09/05/2026
*अल्हम्दु लिल्लाह*
आज मदरसा इस्लामिया एह्या-उल-उलूम, बाप के लिए एक ऐतिहासिक और यादगार दिन था। पंजाब के महान आलिम-ए-दीन, शाही इमाम पंजाब हज़रत मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद उस्मान साहब दामत बरकातुहुम की बाबरकत आमद ने मदरसे के दर-ओ-दीवार को रौशन कर दिया।
हज़रत वाला का इस्तकबाल मोहतमिम मदरसा हज़रत मौलाना क़ारी मोहम्मद रहमतुल्लाह साहब अमीरी क़ासमी नक्शबंदी और सभी असातिज़ा-ए-किराम ने बहुत मोहब्बत व अकीदत के साथ किया। मुलाकात के दौरान इल्म व अमल की बातें हुईं, उम्मत-ए-मुस्लिमा के हालात पर चर्चा हुई और दीनी इदारों की जिम्मेदारियों पर रोशनी डाली गई।
शाही इमाम साहब ने मदरसे का मुआयना फरमाया।
हज़रत ने मदरसे की 47 साला दीनी, तालीमी और रफाही खिदमात को देखकर बेहद खुशी का इज़हार फरमाया।
अपने विचार व्यक्त करते हुए हज़रत मुफ़्ती साहब ने फरमाया कि "राजस्थान के इस बंजर इलाके में मदरसा इस्लामिया एह्या-उल-उलूम जिस ख़ुलूस व निःस्वार्थ भाव से दीन की खिदमत अंजाम दे रहा है, वह काबिल-ए-रश्क है। हज़रत मौलाना रहमतुल्लाह साहब और उनकी पूरी टीम की 50 साल की लगातार मेहनत को अल्लाह तआला कुबूल फरमाए।"
हज़रत ने खास तौर पर मदरसे के दीनी और आधुनिक तालीम के संगम वाले पाठ्यक्रम की तारीफ की और कहा कि आज के दौर में ऐसे इदारों की सख्त जरूरत है जो बच्चों को आलिम-ए-दीन के साथ-साथ एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएं।
मोहतमिम मदरसा हज़रत मौलाना रहमतुल्लाह साहब ने शाही इमाम साहब की आमद पर शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि "अकाबिर उलमा की तशरीफ आवरी हमारे लिए हौसला और दुआओं का जरिया है। आप हज़रात की सरपरस्ती में ही यह दीनी काफिला रवां-दवां है।"
मदरसा इस्लामिया एह्या-उल-उलूम, बाप आप तमाम अहबाब से भी दुआओं की दरख्वास्त करता है कि अल्लाह तआला इस इदारे को दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की अता फरमाए और इसे कयामत तक दीन की खिदमत के लिए कायम-ओ-दायम रखे। आमीन या रब्बल आलमीन।
*नोट*: महफिल की कुछ तस्वीरें पोस्ट के साथ संलग्न हैं।
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