RM Physics Classes

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10/12/2024

The documentary based on Indian rapper Yo Yo Honey Singh, ‘Yo Yo Honey Singh: Famous’ has set its streaming date. It is set to drop on OTT on December 20.

It is directed by Mozez Singh of ‘Human’ fame, and offers an exclusive look into the life of the hip-hop artiste and rapper.

Know More: https://tinyurl.com/muza6dyk

07/04/2023

#दर्पण_का_निर्माण
जैसा कि आप जानते होंगे, दर्पणों का निर्माण सिल्वर कोटिंग प्रक्रिया का उपयोग करके किया जाता है। आधार सामग्री के रूप में चुने गए कांच पर चांदी का लेप किया जाता है। लगभग 99.95% की बहुत उच्च शुद्धता वाले सिल्वर नाइट्रेट को कम करके सिल्वर कोटिंग की जाती है ।
सिल्वर नाइट्रेट या उपयोग किए गए अन्य उत्पादों की शुद्धता में किसी भी कमी के परिणामस्वरूप दर्पण पर काले धब्बे पड़ जाते हैं। नीचे बताए गए सभी विलयनों को बनाने में केवल आसुत जल का ही उपयोग किया जाता है। सबसे सरल प्रक्रिया मैनुअल प्रक्रिया है। कांच के पैनल पर चांदी की परत चढ़ाने की प्रक्रिया इस प्रकार है।
1~ 50% सांद्रण का स्टैनस क्लोराइड (टिन क्लोराइड) का संवेदीकरण कोट तैयार किया जाता है।
2~ क्रिस्टलीय सिल्वर नाइट्रेट (न्यूनतम 99.95% शुद्धता) के साथ, 4% सांद्रता का घोल तैयार किया जाता है।
3~ सिल्वर नाइट्रेट के उपरोक्त घोल में, 4% KOH (पानी में पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड) का घोल मिलाया जाता है और एक अलग कांच की बोतल में रखा जाता है।
4~ लगभग 1% केंद्रित नाइट्रिक एसिड के साथ मिश्रित चीनी का दस प्रतिशत समाधान कम करने वाले एजेंट के रूप में तैयार किया जाता है ।
कुछ मिनटों के बाद सिल्वर नाइट्रेट सिल्वर मेटल के रूप में अपचयित हो जाता है। चांदी के जमाव की शुरुआत के साथ कोटेड ग्लास ट्रे में तब तक रखा जाता है जब तक कि सतह सूख न जाए और उसमें पानी न हो।

शीशा तैयार है लेकिन चांदी की परत पतली है और आसानी से धूल उठा लेती है। कोटिंग भी बहुत आसानी से खरोंच के लिए उत्तरदायी है।

शीशों पर सुरक्षात्मक बैकअप कोट के लिए दो विकल्प हैं । चांदी के कोट पर कॉपर जैसे मजबूत धातु के कोट या एक संगत पेंट सिस्टम के बीच विकल्प है । पहले मिरर पर कॉपर बैकेड सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन वे महंगे हैं। मिरर बैकिंग पेंट में अच्छी ताकत होती है और यह स्क्रैच प्रूफ होता है । इसे या तो छिड़काव करके या पर्दे की कोटिंग प्रक्रिया द्वारा लगाया जा सकता है।

परमाणु बम का जनक - सनातनी भारतआधुनिक परमाणु बम का सफल परीक्षण 16 जुलाई 1945को New Mexico के एक दूर दराज स्थान में किया ग...
07/01/2022

परमाणु बम का जनक - सनातनी भारत
आधुनिक परमाणु बम का सफल परीक्षण 16 जुलाई 1945
को New Mexico के एक दूर दराज स्थान में किया गया था|
इस बम का निर्माण अमेरिका के... एक वैज्ञानिक Julius
Robert Oppenheimer [ http://en.wikipedia.org/
wiki/J._Robert_Oppenheimer ] के नेतृत्व में किया गया था
Oppenheimer को आधुनिक परमाणु बम के निर्माणकर्ता के रूप
में जाना जाता है, आपको ये जानकर आश्चर्य हो सकता है की इस
परमाणु परीक्षण का कोड नाम Oppenheimer ने त्रिदेव
(Trinity) रखा था,
परमाणु विखण्डन की श्रृंखला अभिक्रिया में २३५ भार
वला यूरेनियम परमाणु,बेरियम और क्रिप्टन तत्वों में विघटित
होता है। प्रति परमाणु ३ न्यूट्रान मुक्त होकर अन्य तीन परमाणुओं
का विखण्डन करते है। कुछ द्रव्यमान ऊर्जा में परिणित हो जाता है।
ऊर्जा = द्रव्यमान * (प्रकाश का वेग)२ {E=MC^2} के अनुसार
अपरिमित ऊर्जा अर्थात उष्मा व प्रकाश उत्पन्न होते है। यहाँ देखें
- [ http://www.facebook.com/photo.php?
fbid=374856539304046&set=a.338314332958267.1073741828.100003391094649&
type=1&theater ]
Oppenheimer ने महाभारत और गीता का काफी समय तक
अध्ययन किया था और हिन्दू धर्मं शास्त्रों से वे बेहद प्रभावित थे
१८९३ में जब स्वामी विवेकानन्द अमेरिका में थे, उन्होने वेद और
गीता के कतिपय श्लोकों का अंग्रेजी अनुवाद किया।
यद्यपि परमाणु बम विस्फोटट कमेटी के अध्यक्ष ओपेन हाइमर
का जन्म स्वामी जी की मृत्यु के बाद हुआ था किन्तु राबर्ट ने
श्लोकों का अध्ययन किया था। वे वेद और गीता से बहुत प्रभावित
हुए थे। वेदों के बारे में उनका कहना था कि पाश्चात्य संस्कृति में
वेदों की पंहुच इस सदी की विशेष कल्याणकारी घटना है।
उन्होने जिन तीन श्लोकों को महत्व दिया वे निम्र प्रकार है।
१. राबर्ट औपेन हाइमर का अनुमान था कि परमाणु बम विस्फोट से
अत्यधिक तीव्र प्रकाश और उच्च ऊष्मा होगी, जैसा कि भगवान
कृष्ण द्वारा अर्जुन को विराट स्वरुप के दर्शन देते समय उत्पन्न
हुआ होगा।
गीता के ग्यारहवें अध्याय के बारहवें श्लोक में लिखा है-
दिविसूर्य सहस्य भवेयुग पदुत्थिता यदि
मा सदृशीसा स्यादा सस्तस्य महात्मन: {११:१२ गीता}
अर्थात - आकाश में हजारों सूर्यों के एक साथ उदय होने से
जो प्रकाश उत्पन्न होगा वह भी वह विश्वरुप परमात्मा के प्रकाश
के सदृश्य शायद ही हो।
२. औपेन हाइमर के अनुसार इस बम विस्फोट से बहुत अधिक
लोगों की मृत्यु होगी, दुनिया में विनाश ही विनाश होगा।
उस समय उन्होंने गीता के गीता के ग्यारहवें अध्याय के ३२ वें
श्लोक में वर्णित बातों का सन्दर्भ दिया -
कालोस्स्मि लोकक्षयकृत्प्रवृध्दो लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत:।
ऋ तेह्यपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येह्यवस्थिता: प्रत्यनीकेषु
योधा:।। {११:३२ गीता}
अर्थात - मैं लोको का नाश करने वाला बढा हुआ महाकाल हूं। इस
समय इन लोकों को नष्ट करने के लिए प्रवृत्त हुआ हूं,अत:
जो प्रतिपक्षी सेना के योध्दा लोग हैं वे तेरे युध्द न करने पर
भी नहीं रहेंगे अर्थात इनका नाश हो जाएगा।
