18/05/2026
आदरणीय अभिभावक बंधुओं हम सब अपने बच्चों को एक शिक्षित,संस्कारी,ओर योग्य बनाना चाहते है लेकिन फिर भी वो आज इस क्षेत्र में असफल रहते है मतलब जैसा हम बच्चों से उम्मीद रखते है वैसा हमे बच्चों से नहीं मिल पाता है यह क्या कारण है?
आज मोबाइल का युग है इस मोबाइल के युग में हम ओर हमारा पूरा समाज इतना ग्रसित हो गया कि बच्चों को समय देना,उनके साथ बैठना,उनकी गतिविधियों की जांच करना उनके बोलचाल,व्यवहार इन सब पर हमने कभी मंथन ही नहीं किया ओर न हीं हमने ऐसा करने की सोच रखी ।
हम स्वयं अभिभावक ही मोबाइल ,राजनीति ओर दिखावे की होड में इतने लिप्त हो चुके है कि हम खुद को ही सही ओर गलत का आभास नहीं हो रहा ओर फिर हम उम्मीद रखते है कि बच्चे हमें कुछ अच्छा रिस्पॉन्स दे तो मेरे हिसाब से यह गलत है।
एक विद्यालय बच्चों को बेहतर शिक्षा तभी दे सकता है जब बच्चों के साथ एक माता - पिता भी घर पर अपना उत्तरदायित्व,जिम्मेदारी पूर्णत निभाए और आजकल यह समस्या लगभग हर घर की सबसे कठिन समस्या है।
फिर भी ऐसे कठिन दौर में हमारी संस्था के सभी अध्यापक बंधुओं ने कड़ी से कड़ी मेहनत कर बच्चों की सभी गलत आदतों में लगभग 50 % से अधिक सुधार किया जो हमें आज हमारे बच्चों में देखने को मिल रहा है
आज हमारे बच्चे हमारे विद्यालय परिसर में खुशी खुशी स्कूल आते है और जाते वक्त यह भी कहते नजर आए है कि सर हमारी छुट्टी बंद कर दो हमारा तो घर पर मन ही नहीं लगता आप तो हमे शाम तक पढ़ाते रहो ।
और साथ ही आदरणीय अभिभावक का भी हमे अच्छा फीडबैक मिल रहा है।
आज हम गर्व से यह कह सकते है कि हमारी स्कूल वास्तव में बच्चों के सर्वांगीण विकास को पूरी तरह पूरा करने में सक्षम ओर प्रयासरत है ।
हम आपसे वादा करते है कि बच्चों को समय, स्थिति ओर कक्षा के हिसाब से जो ज्ञान,शिक्षा उन्हें मिलनी चाहिए वो 100% मिलेगी ।
हमारा विद्यालय किसी अन्य विद्यालय से नहीं
सिर्फ समय ,स्थिति ,ओर क्लास से कंपीटिशन करता है जिससे बच्चा समय , स्थिति,ओर क्लास में बेहतर ओर सफल हो।
आप सभी अभिभावक बंधुओं से विशेष रूप से निवेदन है कि एक बार आप हमे अपने बच्चों की जिम्मेदारी अवश्य दे ताकि हम आपको यह बता सकें कि वास्तविकता में पढ़ाई क्या होती है ओर बच्चे अपने आप कैसे पढ़ते है।
धन्यवाद
राम राम जय श्री राधे जी