14/08/2014
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी, ये गुलिस्ताँ हमारा
ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहाँ हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा
परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का
वो सन्तरी हमारा, वो पासबाँ हमारा
गोदी में खेलतीं हैं, इस के हज़ारों नदियाँ
गुलशन हैं जिन के दम से, रश्क़-ए-जनाँ हमारा
ऐ आब-ए-रूद-ए-गँगा, वो दिन है याद तुझको
उतरा तेरे क़िनारे, जब कारवाँ हमारा
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम वतन है, हिन्दोस्ताँ हमारा
यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमाँ सब मिट गये जहाँ से
अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशाँ हमारा
कुछ बात है के हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुशमन दौर-ए-ज़माँ हमारा
'इक़्बाल' कोई मरहम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा