16/05/2023
एक है- अलका तोमर ( महिला पहलवान)
मेरठ के गांव सिसौली की अलका तोमर वो पहलवान हैं जिसे भारत में महिला कुश्ती का ट्रेंड सेटर या नीव रखने वाला कहा जाता है।
ये पहली महिला पहलवान थी जिन्होंने अंतराष्ट्रीय कुश्ती में भारत के लिए पदक जीते।
बल्कि वर्ल्ड चैंपियनशिप में 40 साल में कोई पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी थीं, पुरुष और महिला मिलाकर।
इन्होने बहुत संघर्ष कर के सफलता हासिल की थी. इनके गांव, परिवार में कुश्ती का कोई माहौल नहीं था. द्रोणाचार्य अवार्ड विजेता कोच जबर सिंह सोम ने इनको पहलवान बनाया।
ये उस समय लगातार भारत के लिए मैडल पर मैडल ला रहीं थीं ज़ब भारत में कुश्ती के लिए सुविधाए बहुत कम थीं।
ये हरियाणा कि नहीं थी और ना ही जाट थी. इसलिए इन्हे कभी कोई संस्थागत सपोर्ट नहीं मिला।
जब तक इन्होने पहलवानी करी ये भारत की नंबर 1 महिला पहलवान रहीं।
2012 ओलिंपिक में भारत की नंबर 1 पहलवान होने के कारण भारतीय कोटे पर इनका हक़ था लेकिन एक इंजरी के कारण ये क्वालीफाई टूर्नामेंट में नहीं खेल पाई. उस समय के नियम के अनुसार इन्हे ट्रायल मिलना चाहिए था. लेकिन इनके लगातार गुहार लगाने के बावजूद जाट लॉबी ने गीता फोगाट के लिए ये नियम फॉलो नहीं होने दिया और इनकी जगह भारतीय कोटे से गीता फोगाट गई।
ये और बात है कि बाद में सुशील कुमार और नरसिंह यादव के मामले में तब नियम ना होने के बावजूद ट्रायल करवाने के लिए धरती आसमान एक कर दिया।
गीता फोगाट को अलका तोमर हर बार हरा चुकी थीं. एक बार तो गीता बेहोश हो गई थी।
गीता फोगाट ओलम्पिक में पहले ही राउंड में हार गई और जिससे हारी उसने गोल्ड मैडल जीता. उस कनाडा की पहलवान को अलका तोमर कॉमन वेल्थ में हरा चुकी थीं।
इस विवाद के दौरान भी ब्रजभूषण शरण फ़ेडरेशन का अध्यक्ष था. उस समय लगा था कि समाज नहीं तो प्रदेश के नाम पर ब्रजभूषण अलका तोमर का साथ देकर न्याय दिलाएगा लेकिन इसने उस वक्त जाट लॉबी का साथ दिया।
तभी से ब्रजभूषण फोगाट परिवार का करीबी था।
बाद में फोगाट बहनो पर दंगल फ़िल्म बनी जिस कारण ये फोगाट बहनें लोकप्रिय हो गईं और अरबपति बन गईं. जबकि अलका तोमर के मुकाबले इन्होने कोई विशेष उपलब्धि हासिल नहीं की।
अलका तोमर की कहानी बहुत ज्यादा संघर्षपूर्ण थी. लेकिन उनपर कोई फ़िल्म नहीं बनी इसलिए आज बहुत कम लोग उन्हें जानते हैं और सामान्य जिंदगी जी रहीं हैं।