20/03/2025
सार्थकता की परख अतिआवश्यक है।
एक संदर्भ का उल्लेख करना चाहूंगा, समझ आए तो उत्तम:
एक संस्था है "हेवते" (https://facebook.com/Hewatefb) जो विगत 7 से अधिक वर्षों से (अनवरत) अनेक पारम्परिक कलाओ और विलुप्त हो रही "कैथी लिपि" का निःशुल्क प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का आयोजन कर रही है।
इस संस्था द्वारा, आधारभूत मिथिला चित्रकला (कचनी और भरनी दोनो शैलियों में), पेपरमैसी कला और लगभग विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी कैथी लिपि में, 10000 से अधिक अभ्यर्थियों को सफल और निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
हेवते कोई ऎसी संस्था नही है जो किसी को आर्थिक अथवा राजनैतिक सहायता या मंच प्रदान कर सके और भविष्य मे भी ऐसी कोई योजना नही है अतः जब कभी भी इन विलुप्तप्राय कला या लिपि के प्रचार-प्रसार की चर्चा होती है तो उसमे हेवते के योगदान को नजरअंदाज करना पारंपरिक ही प्रतीत होता है।
तथाकथित बुद्धिजीवी अपने विशाल मस्तिष्क के एक लघु खंड में, ये पूर्वाग्रह रखते है कि पटना, दिल्ली आदि स्थानों पर 100-200 पुस्तको का लेखा जोखा और 10- 5 महामानवों के साक्षात्कार से लबरेज़ कुछ लेख और साक्षात्कार इन कलाओं को पुनर्जीवित करने हेतु काफी है जबकि इससे वास्तव में धरातल पर क्या हो रहा है, इन बुद्धिजीवियों को भलीभाँति ज्ञात है।
उन्हें TRP मिल गई, हो गया विकास का काम पूरा.... फिर अगले मंच पर ...!
क्या आप मे से किसी जानकार को अभी तक की जानकारी में ये पता चला है कि, कोई संस्था 10000 से अधिक लोगों को, एक विलुप्तप्राय लिपि, कैथी सिखा चुकी है, जो अभी भी अनवरत जारी है।
किसी लिपि या काला के विकाश में, (जबकि वो विलुप्ति के अंतिम सीमारेखा पर पहुंच चुकी हो) किसी के भी द्वारा, इस प्रकार किया गया प्रयास ही सही मायने में उस लिपि को पुनर्जीवित करने का व्यावहारिक प्रयास है, बांकी सब ढोंग है या उसके ही आसपास की अवधारणा है।
हेवते के सभी संचालकों का सहृदय धन्यवाद।आप सबो ने जो कार्य किया है, ये विलक्षण है।
लिपि और कला के लिए इसका दूरगामी प्रभाव निश्चय ही परिलक्षित होगा।
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Hewate(हेवते)
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Blogs: https://hewate.blogspot.in
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