19/05/2026
#त्रिपुण्ड्र_धारण_विधि_विमर्श
त्रिपुण्ड्र धारण विधि विमर्श १. त्रिपुण्ड्रधारण की उपनिषद्विहित विधि कालाग्निरुद्रोपनिषद् में त्रिपुण्ड्रधारण की मूल विधि कही गई है। आग्नेय भस्म को सद्योजातादि पञ्चब्रह्ममन्त्रों से ग्रहण करके, “अग्निरिति” मन्त्र से अभिमन्त्रित करे, “मानस्तोके” मन्त्र से उसे मस्तकादि में स्पर्श करे, जल से संसिक्त करे और शिर, ललाट, वक्षः तथा स्कन्धों में त्र्यायुष तथा त्र्यम्बक मन्त्रों से .......
इस लिंक में वर्णित आलेख के सभी बिन्दु क्रमशः इस प्रकार हैं:
1. त्रिपुण्ड्रधारण की उपनिषद्विहित विधि
2. त्रिपुण्ड्रधारण का माहात्म्य
3. भस्म की सर्वात्मकता और पाशुपतव्रत
4. त्रिपुण्ड्र की वेदमयी व्याख्या
5. भूति-शब्द का भस्मार्थ और त्रिपुण्ड्रधारण
6. मानवपुराण में भूति और त्रिपुण्ड्र का उपबृंहण
7. विभूति-सम्पादन और अभिमन्त्रणविधि
8. त्रिपुण्ड्रधारण के स्थान
9. भारद्वाजोक्त भस्मस्नान और त्रिपुण्ड्रविधान
10. श्राद्ध, यज्ञ, जप, होम आदि में त्रिपुण्ड्र
11. लोकाक्षि और शातातप के अनुसार त्रिपुण्ड्रमाहात्म्य
12. त्रिपुण्ड्रधारण से शुद्धि और भस्मनामनिर्णय
13. वसिष्ठलैङ्गे भस्म का ब्रह्मस्वरूप और भेद
14. भस्मोद्धूलन और आश्रमानुसार त्रिपुण्ड्रधारण
15. बोधायनोक्त ब्रह्मचारिणां त्रिपुण्ड्रधारण
16. गरुडपुराण और पाराशर में त्रिपुण्ड्रधारण
17. मानवोपपुराण और कूर्मपुराण में त्रिपुण्ड्रमाहात्म्य
18. लैङ्ग, ब्रह्मकैवर्त और शङ्करसंहिता में त्रिपुण्ड्र
19. सौरसंहिता और मानवीयसंहिता में त्रिपुण्ड्र
20. पुरुषार्थप्रबोध में विभूतिधारणविधि
21. शूद्रहस्तस्थित भस्म और श्रौत-त्रिपुण्ड्रनिर्णय
22. त्रिपुण्ड्रविरोधी वचनों का तात्पर्य
23. त्रिपुण्ड्रनिषेधवचनों की मीमांसा
24. तिर्यक्पुण्ड्र की महिमा
25. वैदिक और तान्त्रिक त्रिपुण्ड्र का भेद
26. पाशुपतादि मतों का स्पर्शनिषेध
27. वेदविरुद्ध शास्त्रों की निन्दा
28. द्विजबन्धुओं का तन्त्राधिकार
29. दीपभस्म और वैदिक भस्म का भेद
30. ऊर्ध्वपुण्ड्र और त्रिपुण्ड्र — विकल्पनिर्णय
31. भस्म और मृत्तिका के धारण का नियमन
32. चन्दन और भस्म का परस्पर विधान
33. कुलाचारानुसार ऊर्ध्वपुण्ड्र-त्रिपुण्ड्रधारण
34. श्राद्धकर्म में ऊर्ध्वपुण्ड्र का विधान
35. श्राद्ध में ऊर्ध्वपुण्ड्र की अनिवार्यता
36. श्राद्ध में त्रिपुण्ड्रधारण की प्रशंसा
37. श्राद्ध में तिर्यक्पुण्ड्र और अन्य चिह्नों का निषेध
38. श्राद्धकाल में पुण्ड्रधारण का विकल्प
39. देवतानिन्दा और पुराणवचनों का समन्वय
40. एकेश्वरवाद और देवतान्तरनिन्दा का परिहार
41. शिव-विष्णु-अभेद का पुराणसम्मत प्रतिपादन
42. कलियुग में देवतानिन्दा का कारण
ये सभी शीर्षक मूल आलेख में क्रम संख्या के साथ दिए गए हैं।
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