Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly

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Department of law was established in 1987 running with LL.M. 4 semester and Ph.D. programme in Law subject. Free legal aid centre, Library, semaniar Hall,

04/09/2024

दिनांक 03/09/24 को एसएस लॉ कॉलेज में नवीन अपराधिक विधि विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए और अपना उद्बोधन दिया। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ प्रो. बलराज सिंह चैहान ने कहा कि अगर विधि का विशेष ज्ञान प्राप्त करना है तो आपको अंग्रेजी का भी ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीएनएसएस में कई प्रक्रियाएं हैं, जिसमें तलाशियों, जब्तियों और अपराध के दृश्य की वीडियोग्राफी और केस प्रॉपर्टी आदि की फोटोग्राफी शामिल है। अदालतों, पुलिस स्टेशनों और जेलों का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण, तकनीकी और सहायक कर्मचारियों की भर्ती और प्रशिक्षण, वित्तीय संसाधन और अंतर-एजेंसी समन्वय अति आवश्यक होंगे।

विशिष्ट अतिथि विधि संकायाध्यक्ष, एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली प्रो. अमित सिंह ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली एवं सुधार पर प्रकाश डालते हुए नई शिक्षा नीति के अनुरूप मूल्यांकन प्रक्रिया से छात्रों को अवगत कराया। न्याय साहिता के महत्पूर्ण धाराओं पर विचार प्रकट किए। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पीयूष तिवारी ने छात्रों को अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रखने के लिए प्रेरित किया।

इस मौके पर प्रबंध समिति के सचिव डॉ अवनीश कुमार मिश्र, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नारायण दत्त त्रिपाठी, महासचिव राजीव शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता मनेन्द्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ जयशंकर ओझा ने सभी का आभार व्यक्त किया। डॉ. पवन कुमार गुप्ता, डॉ. अनिल कुमार, अशोक कुमार, डॉ. अमित कुमार यादव, डॉ. अमरेंद्र सिंह ने अतिथियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह व पुस्तक प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनुराग अग्रवाल और स्वागत रंजना खंडेलवाल ने किया।

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 16/03/2024

आज दिनांक 16/03/24 को खंडेलवाल कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी , बरेली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति,2020 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। समारोह में प्रोफ़ेसर वंदना शर्मा, के सी एम टी के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर अमरेश कुमार, चेयरमैन विनय खंडेलवाल, कॉलेज के प्राचार्य डॉ आर के सिंह एवं बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र उपस्थित रहे। मैंने अपना व्याख्यान राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन हेतु आवश्यक कदम एवं चुनौतियां विषय पर केंद्रित किया। कॉलेज के प्राचार्य एवं मैनेजमेंट का सम्मान करने के लिए धन्यवाद।

25/01/2024

*राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर विधि विभाग में परिचर्चा एवं शपथ कार्यक्रम का आयोजन*

