ILM E DEEN

ILM E DEEN

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Assalaamu aleikum
wa rahmatullahi
wa barkatahu. Deen ki baatein sikhne ke liye follow karein

18/12/2018

AHKAAME FIQHIYAA [NAMAAZ KA BAYAAN] :-
SAHIHAIN me IBNE MAS,OOD RADIYLLAHU
T'ALA ANHU se marwi hai ki ek sahab se gunah sadir hua, hazir ho kar arz ki
us par yeh aayat nazil hui :-
Tarjama :- namaaz qaaim kar din ke 2no
kinaron aur raat ke kuch hisse me beshak
nekiyaan gunaahon ko door karti hain yeh
nasihat hai nasihat manne walo ke liye.

Mas,ala :- har mukallaf yani aaqil, baalig, par namaaz farze ainm hai,
uski farziyat ka munkir (inkar karne wala) kafir aur aur qasdan (jaanboojh kar) chhorhe agarche (chahe) ek hi waqt ki woh faasiq hai aur jo namaaz na padhta ho qaid kiya jaye,
yahan tak ki touba kare aur namaaz padhne
lage. [durre mukhtaar]

Mas,ala :- bacha jab 7 baras ki umr ka ho to
use namaaz padhna sikhaya jaye aur jab 10
baras ka ho jaye to maar kar padhana chahiye
[aboo daaud, tirmizi]

namaaz khaalis ibaadate badani hai usme
niyabat jaari nahi ho sakti yani ek ki taraf se
dusra nahi padh, na yeh ho sakta hai ki zindagi me namaaz ke badale kuch maal batour fidiya adaa kar de
albatta agar kisi par kuch namaazein farz rah g*i hain aur inteqaal kr gaya aur wasiyat kar
gaya ki uski namaazon ka fidiya adaa kiya jaye aur ummeed hai ki IN SHAA ALLAH TA'ALA qubool ho aur be-wasiyat bhi waris uski taraf se fidiya de ki ummeed hai yani gunaahon ke muaaf hone ki ummeed hai.
[Bahare shariat]

IN SHAA ALLAH aage jaari rahega aap logon se gujarish hai tawajjoh karein aur hum sunniyon ke liye dua karein ki hum shariat par amal karein aur sahi tareeqe se adaa karein,

Photos 16/02/2017

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अल्लाह तआला फरमाता है
तर्जमा :- ऐ ईमान वालों! जब नमाज़ के लिए जुमे के दिन अज़ान दी जाये तो ज़िक्रे खुदा की तरफ दौड़ो और खरीद फरोख्त छोड़ दो यह तुम्हारे लिए बेहतर है.