३. औपेन हाइमर के अनुसार बम विस्फोट से जहां कुछ लोग प्रसन्न
होंगे तो जिनका विनाश हुआ है वे दु:खी होंगे विलाप
करेंगे,जबकि अधिकांश तटस्थ रहेंगे। इस विनाश का जिम्मेदार खुद
को मानते हुए वे दुखी हुए, परन्तु उन्होंने गीता में वर्णित कर्म के
सिद्धांत का प्रतिपालन किया
उन्होंने गीता के सबसे प्रसिद्ध द्वितीय अध्याय के सैंतालिसवें
श्लोक का सन्दर्भ दिया।
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संङ्गोह्यस्त्वकर्माणि।। {२:४७ गीता}
अर्थात - तू कर्म कर फल की चिंता मत कर। तू कर्मो के फल हेतु
मत हो, तेरी अकर्म में (कर्म न करने में) आसक्ति नहीं होनी चाहिए!
उन्होंने अपनी डायरी में स्वयं की मनोस्तिथि लिखी , और इस
परीक्षण का कोड नेम इन्ही ३ श्लोको के आधार तथा भगवान
ब्रम्हा विष्णु महेश के नाम पर ट्रिनिटी रखा...
तत्कालीन अमेरिकी सरकार नहीं चाहती थी की कोई और
सभ्यता तथा संस्कृति आधुनिक परमाणु बम
की अवधारणा का का श्रेय ले जाए.... इसीलिए इस परीक्षण के
नामकरण की सच्चाई को उन्होंने Oppenheimer को छुपाने के
लिए कहा.... परन्तु जापान में परमाणु बम गिरने के बाद
Oppenheimer ने एक इंटरव्यू में ये बात स्वीकार की थी.......
विकिपीडिया भी दबी जुबान में ये बात बोलता है... [ http://
en.wikipedia.org/wiki/Trinity_
(nuclear_test) ]
इसके अतिरिक्त 1933 में उन्होंने अपने एक मित्र Arthur
William Ryder, जोकि University of California,
Berkeley में संस्कृत के प्रोफेसर थे, के साथ मिल कर भगवद
गीता का पूरा अध्यन किया और परमाणु बम बनाया 1945 में |
परमाणु बम जैसी किसी चीज़ के होने का पता भी इनको भगवद गीता,
रामायण तथा महाभारत से ही मिला, इसमें कोई संदेह नहीं |
Oppenheimer ने इस प्रयोग के बाद प्राप्त निष्कर्षों पर
अध्यन किया और कहा की विस्फोट के बाद उत्पन विकट
परिस्तियाँ तथा दुष्परिणाम जो हमें प्राप्त हुए है ठीक इस प्रकार
का वर्णन भगवद गीता तथा महाभारत आदि में मिलता है |
बाद में Oppenheimer के खुलासे के बाद भारी पैमाने पर महाभारत
और गीता आदि पर शोध किया गया उन्हें इस बात पर बेहद
आश्चर्य हुआ की इन ग्रंथो में "ब्रह्माश्त्र" नामक अस्त्र
का वर्णन मिलता है जो इतना संहारक था की उस के प्रयोग से कई
हजारो लोग व अन्य वस्तुएं न केवल जल गई अपितु पिघल भी गई|
ब्रह्माश्त्र के बारे में हमसे बेहतर कौन जान सकता है इसका वर्णन
प्रत्येक पुराण आदि में मिलता है... जगत पिता भगवान
ब्रह्मा द्वारा असुरो के नाश हेतु ब्रह्माश्त्र का निर्माण
किया गया था...
इस शोध पर लिखी गई कई किताबो में से एक है : [ The Atoms
of Kshatriyas http://www.amazon.com/The-
Atoms-Kshatriyas-Azs…/…/8182533309 ]
रामायण में भी मेघनाद से युद्ध हेतु श्रीलक्ष्मण ने जब ब्रह्माश्त्र
का प्रयोग करना चाहा तब श्रीराम ने उन्हें यह कह कर रोक
दिया की अभी इसका प्रयोग उचित नही अन्यथा पूरी लंका साफ़
हो जाएगी |
इसके अतिरिक्त प्राचीन भारत में परमाण्विक बमों के प्रयोग होने के
प्रमाणों की कोई कमी नही है । सिन्धु घाटी सभ्यता (मोहन जोदड़ो,
