24/08/2018
शहरी प्राइवेट स्कूलो के 10 में से 9 बच्चे अपनी अंग्रेजी की किताब को पढ़कर उसका मतलब नहीं समझ सकते।
तो क्यों ऐसे स्कूल अभिभावकों से लाखों रूपये लेते है। और क्या अभिभावक अपनी रोज मर्राकी जिंदगी में इतने व्यस्त हे की उन्हें ये भी नहीं पता की उनके बच्चे को क्या आता है और क्या नहीं।
आज कम से कम कुछ मिनट अपने बच्चे के लिए निकाले और उनसे उनके ही कोर्स की कोई भी अंग्रेजी की किताब को पढ़कर केवल उसकी हिंदी समझाने के लिए कहिये।
आपको वास्तविकता पता चल जायेगी- स्कूलो की, अपने बच्चो की और अपनी भी।
केवल अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में बच्चो को पढ़ाने से उनका भविष्य नहीं बनता।
बनता है तो उन पर धयान देने से। उनके लिए समय निकलने से।
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A report by a non-profit organisation titled 'Where India Reads' highlights the reading ability of over 19,000 students across 20 Indian states, in private unaided English medium schools.