मतदाता दिवस के अवसर पर विधि विभाग महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली में राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधि *विभागाध्यक्ष व संकायाध्यक्ष डॉ अमित सिंह* द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर समस्त शिक्षक गण ,छात्र-छात्राएं, शोधार्थी एवं कर्मचारीगण को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मतदाताओं द्वारा ली जाने वाली शपथ दिलाई गई। उपस्थित सभी लोगों ने हाथ उठाकर शपथ ग्रहण की व सभी लोगों ने अधिक से अधिक युवा मतदाताओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित कर मजबूत लोकतंत्र के लक्ष्य को पूर्ण करने में सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में अपने संबोधन में डॉ अमित सिंह ने मतदाताओं की विधिक स्थिति पर प्रकाश डाला और मतदाताओं की अहर्ताओं एवं निर्रहरताओं एवं निरबंधनों को स्पष्ट किया उन्होंने निर्वाचन सुधार के संबंध में विस्तार से वर्तमान एवं संभावित नई निर्वाचन विधि के संबंध में बताया। एकल संक्रमणीय पद्धति पर प्रत्यक्ष प्रतिनिधि वोटिंग के गुण तथा अवगुणों की चर्चा की और एक मजबूत तथा वास्तविक लोकतंत्र की बुनियाद में युवा मतदाताओं की सक्रिय भूमिका को सुशासन के लिए जरूरी बताया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र के एक सुदृढरण लोकतंत्र एवं भीड़तंत्र के विचारों को उपस्थित सभी लोगों के बीच साझा किया। वोटिंग के महत्व, जानने के अधिकार , राइट टू रिकाल के अधिकार से संबंधित तथ्य एवं नोटा(NOTA ) से संबंधित जानकारी को अपने व्याख्यान में स्पष्ट किया। वास्तविक लोकतंत्र के लिए एकल संक्रमणीय पद्धति को तथा वैकल्पिक प्रतिनिधि वोटिंग का सुझाव दिया। यह सुझाव भी दिया कि मतदाताओं की योग्यता के आधार पर उनके वोट का मूल निर्धारित किया जाए तभी वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना भारत में सही तरीके से संभव है।
उन्होंने अपने वोट को वापस लेने के अधिकार को आवश्यक बताया तथा इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन एवं वैलेट पेपर द्वारा मतदाता के फायदे एवं नुकसान तथा इस संबंध में दूसरे देशों की विधि की भी चर्चा की तथा मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से वोटिंग करने का सुझाव भी रखा मतदाता की जागरूकता को आवश्यक बताया जितना जागरुक मतदाता होगा एक लोकतांत्रिक सुशासन उतना ही कुशल एवं सुदृढ़ होगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा.शहनाज अख्तर ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस की उपयोगिता एवं महत्व पर चर्चा की ।इस अवसर पर डा.लक्षयलता प्रजापति , नईमुददीन, डा लक्ष्मी देवी, अनुष्का , निधि शंकर,नेहा दिवाकर , प्रियदर्शनी रावत ,प्रवीन चौहान, एल- एल. एम. की छात्रा-छात्राएं, शोध छात्र एवं कर्मचारी गण उपस्थित थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान गायन द्वारा किया गया।

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 22/01/2024

*विधि एवं न्याय के परिप्रेक्ष्य में राम राज्य की परिकल्पना*
*डॉ अमित सिंह*

भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहा जाता हैं क्योंकि उनका व्यक्तित्व मर्यादा, करुणा ,सत्य ,धर्म व सदाचार से ओत-प्रोत है । श्रीराम जैसा आर्दश व्यक्तित्व आज के वर्तमान युग में मिलना अत्यंत दुर्लभ है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जैसे पति की कामना प्रत्येक महिला करती है, राम जैसे पुत्र की कामना प्रत्येक माता-पिता करते हैं एवं श्री राम जैसे राजा की कामना प्रत्येक नागरिक और प्रजा करती है।
मर्यादा का अर्थ संस्कृत में न्याय एवं धर्म की सीमा है। पुरुषोत्तम श्री राम का चरित्र भी मर्यादित है। इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कहा जाता है। श्रीराम ने सीता जी को वचन दिया था कि मैं आपके अलावा किसी और का चिंतन नहीं करूंगा और इस वचन को उन्होंने निभाया वह आजीवन सीता माता के साथ एक ही विवाह(monogamy ) में बंधे रहे, जबकि उस समय बहु विवाह का प्रचलन था। उस समय उनके पिता दशरथ की तीन पत्नियां थी लेकिन उन्होंने एक विवाह का आदर्श रखा जो हिंदू वैवाहिक विधि से बिल्कुल मेल खाता है। अतः हमारी हिंदू वैवाहिक विधि का स्रोत रामराज्य से प्रेरणा लेता है। उन्होंने सूपर्णखा के विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए कहा था
*कृतदारोस्म भवति भायेयं*
*दयिता मम।*
*त्वद्भिधानां तु नारीणां सुदुःखा ससपतनता*।।
देवी मेरा विवाह हो चुका है मेरी पत्नी विद्यमान है और मैं पत्नी धर्म से बंधा हुआ हूं।

श्री राम ने अपने पिता को दिए गए वचनों (Promise)का पालन किया। वनवास के दौरान ही उनके पिता राजा दशरथ का देहांत हो चुका था। दिए गए वचन का पालन ही विधि एवं न्याय का आधार है।इसे विधि में विवंधन ( estoppel) का सिद्धांत कहते हैं।