हड़प्पा आदि) में अनुसन्धान से ऐसी कई नगरियाँ प्राप्त हुई है
जो लगभग 5000 से 7000 ईसापूर्व तक अस्तित्व में थी| वहां ऐसे
कई नर कंकाल इस स्थिति में प्राप्त हुए है
मानो वो सभी किसी अकस्मात प्रहार में मारे गये हों... इनमें
रेडिएशन का असर भी था | वह कई ऐसे प्रमाण भी है जो यह सिद्ध
करते है की किसी समय यहाँ भयंकर ऊष्मा उत्पन्न हुई जो केवल
परमाण्विक बम या फिर उसी तरह के अस्त्र से ही उत्पन्न
हो सकती है
उत्तर पश्चिम भारत में थार मरुस्थल के एक स्थान में दस मील के
घेरे में तीन वर्गमील का एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ पर रेडियोएक्टिव्ह
राख की मोटी सतह पाई जाती है। वैज्ञानिकों ने उसके पास एक
प्राचीन नगर को खोद निकाला है जिसके समस्त भवन और लगभग
पाँच लाख निवासी आज से लगभग 8,000 से 12,000 साल पूर्व
किसी परमाणु विस्फोट के कारण नष्ट हो गए थे। एक शोधकर्ता के
आकलन के अनुसार प्राचीनकाल में उस नगर पर गिराया गया परमाणु
बम जापान में सन् 1945 में गिराए गए परमाणु बम की क्षमता से
ज्यादा का था।
मुंबई से उत्तर दिशा में लगभग 400 कि.मी. दूरी पर स्थित लगभग
2,154 मीटर की परिधि वाला एक अद्भुत विशाल गड्ढा (crater),
जिसकी आयु 50,000 से कम आँकी गई है, भी यही इंगित करती है
कि प्राचीन काल में भारत में परमाणु युद्ध हुआ था। शोध से ज्ञात
हुआ है कि यह गड्ढा crater) पृथ्वी पर किसी 600.000
वायुमंडल के दबाव वाले किसी विशाल के प्रहार के कारण बना है
किन्तु इस गड्ढे (Crater) तथा इसके आसपास के क्षेत्र में
उल्कापात से सम्बन्धित कुछ भी सामग्री नहीं पाई जाती। फिर यह
विलक्षण गड्ढा आखिर बना कैसे? सम्पूर्ण विश्व में यह अपने
प्रकार का एक अकेला गड्ढा (Crater) है।
महाभारत में सौप्तिक पर्व अध्याय १३ से १५ तक ब्रह्मास्त्र के
परिणाम दिये गए है|
महाभारत युद्ध का आरंभ 16 नवंबर 5561 ईसा पूर्व हुआ और 18
दिन चलाने के बाद 2 दिसम्बर 5561 ईसा पूर्व को समाप्त हुआ
उसी रात दुर्योधन ने अश्वथामा को सेनापति नियुक्त किया । 3
नवंबर 5561 ईसा पूर्व के दिन भीम ने अश्वथामा को पकड़ने
का प्रयत्न किया ।
{ तब अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र छोड़ा उस अस्त्र के कारण
जो अग्नि उत्पन्न हुई वह प्रलंकारी थी । वह अस्त्र प्रज्वलित
हुआ तब एक भयानक ज्वाला उत्पन्न हुई जो तेजोमंडल को घिर जाने
मे समर्थ थी ।
तदस्त्रं प्रजज्वाल महाज्वालं तेजोमंडल संवृतम ।। ८ ।। }
{ इसके बाद भयंकर वायु चलने लगी । सहस्त्रावधि उल्का आकाश
से गिरने लगे ।
आकाश में बड़ा शब्द (ध्वनि ) हुआ । पर्वत, अरण्य, वृक्षो के साथ
पृथ्वी हिल गई|
सशब्द्म्भवम व्योम ज्वालामालाकुलं भृशम । चचाल च
मही कृत्स्ना सपर्वतवनद्रुमा ।। १० ।। अध्याय १४ }
यहाँ वेदव्यास जी लिखते हैं कि -
“जहां ब्रह्मास्त्र छोड़ा जाता है वहीं १२ वषों तक
पर्जन्यवृष्ठी (जीव-जंतु , पेड़-पोधे आदि की उत्पति ) नहीं हो पाती
ये लिंक दे रहा हूँ इसे ओपन करके ध्यान पूर्वक पढ़ें -
http://www.bibliotecapleyades.net/…/
esp_ancient_atomic_07.h…
सनातनी भारत के विलक्षण विज्ञानं को नमन है...

