगवान माने परंतु प्रहलाद को सत्य का ज्ञान हो चुका था सत्य सिर्फ भगवान विष्णु है और वही ईश्वर है। भगवद् प्रेम से हारा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के माध्यम से प्रहलाद की जीवन लीला समाप्त करनी चाही होलिका भी अपने वरदान से न भस्म होने वाले वस्त्र से गर्वित थी लेकिन प्रभु लीला से वस्त्र उड़ा और अग्नि समाधि में होली का अग्नि देव को समर्पित हो गई, और प्रहलाद की भक्ति ने अमरता प्राप्त की। इस सत्य-असत्य, पाप-पुण्य के महायुद्ध में विजय श्री सत्य को प्राप्त हुई। एक कथा की ओर ध्यान खींचना चाहूं तो अपना माखनचोर, चोरों का भी चोर, बरसाने के हृदय में वास करने वाले मुरलीधर कहैया की लीला जो विश्व प्रसिद्ध है। राधा-कृष्ण की होली बरसाने की लठ-मार होली प्रेम का ऐसा दृश्य जहां संपूर्ण विश्व एक जगह समाहित हो जाता है। जहां प्रेम ही प्रेम, आनंद ही आनंद, प्रेम ही प्रेम का रूप लिए से सभी जगह नजर आता है।
इस तरह से होली का त्यौहार मनाया जाता है। रंगों का त्योहार, गुलाल लगाने का त्योहार कितना अनुपम मनोहर है। समर्पण की पराकाष्ठा तो देखिए - मां-पुत्र का प्रेम, पुत्र गुलाल लगाकर चरण छुए, तो पत्नी- पति को (एक-दूसरे को) रंग लगाकर सात जन्मों का साथ मांगे। पड़ोसी-पड़ोसी को गुलाल लगे तो विश्वास, मदद की पुकार हुआ करें, देवर-भाभी में गुलाल लगे तो मां-पुत्र जैसा प्यार, स्नेह मिले, बड़ों से छोटे में गुलाल लगे तो आशीर्वाद, जीत, सपनों की उड़ान मिले। छोटे से बड़ों में लगे तो आदर सत्कार का भाव मिलें। यह त्योहार भारत में ही देखने को मिलता है जहां प्रेम का इजहार भी अनोखा है। जिससे सोच सुन देखकर आंखें नम हो जाती है। होली तो प्रेम और समर्पण का त्यौहार है इसे मानने वाले लोगों का हृदय भी पावन होता है। और पावन हृदय में भगवान का वास होता है। क्योंकि प्रेम ही ईश्वर का सार तत्व है। त्यौहार भी भगवद् प्राप्ति का रास्ता बन जाता है। जब हृदय पावन पवित्र हो जाता है। जब भी किसी को गुलाल रंग लगाएं, मन में अपार खुशी वह पवित्रता का भाव लिए लगाएं तो देखिएगा चमत्कार होगा जो आप मुख से नहीं बोल पाए वह मन से भाव दूसरे मन तक पहुंच जाते हैं। हम भारतीयों को अपनी संस्कृति का सदैव भान होना चाहिए। क्योंकि आज कहीं ना कहीं बुराई, जलन, होड़, नकारात्मकता जैसे भावों ने अपना स्थान बना रखा है। उन्हें जीतने ना देना ही हमारी संस्कृति है। इसलिए होली का त्योहार पवित्र भाव से मनाएं। होली मतलब तुम्हारे संग होली।
- शालिनी सिंह, कौशांबी
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01/03/2026
. रंग बिरंगी होली आई
रंग बिरंगी होली आई,
नीले, पीले हरी गुलाबी रंगों की है होली आई।
प्यार गुलाल और महकते हुऐ फूलों की होली आई।
दे आहुति होलिका की प्रहलाद की जान बचाई।
रंग बिरंगी होली आई।
खीर, कचौरी, गुझिया पकवन की सब जगह महक है छाई।
रंग बिरंगी होली आई।
रंग प्यार और स्नेह की घड़ी है आई
कन्हा के साथ राधा की ब्रज बाली होली आई।
रंग बिरंगी होली आई।
सद्भाव से खेले नर नारी, मार मार रंग की पिचकारी,
रंग गुलाल से खेलते बच्चों की
सब जगह है आती किलकारी,
रंग बिरंगी होली आई।
भूल सब वैराग दुश्मनी के आपस में खेलते थे भाई-भाई,
आज रंग भरे दुश्मनी के ऐसे दिलों में मिलकर,
ना खेलता है कोई भी भाई
वर्तमान में त्योहारों के रंग फीके से पड़ गए हैं भाई,
रंग बिरंगी होली आई
नीले पीले हरे गुलाबी रंगों की होली आई।
-डॉ त्रिलोक चन्द (सहायक अध्यापक)
संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय ओरिया रसूलाबाद कानपुर देहात।
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28/02/2026
. चले आओं कि होली है
किया है याद क्षण क्षण में, वरह के गीत गा गा कर,
लगाने रंग प्रेम का तुम चले आओ कि होली है।
मेरी हर आस में तुम हो मेरी हर सांस में तुम हो।
निभाने रीत तुम प्रीतम चले आओ कि होली है।
बिछाए फूल हैं मैनें तेरी राहों में सांवरिया
रचाने रास तुम मोहन चले आओ कि होली है।
है सूना तट यमुना का,सूनी गोकुल की गलियां।
सुनाने धुन मुरली की चले आओ कि होली है।
गए जबसे हो गोकुल तुम चुनर भीगी है आंसू से।
भिगोने नेह के रंग में, चले आओ कि होली है।।
- गुलाब मेरठी
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