18/09/2025
, महात्मा गांधी 1915 में हरिद्वार के कुम्भ मेला गए थे।
वे दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद पहली बार कुम्भ में शामिल हुए। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऋषिकेश स्थित गुरुकुल कांगड़ी (जिसे गुरुकुल हरिद्वार भी कहा जाता है) में स्वामी श्रद्धानंद (जिन्हें महात्मा मुंशीराम भी कहा जाता था) से मिलना था।
गांधीजी सख्त शाकाहारी थे और सात्विक भोजन पर जोर देते थे। वे मानते थे कि सादा, ताजा और कम मसालेदार भोजन स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम है।
उन्होंने मांस, मछली, अंडे और अन्य तामसिक भोजन का त्याग किया।
वे फल, सब्जियां, अनाज, दूध और मेवे जैसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देते थे।
कुछ समय तक उन्होंने केवल फल और दूध पर आधारित आहार (फ्रूटेरियन डाइट) का भी प्रयोग किया।