Hammond's rice rat (Mindomys hammondi), also known as Hammond's oryzomys, is a species of rodent in the tribe Oryzomyini of family Cricetidae. Formerly considered to be related with Nectomys, Sigmodontomys, Megalomys, or Oryzomys, it is now placed in its own genus, Mindomys, but its relationships re...

https://youtu.be/0PGfmmO1HVw
28/11/2021

https://youtu.be/0PGfmmO1HVw

69000 शिक्षक भर्ती इतिहास मे पहली बार बेटे की जगह पिता दे रहा धरना,रोते माँ बाप (22000 सीट मामला) ...

क्या आपको पता है आखिर कुआं गोल ही क्यों होता है? जानिए इसके पीछे की साइंसScience Behind The Shape Of Well: विज्ञान का हम...
21/11/2021

क्या आपको पता है आखिर कुआं गोल ही क्यों होता है? जानिए इसके पीछे की साइंस

Science Behind The Shape Of Well: विज्ञान का हमारे जीवन में बहुत महत्व है. हम आसपास जितनी चीजें देखते हैं सबके पीछे कुछ ना कुछ साइंस जरूर होती है.

क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि कुआं गोल ही क्यों होता है (Why Is Well Always In Round Shape)? कुआं चौकोर (Square), त्रिकोण (Triangle) या षट्कोण (Hexagon) आकार में क्यों नहीं होता है?
इसके पीछे की वजह दिलचस्प है. दरअसल कुएं के गोल आकार के पीछे साइंस (Science Behind The Round Shape Of Well) है.
आइए जानते हैं कि कुएं का आकार गोल ही क्यों होता है?

गोल कुआं होने की क्या है वजह?

बता दें कि जब हम कोई तरल (Liquid) पदार्थ स्टोर करते हैं तो वो वही आकार ले लेता है जिसमें वो स्टोर किया जाता है. तरल पदार्थ जब किसी बर्तन में रखा जाता है तो वो उसकी दीवारों पर प्रेशर डालता है. अगर कुआं चौकोर आकार में बनाया जाएगा तो उसके अंदर जमा पानी कुएं की दीवार के कोनों पर सबसे ज्यादा प्रेशर डालेगा. ऐसे में कुएं की उम्र कम हो जाएगी और कुएं के टूटकर गिरने का खतरा भी बना रहेगा. यही वजह है कि कुआं गोल आकार में बनाया जाता है. जिससे उसके अंदर के पानी का प्रेशर कुएं की दीवार पर हर जगह समान हो.

कुआं गोल होने के पीछे एक और वजह भी है. गोल कुएं की मिट्टी ज्यादा दिन तक नहीं धंसती है क्योंकि गोल कुएं की दीवार पर हर तरफ समान प्रेशर होता है.

https://youtu.be/WypFHn9uLzw
04/09/2021

https://youtu.be/WypFHn9uLzw

प्रकाश क्या हैwhat is lightप्रकाश के गुणproperties of lightप्रकाश का परावर्तन Reflection of lightप्रकाश के परावर्तन के नियम Law of reflection of light ...