हदीस :- इब्ने माजा अबू लिबाबा इब्ने अब्दुल मुन्ज़िर और अहमद सअद इब्ने मआज़ रदियल्लाहु तआला अन्हुमा से रावी की फरमाते हैं हुज़ूर ए अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैही वस़ल्लम जुमे का दिन तमाम दिनों का सरदार है अल्लाह के नज़दीक सब से बड़ा दिन है और वह अल्लाह के नज़दीक ईदे अज़हा और ईदुल फ़ित्र से बड़ा है,
उसमें पाँच खसलतें हैं
1. अल्लाह तआला ने उसी में आदम अलैहिस्सलाम को पैदा फरमाया.
2. उसी में ज़मीन पर उन्हें उतारा.
3. उसी में उन्हें वफ़ात दी.
4. उसमें एक साअत ऐसी है कि बन्दा जिस चीज़ का सवेल करे वह उसे देगा जब तक हराम का सवाल न करे.
5. उसी दिन क़यामत क़ाइम होगी, कोई मुक़र्रब फ़रिश्ता व आसमान व ज़मीन और हवा और पहाड़ और दरिया ऐसी नहीं की जुमे के दिन से न डरता हो।
मसअला :- नमाज़े जुमा के लिए पहले से जाना और मिस्वाक करना और अच्छे और सफेद कपड़े पहनना और तेल खुशबू लगाना और पहली सफ़ में बैठना मुस्तहब है और गुस्ल करना सुन्नत है। (आलमगीरी)
जब इमाम खुत़बे के लिए खड़ा हो उस वक़्त से नमाज़ ख़त्म होने तक नमाज़ व दूसरे ज़िक्र व हर क़िस्म का कलाम मना है अलबत्ता साहिबे तरतीब अपनी क़ज़ा नमाज़ पढ़ लें यूँ ही जो शख्स सुन्नत या नफ़्ल पढ़ रहा है तो जल्द से जल्द पूरी कर ले (दुर्रे मुख़्तार)
जो चीज़ नमाज़ में हराम है वह सब ख़ुतबे ची हालत में भी हराम है यहाँ तक की अम्र बिल माअरुफ़ (नेकी के लिए कहना)
ख़तीब जब ख़ुतबा पढ़े तो तमाम हाज़िरीन पर सुनना और चुप रहना फर्ज़ है
जो लोग दूर हैं और उस तक आवाज न पहुँचे तो उनपर चुप रहना वाजिब है और अगर किसी को बुरी बात करते देखे तो हाथ या सर के इशारे से मनाकर सकता है ज़ुबान से नाजाईज़ है (दुर्रे मुख़्तार)
हजामत बनवाना और नाखून तरशवाना जुमे के बाद अफ़ज़ल है।
[बहारे शरीअत, हिस्सा चौथा]
[जुमे के बयान के अलग अलग जगह से क़ुरआन की आयत हदीस व मसाईल लिखे गयें हैं]

Photos 26/01/2017

अल्लाह तआला की ज़ात और उसकी सिफ़तों के बारे में अक़ीदे :- पार्ट 2

अक़ीदा :- जिस तरह अल्लाह तआला की ज़ात क़दीम, अज़ली और अबदी है उसी तरह उसकी सिफ़तें भी क़दीम, अज़ली और अबदी है।

अक़ीदा :- अल्लाह की कोई सिफ़त मख़लूक़ नहीं न ही ज़ेरे कुदरत दाखिल।

अक़ीदा :- अल्लाह तआला की ज़ात और सिफ़ात के अलावा सब चीज़ें हादिस यानी पहले न थीं अब मौजूद है।

अक़ीदा :- जो अल्लाह की सिफ़तों को मख़लूक़ कहे या हादिस बताए वह गुमराह व बद्दीन है।

अक़ीदा :- जो आलम में से किसी चीज़ को खुद से मौजूद माने या उसके हादिस होने में शक करे वह काफ़िर है।

अक़ीदा :- अल्लाह तआला न किसी का बाप है, न ही किसी का बेटा है और न उसके लिए कोई बीवी, अगर कोई अल्लाह के लिए बाप, बेटा, बीवी बताए वह भी काफ़िर है बल्कि जो मुमकिन भी बताए वह गुमराह बद्दीन है।

अक़ीदा :- अल्लाह तआला हय्य है यानी ज़िंदा है जिसे कभी मौत न आएगी, सबकी ज़िंदगी उसी के हाथ (दस्त ए कुदरत) में है वह जिसे जब चाहे ज़िंदगी दे और जब चाहे मौत दे दे।

अक़ीदा (बहुत ध्यान से पढ़ें बार बार पढ़ें) :- वह हर मुमकिन पर क़ादिर है और कोई मुमकिन उसकी कुदरत से बाहर नहीं, जो चीज़ मुहाल हो, अल्लाह तआला उससे पाक है की उसकी कुदरत उसे शामिल हो क्योंकि मुहाल उसे कहते हैं जो मौजूद न हो सके और जब कुदरत होगी तो मौजूद हो सकेगा और जब मौजूद हो सकेगा तो मुहाल कैसे हो सकेगा, इसे इस तरह समझिए जैसे की दूसरा खुदा मुहाल है यानी दूसरा खुदा हो ही नहीं सकता अगर दूसरा खुदा होना कुदरत के मातहत (अधीन) हो तो मौजूद हो सकेगा और जब मौजूद हो सकेगा तो मुहाल नहीं रहा,
और दूसरे खुदा को मुहाल न मानना अल्लाह के एक होने का इंकार है,
यूँ ही अल्लाह तआला का फ़ना होना मुहाल (नामुमकिन) है अगर अल्लाह के फ़ना होने को कुदरत में दाखिल माना जाए तो अल्लाह के अल्लाह होने से ही इंकार करना है।
एक बात यह भी समझने की है की हर चीज़ जो अल्लाह की कुदरत के मातहत हो वह मौजूद ही हो जाए यह कोई ज़रुरी नहीं, जैसे की यह मुमकिन है की सोने चाँदी की ज़मीन हो जाए लेकिन ऐसा नहीं है, लेकिन ऐसा हो जाना हर हाल में मुमकिन रहेगा चाहे ऐसा कभी न हो।
[बहारे शरीअत, हिस्सा 1, पेज 6-7]