वाल्मीकि रामायण एवं रामचरितमानस में भगवान श्री राम का मर्यादित चित्रण का वर्णन है।
विधि और न्याय के अनुसार मानवाधिकारों का संरक्षण,प्रजा में अंतिम व्यक्ति तक को न्याय एवं सर्वांगीण विकास की उनकी संकल्पना उनको मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम बनती है।

*राम राज्य की संकल्पना*

राम राज्य का अर्थ है राजा अथवा शासक द्वारा राज्य में विधि एवं न्याय के अनुसार सुशासन व्यवस्था ( Good Governance )होना है। रामराज्य कुशल राजव्यवस्था,शासन के संचालन के लिए आवश्यक है। प्रजा के हित में विकसित,प्रगतिशील, सम्पन्न एवं सकारात्मक सुदृण राज्य की स्थापना करना है, जो भारतीय संविधान ,अंतर्राष्ट्रीय विधियों एवं संधियों में राज्य की परिकल्पना ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के रामराज्य शासन का प्रतिबिंब है।

*दैहिक दैविक भौतिक तापा।*
*राम राज नहिं काहुहि ब्यापा*
*सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती*

भावार्थ:- 'रामराज्य' में किसी को दैहिक, दैविक और भौतिक तकलीफ नहीं थी। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते थे और वेदों में बताई हुई नीति (मर्यादा) में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं।

यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय संस्कृति, नैतिकता, भारतीय विधि व राजनीतिक मूल्यों के आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन दर्शन के अनुरूप हैं। श्री राम द्वारा अपने वचनों का पालन हमें हमारे जीवन में वचनों को निभाने की प्रेरणा देते हैं। वचनों के पालन से संबंधित भारतीय संविदा विधि हमारे सामने है।

*युद्ध विधि और श्री राम:*

लंका के साथ युद्ध में शामिल होने से पहले, राम ने सीता की शांतिपूर्ण वापसी सुनिश्चित करने और युद्ध से बचने के प्रयास में अंगद को दूत के रूप में रावण के दरबार में भेजा था। रावण ने इस अवसर का उपयोग अंगद को मारने के लिए योजना बनाई। हालाँकि, उनके भाई विभीषण ने उन्हें याद दिलाया कि *एक राजदूत या दूत को मारना राजधर्म या राजा के कर्तव्य के विरुद्ध है। यह सिद्धांत राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन, 1961 के अनुच्छेद 29 में प्रतिबिंबित होता है।* यह राजनयिक प्रतिरक्षा और विशेषाधिकारों को नियंत्रित करता है। किसी राजनयिक एजेंट को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया जा सकता है। उन्हें राज्य के अतिथि के रूप में माना जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जाने चाहिए कि उन्हें किसी भी तरह से नुकसान न हो।

विधि का शासन एवं अंतर्राष्ट्रीय विधि के नियम चाहे वह युद्ध नीति से संबंधित हो या राज्यों के पारस्परिक व्यवहार से संबंधित हो। श्री राम का चरित्र एवं जीवन दर्शन हमारे सामने ही इन्हें सर्वांगीण रूप से व्यवहार में अमल में लाने की सीख देता है। *पैक्टा सैंट सर्वेंडा* संधि सदैव पालनीय है क्योंकि संधि का पालन सदैव विबंध में बांधता है। यह आदर्श वाक्य
*"रघुकुल रीति सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाए"*
में प्रतिबिंबित होता है।
जिस समय राजा दशरथ ने प्रभु श्री राम को 14 वर्षों का वनवास दिया उस समय राम ने उनकी आज्ञा को इस प्रकार माना जैसे ऑस्टिन के सिद्धांत में संप्रभु की आज्ञा को सर्वोपरि माना गया है ऑस्टिन सिद्धांत में राजा की आज्ञा को भगवान की आज्ञा के समान माना गया है विधि शास्त्र रामराज्य शासन व्यवस्था पर आधारित है। एक राजा को ग्रंथों में भगवान कहा गया है क्योंकि राज्य के निवासियों का सुख-दुख राजा के हाथों में होता है।
एक राजा के अंदर दया, करुणा ,क्षमा, उदारता आदि मानवीय गुण का होना आवश्यक है। एक राजा में प्राथमिक गुण न्यायप्रिय होना चाहिए और न्याय पक्षपात रहित(Rule against Bias)होना चाहिए। यह प्रशासनिक विधि का प्रारंभिक सिद्धांत है। आदर्श राजा का उदाहरण आदर्श युद्ध नीति एवं कुशल योद्धा के रूप में भगवान श्री राम न सिर्फ कुशल योद्धा थे बल्कि सभी को साथ लेकर चलने वाले थे। उन्होंने अपने युद्ध कौशल के कारण पत्थरों से रामसेतु का निर्माण किया एवं रावण से अंतिम क्षणों में भी वार्तालाप की। यह लक्षण मध्यस्थता एवं सुलह विधि की बात करता है। उन्होंने युद्ध की स्थिति में शत्रु राज्य से शरणथियो को शरण देकर रक्षा का आश्वासन दिया। जब विभीषण भगवान श्री राम से मिलने आए तब सुग्रीव ने कहा कि वह दुश्मन के भाई हैं लेकिन श्री राम ने उन्हें समझाते हुए कहा कि उनको अपने देश से निस्काषित किया गया है और वह उनसे शरण (asylum )मांगने आए प्रत्येक व्यक्ति को शरण देना और उसकी रक्षा करना उनका स्वभाव व धर्म है। जो प्राकृतिक न्याय सिद्धांत पर आधारित है।
युद्ध में वध करने के पश्चात मृत व्यक्ति का ससम्मान अंतिम संस्कार करना भगवान श्री राम ने सुनिश्चित किया। युद्ध को विधिक नियंत्रण के संबंध में उन्होंने कहा था कि युद्ध नीति को नियमानुसार होना चाहिए जैसे युद्ध को दिन में होना चाहिए रात में लड़ने वाले युद्ध आसुरी युद्ध होता है और युद्ध में ऐसे अस्त्रों शस्त्रों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए जो जनसंहार करने वाले हो और पर्यावरण के लिए घातक हो। संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर अध्याय 7 अनुच्छेद 51 में वैध युद्ध के नियमों का वर्णन किया गया है। पेरिस घोषणा व जिनेवा अभिसमय में इन नियमों को देखा जा सकता है। घातक व आणविक शास्त्रों के प्रयोग को गलत बताया। इस नियम के उल्लंघन का प्रभाव हिरोशिमा व नागासाकी पर परमाणु बम के दुष्प्रभाव को देखा जा सकता है।
युद्ध बंदियों की स्थिति का समाधान ,युद्ध के प्रभाव से लोगों का संरक्षण, शत्रु के साथ उचित व्यवहार, युद्ध के समय घायल एवं मृत्यु लोगों के साथ सम्यक व्यवहार, अधिग्रहीत राज्य के साथसमुचित व्यवहार आदि श्री राम का जीवन को एक आदर्श बनाते है। रावण से युद्ध के विषय में वाद एवं श्री राम द्वारा जीता गया राज्य उचित उत्तराधिकारियों विभिषण को सौंपा गया, जिससे वहां प्रजा का उचित संरक्षण हो सके। वह जीते हुए राज्य पर अपना नियंत्रण स्थापित कर सकते थे तथा उसे अपने भाइयों में से किसी एक को दे सकते थे लेकिन श्री राम द्वारा ऐसा नहीं किया गया उन्होंने जनता के कल्याण(welfare )को देखते ऐसा किया यह लोकतंत्र के आधुनिक स्वरूप को दर्शाता है।

श्री राम का व्यक्तित्व राष्ट्रवाद (Nationalism ) का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने अपने देश/ मातृभूमि को स्वर्ग से भी ज्यादा बढ़कर माना है।

*अपि स्वर्णमयी लङ्का न मे लक्ष्मण रोचते ।*
*जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ॥*
अनुवाद : " लक्ष्मण! यद्यपि यह लंका सोने की बनी है, फिर भी इसमें मेरी कोई रुचि नहीं है। (क्योंकि) जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान हैं।

