05/09/2021
शिक्षक होना एक बात है, और वाक़ई गुरु होना दूसरी बात है ।
सिल्लेबस तो कोई भी पूरा करा देगा। वो कोई बड़ी बात नहीं है। हमने आजतक शिक्षा को यही जाना है कि शिक्षा वो है, जिसमें सिल्लेबस पूरा कराया जाता है, और जिसमें बाहरी चीज़ों के बारे में हमें बता दिया जाता है। तो आपकी सारी शिक्षा सिर्फ़ भाषाएँ, गणित, विज्ञान, भूगोल, इतिहास आदि पर केंद्रित रहती है। पर आप रसायन नहीं हैं, आप नदी नहीं हैं, आप पर्वत नहीं है, आप इतिहास नहीं हैं और ना ही आप हैं प्रौद्योगिकी।
हमारी आज तक की शिक्षा पद्यति ने हमारा परिचय उस एक तत्व, उस एक इकाई से कभी नहीं कराया जो हमारे लिए सबसे सार्थक और महत्वपूर्ण है, और वो है क्या? ‘आप’। हमारी सारी शिक्षा व्यवस्था, लगातार और लगातार, बाहरी वस्तुओं के बारे में रही है। जो जबसे महत्वपूर्ण इकाई है, उसके बारे में हमारी शिक्षा ने कभी सोचा नहीं। क्योंकि जिन्होंने ये शिक्षा पद्यति विकसित की है, वो खुद बड़े नामसझ लोग थे। तो उन्होंने शिक्षा में भर दिया है कि पूरी दुनिया के बारे में जानो । लेकिन जो उस पूरी दुनिया को जान रहा है, उसके बारे में कुछ मत जानो और फिर जब शिक्षा व्यवस्था उस तरह की है, तो शिक्षक भी उसी तरीके के हैं।
वो समझते भी नहीं हैं कि वो किस तरीके के सन्देश दे रहे हैं। पर ये सब कहकर हमें क्या लाभ है? क्या हम अतीत में जा कर अपना अतीत बदल सकते हैं? नहीं बदल सकते! हम सिर्फ़ यह कर सकते हैं कि आज जो कुछ हो रहा है, हम उसको समझें। आज जो कुछ हो रहा है, हम उसको समझें। हम बहुत छोटे थे, हमारे साथ क्या हो गया? कोई विशेष लाभ नहीं है उसका ज़िक्र करने से अभी। पूरे समाज में क्या हो रहा है, उसका भी ज़िक्र करने से कोई विशेष लाभ नहीं है। अगर कोई एक इकाई है, जो कि महत्वपूर्ण है, वो है ‘मैं’ । अगर कोई एक पल है जिसमें सार्थक कर्म हो सकता है, वो है ‘अभी’। अगर कोई एक जगह है, जहाँ वास्तविकता है,तो वो ‘यही’ जगह है, ‘अभी’, ‘यहाँ’। अपने को ‘अभी’ सिर्फ ‘यहाँ’ में ले कर के आएँ। यही वास्तविक बुद्धिमत्ता है, यही असली समझ है। बस वही है, वास्तव में ‘सजीव’ होना
जीवन में हम कुछ भी नया करने चलते हैं, तो बाधा आती है?🤔 क्या दूसरे बाधा हैं? क्या परिस्थितियाँ बाधा हैं? तो कौन है बाधा? 'अतीत' अतीत से आज़ादी तो 'अभी' और 'यहाँ' को ही जानकार मिलेगी। कैसे जाने 'अभी' और 'यहाँ' को? ये शिक्षा तो गुरु ही दे सकते हैं।