30/07/2021

सौर मंडल का रक्षा कवच किस ग्रह को कहा जाता है ?
👇👇🛡️🛡️🛡️ Of☀️☀️👇
सूर्य सौर हवा नामक सौर सामग्री का एक निरंतर प्रवाह भेजता है, जो हेलियोस्फीयर नामक ग्रहों के चारों ओर एक बुलबुला बनाता है। हेलियोस्फीयर एक ढाल के रूप में कार्य करता है जो ग्रहों को अंतरतारकीय विकिरण से बचाता है।

30/07/2021

01. मनुष्य के रक्त चाप को किस धमनी से मापा जाता है
उत्तर : ब्रैंकियल धमनी

02. हास्य गैस का रासायनिक नाम है
उत्तर : नाइट्रस ऑक्साइड

03. कैल्कुलस के आविष्कारक है
उत्तर : आइजेक न्यूटन

04. एड्स के विषाणु किसे नष्ट कर देते है ?
उत्तर : लिम्फोसाइट

05. उंगली के नाखून में विद्यमान प्रोटीन है
उत्तर : ग्लोबिन

06. पक्षियों को उड़ने की प्रक्रिया कहलाती है
उत्तर : ब्रेलिंग

07. एन्जाइम के प्रोटीन भाग को क्या कहते है
उत्तर : एपोएन्जाइम

08. किस हार्मोन को ‘आपातकालिक हार्मोन’ कहते है
उत्तर : ऐड्रिनलीन

09. बुद्धि का केंद्र स्थित है
उत्तर : प्रमस्तिष्क मे

10. कौन-सा एंजाइम एक्त का थक्का बनने में सहायता करता है
उत्तर : रेनिन

11. हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट के पाचन के लिए कौन-सा एन्जाइम उत्तरदायी है ?
उत्तर : एमाइलेज

12. केन्द्रक का विभाजन क्या कहलाता है
उत्तर : कैरियोकाइनेसिस

13. विज्ञान की वह शाखा जो ‘बुढ़ापे की प्रक्रिया’ का अध्ययन करती है, कहलाती है
उत्तर : जिरोन्टोलॅाजी

14. प्रोटीन की इकाई क्या है
उत्तर : अमीनो अम्ल

15. हमारे शरीर के किस अंग में एण्टीबॅाटी बनते है ?
उत्तर : टॅान्सिल

16. जीवाणुओं की कोशिकाभित्ति बनी होती है
उत्तर : वसा एवं सेल्यूलोज की

17. प्लाज्मा झिल्ली किसकी बनी होती है
उत्तर : लिपिड एवं प्रोटीन

18. कोशिका भित्ति का प्रमुख अवयव है
उत्तर : सेल्यूलोज

19. जीन को वहन करने वाली आनुवंशिक इकाइयाँ क्या कहलाती है
उत्तर : गुणसूत्र

20. नाइट्रोजन किसका अनिवार्य घटक होता है ?
उत्तर : प्रोटीन का

21. सिगरेट के धुँए का मुख्य प्रदुषक है
उत्तर : कार्बन मोनोआॅक्साइड और निकोटीन

22. तत्वों का सबसे पहले वर्गीकरण किसने किया था
उत्तर : न्यूलैण्ड ने

24. बेसेमर कन्वर्टर का उपयोग किसको प्राप्त करने में होता है ?
उत्तर : कास्ट आयरन से स्टील

25. सभी तेल किस कार्बनिक यौगिक के नाम से जाने जाते है
उत्तर : हाइड्रोकार्बन

30/07/2021

🌳🦚आज की कहानी🦚🌳

दसवी का रजिस्टर
〰〰〰〰🔰🔰〰〰〰〰〰
डिप्रेशन ग्रस्त एक सज्जन जब पचास साल की उम्र से ज्यादा के हुए तो उनकी पत्नी ने एक काउंसलर का अपॉइंटमेंट लिया जो ज्योतिषी भी थे।