Photos 25/01/2017

अल्लाह तआला की ज़ात और उसकी सिफ़तों के बारे में अक़ीदे :-
अल्लाह एक है कोई उसका शरीक नहीं, न ज़ात में न सिफ़ात में न अफ़आल (कामों) में न अहकाम (हुक्म) में न नामों में।
वह " वाजिबुल वजूद " है यानी ( जिसका हर हाल में मौजूद रहना ज़रुरी हो) उसका अदम मुहाल है यानी किसी ज़माने में उसकी ज़ात मौजूद न हो नामुमकिन है यानी वह हमेशा रहेगा उसे कभी मौत न आएगी। अल्लाह तआला ही इस लाइक़ है की उसकी बन्दगी और इबादत की जाये।

अक़ीदा :- अल्लाह बेपरवाह है किसी का मोहताज नहीं और सारी दुनिया उसी का मोहताज है।

अक़ीदा :- अल्लाह की ज़ात का इदराक अक़्ल के ज़रिए मुहाल है यानी अक़्ल से उसकी ज़ात को समझना मुमकिन नहीं क्योंकि जो चीज़ अक़्ल के ज़रिए से समझ आती है अक़्ल उसको अपने घेरे में दे लेती है और अल्लाह की शान यह है की कोई चीज़ उसकी ज़ात को घेर नहीं सकती। अल्बत्ता अल्लाह के कामों के ज़रिए से मुख्तसर तौर पर उसकी सिफ़तों और उन फिर उन सिफ़तों के ज़रिए अल्लाह तआला की ज़ात पहचानी जाती है।

अक़ीदा :- अल्लाह तआला की सिफ़तें न ऐन हैं न गैर यानी अल्लाह तआला की सिफ़तें उसकी ज़ात नहीं और न वह सिफ़तें उसकी ज़ात से अलग हो सकें क्योंकि वह सिफ़तें ऐसी हैं जो अल्लाह के ज़ात को चाहती है और उसकी ज़ात के लिए ज़रुरी है।

इस सिलसिले में दूसरी बात यह भी ध्यान रखने की है की अल्लाह की सिफ़तें कई हैं और अलग हैं और हर सिफ़त का मतलब अलग अलग हैं। मुतरादिफ़ैन नहीं, इसलिए सिफ़तें ऐने ज़ात नहीं हो सकतीं और सिफ़तें गैरे ज़ात इसलिए नहीं हैं की गैर ज़ात मानने की सुरत में दो बातें हो सकती हैं। या तो सिफ़तें क़दीम होंगी या हादिस (जो किसी के पैदा करने से पैदा यानी मख़लूक़) अगर क़दीम मानते हैं तो कई एक क़दीम को मानना पड़ेगा जबकि क़दीम सिर्फ़ एक ही है और अगर हादिस तसलीम करते हैं तो यह मानना भी ज़रुरी होगा वह क़दीम ज़ात सिफ़तों के हादिस होने या पैदा होने से पहले बगैर सिफ़तों के थी और यह दोनों बातें बातिल हैं।
[बहारे शरीअत, हिस्सा 1, पेज 6]

