03/04/2024
प्रिय अभिभावक ,
प्रति 3 मिनट 1 बच्चे को एग्जाम और रिजल्ट्स के समय सुसाईडियल थॉट आता है,एक रिपोर्ट के अनुसार 27% की वृद्धि हुई है पिछले 7 सालो में,
एग्जाम्स फोबिया , डिप्रेशन, एंजाइटी डिसऑर्डर , सुसाइडल थॉट
76% ज्यादा बच्चे आजकल इनसे ग्रसित हो रहे है,कारण एग्जाम्स रिजल्ट्स और उसके चलते जो उनकी तुलना की जाती है व अन्य,
एग्जाम्स और रिजल्ट्स का समय चल रहा है और हमारी परवरिश और सामाजिक माहौल के चलते चाहे अनचाहे हम में एक अभिभावक के तौर पर तुलना, अंको को बुद्धिमता समझना , अंको को अच्छे भविष्य की कुंजी मानना जैसी कई मान्यताएं हम में समाई हुई है, तो सोचा चलिए आज इस पर बात करते है,
एक महान शिक्षाविद् के अनुसार ऐसी कोई परीक्षा कभी बनाई ही नही जा सकती जिससे की किसी बच्चें का असल मूल्यांकन किया जा सके , और ये जो परीक्षाएं ब्रिटिश एजुकेशन सिस्टम के आधार पर आजकल हो रही है मात्र एक घंटे में वर्ष भर पढ़े हुए को लिखना ज्यादातर विषयों में यह मात्र यादाश्त की परीक्षा है,इसके आधार पर बच्चें की इंटेलजेंसी या स्किल्स या भविष्य को तोलना, नापना निहायती गलत है, कम अंक या अच्छे अंक इस बात का प्रमाण बिल्कुल नही है की वो जीवन में सफल या असफल होगा या अन्य किसी बच्चे से उसकी क्षमता को अंक आधार पर नापा जा सकता है, जरा सोचिए सचिन तेंदुलकर म्यूजिक का और लता मंगेशकर क्रिकेट का एग्जाम्स देते तो उनका परिणाम क्या होता, आप किसी भी फील्ड के टॉप 10 सक्सेसफुल लोगो की अंक तालिका उठा लीजिए 10 में से 7 लोग जो भविष्यदृष्टा ,क्रिएटिव माइंड्स,इनोवेटर्स हुए है वे ज्यादातर इस अंक विज्ञान में फेल हुए है, अतः अपने बच्चे पर डायरेक्ट इनडायरेक्ट प्रेशर बनाने से पहले इन बातो को अवश्य ध्यान में रखे।
धन्यवाद