28/09/2020
"इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से, अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिखा जाता है।”
शहीद सरदार भगत सिंह की 113 वीं जन्म जयंती
के अवसर पर उनकी स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन, इन्कलाब जिन्दाबाद ! 💐🙏🏻२८ सितम्बर अमर शहीद सरदार भगत सिंह का
जन्म. २८ सितम्बर १९०७को हुआ था।
जेल से लिखा हुआ भगत सिंह का पत्र।
सुनो ए मेरे भारत के युवकों
" युवावस्था में तो शस्यश्यामलावसुन्धरा भी तो सुन्दर है।पर इसके अन्दर भूकम्प की सी क्ष्मता भरी हुयी है।इसी लिए युवावस्था में मनुष्य के लिए केवल दो ही मार्ग है।पहला वह चढ़ सकता है उन्ति के शिखर पर। दूसरा वह गिर सकता है अधः पतन की अंधेरी खंदक मे।चाहे तो त्यागी हो सकता है,चाहे तो विलासी हो सकता है।वह देवता बन सकता है तो पिशाच भी बन सकता है।वह संसार को त्रस्त कर सकता है तो अभय दान भी दे सकता है।संसार में युवक का ही साम्राज्य है।युवक के कीर्तिमान से संसार का इतिहास भरा है।युवक ही रण चणडी की ललाट रेखा है।युवक स्वदेश की यश दुन्दुभि का यम निनाद है।युवक ही स्वदेश के विजय वैजन्ती की सुदृढ़ कड़ी है।वह महासागर की उत्ताल लहरों के समान उद्दण्ड है।वह महाभारत के भीष्म पर्व की पहली ललकार के समान वकराल है।प्रथम मिलन के स्मित चुम्बन की तरह सरस है।रावण के अहंकार की तरह निर्भीक है।प्रहलाद के सदाग्रह के तरह अटल है।
आप सबका भगत सिंह
आज अमर शहीद की जयन्ती पर राष्ट्र भाव भीनी श्रद्धाञ्जलि। जय स्वदेश जय राष्ट्र वाद