Photos 28/12/2016

नेक लोगों की सोहबत से हमेशा भलाई ही मिलती है क्योंकी..
हवा जब फूलों से गुज़रती है तो वो भी खुश्बुदार हो जाती है…!
हज़रत अली रदियल्लाहु तआला अन्हु

Photos 27/12/2016

तहज्जुद पढ़ने वाले बिना हिसाब जन्नत जाएँगे
हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैही वसल्लम की उम्मत में ऐसा भी आदमी होगा की जिनके निन्नानवे दफ़्तर गुनाहों के होंगे और हर दफ़्तर इतना होगा जहाँ तक निगाह पहुँचे और वह सब दफ़्तर खोले जायेंगे, फिर अल्लाह तआला पूछेगा की इनमें से तुम्हें किसी बात का इंकार तो नहीं है?
मेरे फ़रिश्ते ' किरामन, कातिबीन ' ने तुम पर जुल्म करते हुए गलत बात तो नहीं रिख दीं?
या तेरे पास कोई बहाना तो नहीं ?
तो वो अपने रब के सामने अपने गुनाहों को तस्लीम करेगा,
अल्लाह तआला फरमायेगा कि हाँ तेरी एक नेकी हमारे सामने है और उसी की वजह से आज तुझे नजात मिलेगी,
फिर एक पर्चा निकाला जाएगा जिस पर दिखा होगा
तर्जुमा :- मैं गवाही देता हूँ के अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लाइक़ नहीं और बेशक मुहम्मद सल्लललाहू तआला अलैही वसल्लम उसके बन्दे और उसके रसूल हैं "

और अल्लाह तआला उसे हुक्म देगा की जाओ मीज़ान पर उन दफ़्तरों के सामने इस पर्चे को रखकर तौल करो, वह कहेगा की या अल्लाह उन दफ़्तरों के सामने यह पर्चा क्या हक़ीक़त रखता है!
अल्लाह तआला फरमायेगा की तेरे साथ इंसाफ किया जायेगा,
फिर एक पल्ले पर वह सब दफ़्तर रखे जायेंगे और एक में वह पर्चा,
अल्लाह की मर्जी से वह पर्चे वाला पल्ला (गुनाहों वाले) दफ़्तरों से भारी हो जायेगा,

यह उसकी रहमत है और उसके रहमत की कोई थाह नहीं, वह रहम फरमाए तो थोड़ी चीज़ भी बहुत है।
[बहारे शरीअत, जिल्द 1, पेज 38]

25/12/2016

क़यामत के दिन हर एक को उसका आमालनामा दिया जाएगा, जो नेक होंगे उनके दाहिने और जो गुनाहगार होंगे उनके बायें हाथ में और जो काफिर होंगे उनका सीना तोड़ कर उनका बायाँ हाथ पीछे से निकाल कर पीठ के पीछे दिया जाएगा।
(बहारे शरीअत)

25/12/2016

सुरज का पश्चिम से निकलना :- इस निशानी के ज़ाहिर होते ही तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाएगा अगर उस वक़्त कोई इस्लाम क़बूल करना चाहे तो उस चा इस्लाम क़बूल नहीं किया जाएगा

24/12/2016

एक बार एक शख्श ने हज़रत अली रदियल्लाहु तआला अन्हु से अर्ज़ कि की मैंने दौरे जिहालत में एक मन्नत मांगी थी के मुझे बेटा होगा तो मैं कुत्ते के साथ रोटी खाऊंगा __
और इत्तिफाकन बेटा हो गया!

अब में मुसलमान बन गया हूँ और अब क्या करूँ ??
तो हज़रत अली रदियल्लाहु तआला अन्हु ने फरमाया की ऐसे मन्नत मत मांगो करो __

अब तुम दूर के किसी मन्तके ( गाँव) में जाओ और किसी बेनमाज़ी को तलाश करो जिसने 3 दिन तक नमाज़ ना पढ़ी हो !
उसके साथ रोटी खाओ !!

