22/04/2026
गुड़गाँव की मेट्रो, ऑफिस की PPT और वो कभी खत्म ना होने वाली डेडलाइन। थक कर जब घर लौटते हैं तो लगता है कम से कम सुकून की दो रोटियाँ मिलेंगी... पर PG का 'संविधान' और घड़ी की सुइयाँ किसी के सगे नहीं होते।
आज समझ आया कि इस शहर में सिर्फ करियर नहीं बनाना है, बल्कि वक्त से पहले घर पहुँचने की कला भी सीखनी है। वरना जीत भी जाओ, तो भूख हार का अहसास करा देती है।
एक सच्ची कहानी जो हर उस बंदे की है जो घर से दूर अपनी पहचान बना रहा है। सुनिए ज़रूर!