Rsys inter college barabanki

Rsys inter college barabanki Tell people more about your page laughing, giggling.. playing & so many more interesting games. Our schools gave us a lot. And how can we ever forget?

I love my school,and so do you.

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Standing for assemblies in d chilling winter mornings. tiffin periods..finishing friends' tiffin & leaving their boxes empty.climbing d slippers & hanging like monkeys, doing homeworks(and not doing homeworks :p)
getting new text books, notebooks, note copies, pencils, pen, rubber, sharpener, school bags in every new

class. We spent very important segments of our lifetime there. It's because of the schools we got & opportunity to have those amazingly loving and respected teachers to teach us. Schools helped us meet those innocently mischievous friends who made those moments so special. Life seemed great when they're with us.

05/09/2017

शिक्षक दिवस पर समर्पित....

❗ऋण है मुझ पर❗

ज्ञान पुंज संचार का ऋण है
अर्थपूर्ण आकार का ऋण है
ऋण है मुझपर सत्यबोध का
कलम के दिव्य उपहार का ऋण है।

स्वर-व्यंजन ,वर्ण ज्ञान का ऋण है
शब्दों से पहचान का ऋण है
जोड़ घटाना गुणा भाग का
अंकगणित विज्ञान का ऋण है।

देवग्रंथ अध्यात्म का ऋण है
ऋषियों के सद्ज्ञान का ऋण है
ऋण है मुझपर नैतिकता का
राष्ट्रप्रेम और गान का ऋण है।

सत्य-परख और धैर्य का ऋण है
इस जग के उत्थान का ऋण है
ऋण है मुझपर स्वाभिमान का
ज्ञान के प्रति सम्मान का ऋण है।

जिसने जग का ज्ञान कराया
नभ-धरा-सूर्य स्पर्श कराया
ऋण है ऐसी अनुभूति का
अलौकिक उपहार का ऋण है।

कठिन है कोरा कागज़ पढ़ना
चाक चलाकर मानव गढ़ना
नमन है ऐसे शिल्पकार को
उस दिव्य कला श्रृंगार का ऋण है।

कोई बीज से पौध उगाता
पुष्प-बीज फिर बाग सजाता
जैसे दीपक दीप की पंक्ति जलाता
वैसे ज्ञान भी कंठ बदल कर आता
इस कंठ से उपजे ज्ञान का ऋण है
मेरे इस सम्मान का ऋण है।

नमन आपको नमन है गुरूवर
इस नमन शब्द के बोध का ऋण है
ज्ञान पुंज संचार का ऋण है
अर्थपूर्ण आकार का ऋण है॥

शिक्षक दिवस की सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं

05/07/2017

*किस्सा रफ़ काॅपी का*📓
_________________________

हर सब्जेक्ट की काॅपी अलग अलग बनती थी,
परंतु एक काॅपी ऐसी थी जो हर सब्जेक्ट को सम्भालती थी।
उसे हम *_रफ़ काॅपी_* कहते थे।

यूं तो _*रफ़ काॅपी*_ का मतलब खुरदुरा होता है।

परंतु वो _*रफ़ काॅपी*_ हमारे लिए बहुत कोमल होती थी।

कोमल इस सन्दर्भ में कि उसके पहले पेज पर हमें कोई इंडेक्स नहीं बनाना होता था, न ही शपथ लेनी होती थी कि, इस काॅपी का एक भी पेज नहीं फाडे़ंगे या इसे साफ रखेंगे।

उस काॅपी पर हमारे किसी न किसी पसंदीदा व्यक्तित्व का चित्र होता था।

उस काॅपी के पहले पन्ने पर सिर्फ हमारा नाम होता था और आखिरी पन्नों पर अजीब सी कला कृतियां, राजा मंत्री चोर सिपाही या फिर पर्ची वाले क्रिकेट का स्कोर कार्ड।

उस *_रफ़ काॅपी_* में बहुत सी यादें होती थी।

जैसे अनकहा प्रेम,
अनजाना सा गुस्सा,
कुछ उदासी,
कुछ दर्द,

हमारी _*रफ काॅपी*_में ये सब कोड वर्ड में लिखा होता था
जिसे कोई आई एस आई
या
सी आई ए डिकोड नहीं कर सकती थी।

उस पर अंकित कुछ शब्द, कुछ नाम कुछ चीजें ऐसी थीं, जिन्हें मिटाया जाना हमारे लिए असंभव था।

हमारे बैग में कुछ हो या न हो वो रफ़ काॅपी जरूर होती थी। आप हमारे बैग से कुछ भी ले सकते थे पर वो _*रफ़ काॅपी*_ नहीं।

हर पेज पर हमने बहुत कुछ ऐसा लिखा होता था जिसे हम किसी को नहीं पढ़ा सकते थे।

कभी कभी ये भी होता था कि उन पन्नों से हमने वो चीज फाड़ कर दांतों तले चबा कर थूक दिया था क्योंकि हमें वो चीज पसंद न आई होगी।

समय इतना बीत गया कि, अब काॅपी ही नहीं रखते हैं।

रफ़ काॅपी जीवन से बहुत दूर चली गई है,

हालांकि अब बैग भी नहीं रखते हैं कि _*रफ़ काॅपी*_ रखी जाए।

वो खुरदुरे पन्नों वाली *_रफ़ काॅपी_* अब मिलती ही नहीं।

हिसाब भी नहीं हुआ है बहुत दिनों से, न ही प्रेम का न ही गुस्से का, यादों की गुणा भाग का समय नहीं बचता।

अगर कभी वो _*रफ़ काॅपी*_ मिलेगी उसे लेकर बैठेंगे,

फिर से पुरानी चीजों को खगांलेगें,

हिसाब करेंगे और
आखिरी के पन्नों पर राजा, मंत्री, चोर, सिपाही खेलेंगे।

वो 'नटराज' की पेन्सिल, वो 'चेलपार्क' की स्याही, वो महंगा 'पायलेट' का पेन और जैल पेन की लिखाई।

वो सारी ड्राइंग, वो पहाड़, वो नदियां, वो झरने, वो फूल, लिखते लिखते ना जाने कब ख़त्म हुआ स्कूल।

अब तो बस साइन करने के लिए उठती है कलम, पर आज न जाने क्यों वो नोटबुक का वो आखिरी पन्ना याद आ गया जैसे उस काट - पीट में छिपा कोई राज ही टकरा गया।

जीवन में शायद कहीं कुछ कम सा हो गया। पलके भीगी सी है, कुछ नम सा हो गया। आज फिर वक्त शायद कुछ थम सा गया।

क्या आपको याद है आपकी वो *_रफ़ काॅपी_*📙

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