रामायण एक आदर्श महाकाव्य है जो हमेशा विधि और न्याय व्यवस्था के लिए एक आदर्श है चाहे वह समानता का अधिकार हो या प्राण व दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार व नीति निर्देशक तत्व,इन को समझने के लिए हमें श्री राम ,सीता ,लक्ष्मण आदि का चरित्र समझना होगा। रामराज्य में हमेशा स्त्रियों के सम्मान की बात कही गई एवं स्त्रियों को पुरुषों से पहले संरक्षित किया एवं सम्मान दिया। वेदों व दूसरे ग्रंथों में पहले सीता का नाम लिया जाता है और *जयसियाराम* कहा जाता है। अतः यह कहा जा सकता है कि भगवान श्री राम के सहनशील व धैर्यवान, दयालु ,पुत्र, मित्र ,प्रबंधक व आदर्श भाई जैसे गुण किसी व्यक्ति ने अपना लिए तो जीवन में फिर किसी संकट से वह भयभीत नहीं होगा।

*डॉ अमित सिंह*
संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष विधि
रोहिलखंड विश्वविद्यालय बरेली

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 17/10/2023



Honorable Chief Minister Yogi Adityanath wished to Mahatma Joyti Ba Phule Rohilkhand University, Bareilly, Uttar Pradesh on the occasion of getting NAAC A++
Myself with University teachers and Vice Chancellor Professor K.P.Singh at Chief minister Office 05,Kalidas Marg , Lucknow Uttar Pradesh India on 10/09/2023 ,1700IST..

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 18/09/2023

My Tenth Research scholar has Submitted their Ph.D. today under my supervision...

Years of hard work and endurance have finally resulted in this prestigious achievement . Congratulations *Smt.Annu Sharma* on Submitting Ph.D. thesis and shining brightly. Your efforts appear to have paid off.Once again my heartfelt congratulations on completing your research..

# Smt.Annu Sharma
# Mr. Shantanu Mishra
family members

Congratulations....

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Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 13/09/2020

सत्र 2019-20 की परीक्षा पूर्ण हो गयी। viva -voce परीक्षा 20/08/20 को पूर्ण हो चुकी थी। कोविड -19 के दौरान भी विद्यार्थियों ने अपना पूरा जोश दिखाया।

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 11/04/2020

महान शिक्षाविद, समाज सुधारक रोहिलखण्ड विश्विद्यालय,बरेली जिनके नाम पर स्थापित है ऐसे महात्मा ज्योतिबा फुले की जन्मशती पर हार्दिक शुभकामनाएं...
#11 अप्रैल 1827

08/04/2020

जनपद बरेली में हॉट स्पॉट स्थान सुभाषनगर, बरेली ही सील रहेगा।बाकि अन्य सभी स्थान सुचारू रूप से लॉकडाउन नियमों के अनुरूप कार्य करते रहेगें।अनावश्यक रूप से राशन की दुकानों, मेडिकल व अन्य जगहों पर भीड़ एकत्रित न करें एवं न ही सामान क्रय करने के लिए अफरा-तफरी का मौहाल बनाएं ।
घर में रहे, सुरक्षित रहे...

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 04/04/2020

विधि विभाग के सभी विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों,पुरातन छात्रों(एलुमिनी) से अपील है कि वह प्रधानमंत्री जी के दिनाँक 05/04/2020 आह्वान के अनुसरण में अपने घरों की छत/बाल्कनी पर परिवार सहित, सोशल डिस्टनसिंग का पालन करते हुए रात्रि 9 बजे, दीया,मोमबत्ती,मोबाइल फोन फ़्लैश जलाकर कोरोना के विरूद्ध लड़ाई में अपनी सहभागिता, सहयोग प्रदर्शित करे।
डॉ अमित सिंह
विभागाध्यक्ष, विधि
रोहिलखण्ड विश्विद्यालय..

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 02/04/2020

14 अप्रैल तक घर पर रहे। स्वच्छता का पालन करे। साबुन, सैनिटाइजर से हाथ धोते रहे। सोशल डिस्टनसिंग का पालन करें। अफवाहों पर ना ध्यान दे। सरकार के साथ सहयोग करें। हम मिलकर कोरोना के विरुद्ध लड़ाई को जीतेगे।
जय हिंद,जय भारत..

Photos from Law Deptt. MJP Rohilkhand University Bareilly's post 28/10/2019

Special invite lecture on Constitutional Law by Respected Prof.(Dr.)Preeti Saxena madam...

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