पत्नी बोली:- "ये भयंकर डिप्रेशन में हैं, कुंडली भी देखिए इनकी।"
और बताया कि इन सब के कारण मैं भी ठीक नही हूँ।

ज्योतिषी ने कुंडली देखी सब सही पाया। अब उन्होंने काउंसलिंग शुरू की, कुछ पर्सनल बातें भी पूछी और सज्जन की पत्नी को बाहर बैठने को कहा।

सज्जन बोलते गए...
बहुत परेशान हूं...
चिंताओं से दब गया हूं...
नौकरी का प्रेशर...
बच्चों के एजूकेशन और जॉब की टेंशन...
घर का लोन, कार का लोन...
कुछ मन नही करता...
दुनिया मुझे तोप समझती है...
पर मेरे पास कारतूस जितना भी सामान नही....
मैं डिप्रेशन में हूं...
कहते हुए पूरे जीवन की किताब खोल दी।

तब विद्वान काउंसलर ने कुछ सोचा और पूछा, "दसवीं में किस स्कूल में पढ़ते थे?"

सज्जन ने उन्हें स्कूल का नाम बता दिया।

काउंसलर ने कहा:-
"आपको उस स्कूल में जाना होगा। आप वहां से आपकी दसवीं क्लास का रजिस्टर लेकर आना, अपने साथियों के नाम देखना और उन्हें ढूंढकर उनके वर्तमान हालचाल की जानकारी लेने की कोशिश करना। सारी जानकारी को डायरी में लिखना और एक माह बाद मुझे मिलना।"

सज्जन स्कूल गए, मिन्नतें कर रजिस्टर ढूँढवाया फिर उसकी कॉपी करा लाए जिसमें 120 नाम थे। महीना भर दिन-रात कोशिश की फिर भी बमुश्किल अपने 75-80 सहपाठियों के बारे में जानकारी एकत्रित कर पाए।
आश्चर्य!!!
उसमें से 20 लोग मर चुके थे...
7 विधवा/विधुर और 13 तलाकशुदा थे...
10 नशेड़ी निकले जो बात करने के भी लायक नहीं थे...
कुछ का पता ही नहीं चला कि अब वो कहां हैं...
5 इतने ग़रीब निकले की पूछो मत...
6 इतने अमीर निकले की यकीन नहीं हुआ...
कुछ केंसर ग्रस्त, कुछ लकवा, डायबिटीज़, अस्थमा या दिल के रोगी निकले...
एक दो लोग एक्सीडेंट्स में हाथ/पाँव या रीढ़ की हड्डी में चोट से बिस्तर पर थे...
कुछ के बच्चे पागल, आवारा या निकम्मे निकले...
1 जेल में था...
एक 50 की उम्र में सैटल हुआ था इसलिए अब शादी करना चाहता था, एक अभी भी सैटल नहीं था पर दो तलाक़ के बावजूद तीसरी शादी की फिराक में था...

महीने भर में दसवीं कक्षा का रजिस्टर भाग्य की व्यथा ख़ुद सुना रहा था...

काउंसलर ने पूछा:- "अब बताओ डिप्रेशन कैसा है?"

इन सज्जन को समझ आ गया कि उसे कोई बीमारी नहीं है, वो भूखा नहीं मर रहा, दिमाग एकदम सही है, कचहरी पुलिस-वकीलों से उसका पाला नही पड़ा, उसके बीवी-बच्चे बहुत अच्छे हैं, स्वस्थ हैं, वो भी स्वस्थ है, डाक्टर, अस्पताल से पाला नहीं पड़ा...
सज्जन को महसूस हुआ कि दुनिया में वाकई बहुत दुख है और मैं बहुत सुखी और भाग्यशाली हूँ।

