03/01/2016
कौन थे शेख बाक़िर अन्निम्र?सऊदी अरब के प्रसिद्ध धर्मगुरु और संघर्षकर्ता शेख बाक़िर अन्निम्र जिन्हें फांस दिये जाने का सऊदी अरब ने एलान किया है, सऊदी अरब की एक जानी-मानी हस्ती थे।शेख बाक़िर अन्निम्र वर्ष 1968 ईसवी में पूर्वी सऊदी अरब के अलक़तीफ़ प्रान्त के अलअवामिया शहर में जन्मे थे। बड़े होने पर आरंभिक शिक्षा उन्होंने अलअवामिया शहर में हासिल की और सन 1989 में ईरान की क्रांति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए ईरान की यात्रा की और तेहरान के एक मदरसे में शिक्षा प्राप्त करना आरंभ कर दिया।शेख बाक़िर अन्निम्र ने दस वर्षों तक तेहरान के धार्मिक शिक्षा केन्द्र में शिक्षा प्राप्त करने के बाद सीरिया कीयात्रा की और वहां आगे की पढ़ाई जारी रखी।उन्होंने तेहरान और सीरिया में धार्मिक शिक्षा प्राप्ति के दौरान बड़े-बड़े धर्मगुरुओं से ज्ञान प्राप्त किया।उन्होंने सऊदी अरब वापसी के बाद हज़रत क़ायम मदरसे की स्थापना की और वर्ष 2011 में इस्लामी केन्द्र की स्थापना की।शेख बाक़िर अन्निम्र को पहली बार वर्ष 2006 में सऊदी सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया। उन्हें बहरैन में कुरआन सम्मेलन में भाग लेने के बाद वापसी के समय सऊदी अरब में हिरासत में लिया गया था।उन पर आरोप था कि इस सम्मेलन में उन्होंने, बक़ीअ क़ब्रिस्तान के पुनर्निमाण और सऊदी अरब में शिया समुदाय को औपचारिकता दिये जाने की मांग की थी।अगस्त 2008 में शेख बाक़िर अन्निम्र को दोबारा गिरफ्तार किया गया। इस बार उन पर आरोप था कि उन्होंने सऊदी अरब के शिया समुदाय को सरकार के खिलाफ भड़काने की कोशिश की है किंतु शिया मुसलमानों में बढ़ती नाराज़गी के कारण उन्हें 24 घंटों बाद रिहा कर दिया गया किंतु मार्च 2009 में उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया।वास्तव में शेख बाक़िर अन्निम्र हमेशा अपने भाषणों में सऊदी सरकार की विशेषकर पूर्वी प्रान्तों में भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण आलोचना करते थे। वह सदैव कहा करते थे कि सच्ची बात कहने में उन्हें डर नहीं लगता भले की उन्हें जेल में डाला जाए या मौत की सज़ा दी जाए।वह कहते थे कि सऊदी मीडिया, मुफ्ती और धर्मगुरु सरकार के हाथों बिके हुए हैं और यह सब मिल कर, सऊदी अरब में शिया- सुन्नी मतभेद उत्पन्न करके राजशाही को जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं।बार बार गिरफ्तार किये जाने औरयातनाएं दिये जाने के बावजूद शेख बाक़िर अन्निम्र ने हमेशा सऊदी शासकों के क्रिया कलापों की आलोचना की और कहते थे कि अंतिम सांस तक वह सऊदी अरब के नागरिकों के अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे।