04/06/2021
एक दमदार जिन्दगी
हम सभी जानते हैं कि #मेहुल_चोक्सी एक भगोड़ा हीरा कारोबारी है। उसने अपने भांजे नीरव मोदी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक को लगभग 14 हज़ार करोड़ का चूना लगाया है! आजकल वह एंटीगुआ बारवुडा में बतौर वहाँ के नागरिक रह रहा है। इस समय उसके ऊपर डॉमिनिका में अवैध प्रवेश के आरोप में मुक़दमा चल रहा है। भारत वर्ष 2018 से उसे देश वापस लाने के लिये कूटनीतिक कोशिशों में लगा हुआ है।
कूटनीति वैदेशिक सम्बन्धों को प्रगाढ़ बनाने का एक उपकरण होता है। फ़रीद ज़कारिया के अनुसार, ‘’विदेश नीति (कूटनीति) लागत-लाभ पर आधारित एक समीकरण होता है, न कि कोई धर्मशास्त्र’’-(Foreign policy is a matter of cost and benefit, not theology.). कौटिल्य ने ईसा पूर्व 321 में ‘विजिगिषु’ का सिद्धांत प्रतिपादित किया था। यह उसकी विदेश नीति (कूटनीति) से संबंधित है. इसमें वह लिखता है-‘’हर मैत्री (कूटनीति) के पीछे निजी स्वार्थ छिपा होता है।’’ मोदी सरकार द्वारा जब डॉमिनिका को कोरोनारोधी वैक्सीन देने का फ़ैसला किया गया तो भारत में रहने वाले कुछ सिरफिरे नेताओं ने इस पर सवाल उठाये! आज इसी वैक्सीन डिप्लोमैसी का नतीजा है कि डॉमिनिका की सरकार कह रही है कि मेहुल चोक्सी का भारत को न सौंपे जाने का तर्क निराधार है। उसका इस मामले में कोई क़ानूनी अधिकार (locus standi) नहीं है।
रही बात मेहुल चोक्सी के भारत प्रत्यर्पण की तो भारत के पक्ष निम्नलिखित पॉंच बातें जाती हैं—
1.भारत दोहरी नागरिकता की इजाज़त नहीं देता (देखें नागरिकता अधिनियम, 1955);
2.उसने भारत की नागरिकता के परित्याग की कोई औपचारिकता पूरी नहीं की। अर्थात् वह आज भी भारत का नागरिक है; यहॉं तक कि वह पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12(1A) का भी दोषी है।
3.वह एक गम्भीर आर्थिक अपराध कर भारत से भागा है; उसके ऊपर तीन क़ानूनों-भ्रष्टाचार निवारक क़ानून, 1988, भगोड़ा आर्थिक अपराध (निवारक) क़ानून, 2018 तथा PMLA,2002 [मनी लाउंडरिंग (निवारक) अधिनियम] के अंतर्गत मुक़दमे चल रहे हैं। उसके विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है;
4.वह डॉमिनिका में अवैध प्रवेश का दोषी है जिससे डॉमिनिका के ‘कोर्ट ऑव जस्टिस’ के पास उसके अधिकारों के संरक्षण का कोई सॉलिड क़ानूनी अधिकार नहीं है (मानवाधिकार के संरक्षण को छोड़कर);
5.डॉमिनिका की सरकार कमर कस के भारत के साथ खड़ी है; वह मेहुल चोक्सी के मामले में वहाँ चल रही क़ानूनी कार्रवाई को ही आधारहीन बता रही है।
यदि मोदी सरकार चोक्सी को भारत लाने में सफल हो जाती है तो यह उसकी एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी! कोरोना कुप्रबंधन का आरोप झेल रहे मोदी के लिये यह एक राहत देने वाली घटना हो सकती है!