दूसरों की थाली में झाँकने की आदत छोड़ कर अपनी थाली का भोजन प्रेम से ग्रहण करें। तुलनात्मक चिन्तन न करें, सबका अपना प्रारब्ध होता है।
और फिर भी आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में हैं तो आप भी अपने स्कूल जाकर दसवीं कक्षा का रजिस्टर ले आएं
💐💐

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏

18/07/2021

*✅ कुछ महान कार्यों से सम्बंधित व्यक्ति।*

1. ब्रह्म समाज – राजाराममोहन राय

2. आर्य समाज – स्वामी दयानंद सरस्वती

3. प्रार्थना समाज – आत्माराम पांडुरंग

4. दीन-ए-इलाही, मनसबदारी प्रथा – अकबर

5. भक्ति आंदोलन – रामानुज

6. सिख धर्म – गुरु नानक

7. बौद्ध धर्म – गौतमबुद्ध

8. जैन धर्म – महावीर स्वामी

9. इस्लाम धर्म की स्थापना, हिजरी सम्वत – हजरत मोहम्मद साहब

10. पारसी धर्म के प्रवर्तक – जर्थुष्ट

11. शक सम्वत – कनिष्क

12. मौर्य वंश का संस्थापक – चन्द्रगुप्त मौर्य

13. न्याय दर्शन – गौतम

14. वैशेषिक दर्शन – महर्षि कणाद

15. सांख्य दर्शन – महर्षि कपिल

16. योग दर्शन – महर्षि पतंजली

17. मीमांसा दर्शन – महर्षि जैमिनी

18. रामकृष्ण मिशन – स्वामी विवेकानंद

19. गुप्त वंश का संस्थापक – श्रीगुप्त

20. खालसा पन्थ – गुरु गोविन्द सिंह

21. मुगल साम्राज्य की स्थापना – बाबर
22. विजयनगर साम्राज्य की स्थापना – हरिहर व बुक्का

23. दिल्ली सल्तनत की स्थापना – कुतुबुद्दीन ऐबक

24. सतीप्रथा का अंत – लॉर्ड विलियम बेंटिक

25. आंदोलन : असहयोग,सविनय अवज्ञा, खेडा, चम्पारन, नमक, भारत छोडो – महात्मा गाँधी

26. हरिजन संघ की स्थापना – महात्मा गाँधी

27. आजाद हिंद फ़ौज की स्थापना – रास बिहारी बोस

28. भूदान आंदोलन – आचार्य विनोबा भावे

29. रेड क्रॉस – हेनरी ड्यूनेंट

30. स्वराज पार्टी की स्थापना – पंडित मोतीलाल नेहरु

31. गदर पार्टी की स्थापना – लाला हरदयाल

32. ‘वन्देमातरम्’ के रचियता – बंकिमचन्द्र चटर्जी

33. स्वर्ण मंदिर का निर्माण – गुरु अर्जुन देव

34. बारदोली आंदोलन – वल्लभभाई पटेल

35. पाकिस्तान की स्थापना – मो० अली जिन्ना

36. इंडियन एसोशिएशन की स्थापना – सुरेन्द नाथ बनर्जी

37. ओरुविले आश्रम की स्थापना- अरविन्द घोष

38. रुसी क्रांति के जनक – लेनिन

39. जामा मस्जिद का निर्माण – शाहजहाँ

40. विश्व भारती की स्थापना – रवीन्द्रनाथ टैगोर

41. दास प्रथा का उन्मूलन – अब्राहम लिंकन

42. चिपको आंदोलन – सुंदर लाल बहुगुणा
43. बैकों का राष्ट्रीकरण – इंदिरा गाँधी

44. ऑल इण्डिया वीमेन्स कांफ्रेंस की स्थापना – श्रीमती कमला देवी

45. भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना – एम०एन० राय

46. नेशनल कांफ्रेंस की स्थापना – शेख अब्दूल्ला

47. संस्कृत व्याकरण के जनक – पाणिनी

48. सिख राज्य की स्थापना – महाराजा रणजीत सिंह

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