अल्लाहु अकबर
सोचिए जो नमाज़ ही न पढ़ते हों उनका क्या आलम होगा ???
अल्लाह तआला हम सबको पंचगाना नमाज़ पढ़ने की तौफीक अता फरमाए
आमीन

23/12/2016

जहन्नम का हाल यह होगा यह होगा की उसकी चिंगारियां ऊँचे ऊँचे महलों के बराबर इस तरह उड़ेंगी की जैसे ज़र्द ऊँटों की क़तारें लगातार आ रही हों,
पत्थर, आदमी जहन्नम के ईंधन हैं, दुनिया की आग जहन्नम की आग के सत्तर हिस्सों में से एक हिस्सा है, जिस जिस जहन्नमी को सबसे कम दर्जे का अज़ाब होगा उसे आग की जूतियाँ पहनाई जायेंगी जिससे उसके सर का भेजा ऐसा खौलेगा जैसे तांबे की पतीली खौलती है और वह यह समझेगा की सबसे ज़्यादा अज़ाब उसी पर हो रहा है जबकी यह हल्का अज़ाब है
जिस पर सबसे हल्के दर्जे का अज़ाब होगा उससे अल्लाह तआला पूछेगा की अगर सारी ज़मीन तेरी हो जाये तो क्या तू इस अज़ाब से बचने के लिए सारी ज़मीन फिदये में दे देगा?
वह जवाब देगा हाँ हाँ मैं दे दूँगा।
फिर अल्लाह तआला इरशाद फरमाएगा की ऐ बंदे मैंने तेरे लिए बहुत आसान चीज़ का हुक्म उस वक़्त किया था जब की तू आदम की पीठ में था लेकिन तू नहीं माना।
[बहारे शरीअत, जिल्द 1, पेज 44]

अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर
अल्लाह हम सबको अल्लाह तआला के हुक्म में चलने की तौफीक दे
आमीन सुम्मा आमीन

23/12/2016

जहनन्म की आग हज़ार बरस तक धैंकाई गई यहाँ तक की वो बिल्कुल लाल हो गई, फिर उसे हज़ार बरस और जलाई गई यहाँ तक की वो सफेद हो गई, उसके बाद फिर हज़ार साल जलाई गई यहाँ तक की बिल्कुल काली हो गई और अब वह बिल्कुल काली है और उसमें रोशनी का नामोनिशान नहीं।

Photos 22/12/2016

अबू दाऊद व नसई व इब्ने माजा व बैहक़ी औस रदियल्लाहु तआला अन्हु से रावी कि फरमाते हैं सल्लललाहू तआला अलैही वसल्लम की जुमे के दिन आदम अलैहिस्सलाम पैदा किये गये और इसी में इंतक़ाल हुए और इसी में नफ़्ख़ा है (यानी दूसरी बार सूर फँका जाना) इसी में सअक़ा ( यानी पहली बार सूर फूँका जाना) इस दिन में मुझ पर दूरुद की कसरत करो की तुम्हारा दूरुद मुझ पर पेश किया जाता है,
लोगों ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्लललाहू तआला अलैही वसल्लम उस वक़्त हुज़ूर पर हमारा दूरुद क्यों कर पेश किया जाएगा जब हुज़ूर इंतक़ाल फरमा चुके होंगे?
(आपने) फरमाया अल्लाह तआला ने ज़मीन पर अंबिया के जिस्म खाना हराम कर दिया है।
और इब्ने माजा की रिवायत में है की (आप) फरमाते हैं जुमे के दिन मुझ पर दुरुद की कसरत करो की यह दिन मशहूद (गवाही दिया हुआ यानी बुजुर्गी वाला) है इसमें फ़रिश्ते हाज़िर होते हैं और जो मुझ पर दुरुद पढ़ेगा पेश किया जाएगा,
अबू दरदा रदियल्लाहु तआला अन्हु कहते हैं की मैंने अर्ज़ कि " और मौत के बाद " ?
आपने फरमाया बेशक अल्लाह तआला ने ज़मीन पर अंबिया के जिस्म खाना हराम कर दिया है अल्लाह का नबी ज़िंदा है रोजी दिए जाते हैं।
[बहारे शरीअत जिल्द 4, पेज 71]

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