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23/06/2024

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19/06/2024
 #निवेदन - स्कूल जाने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों तक पहुँचायें1. शाम 8:00 बजे तक टीवी बंद कर दें। टीवी पर आठ बजे के बाद...
02/10/2022

#निवेदन - स्कूल जाने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों तक पहुँचायें

1. शाम 8:00 बजे तक टीवी बंद कर दें। टीवी पर आठ बजे के बाद आपके बच्चे से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता है।

2. अपने बच्चे की स्कूल डायरी देखने के लिए 30-45 मिनट निकालिए। उसके गृहकार्य पूरे कराइये।

3. रोज सभी विषयों में उनका प्रदर्शन देखिए उन विषयों का खास ध्यान रखिए जिसमें वह अच्छा नहीं कर रहा है।

4. उनकी बुनियादी शिक्षा भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

5. उन्हें रात को 10:00 बजे तक सोने और सुबह 6:00 बजे उठने की आदत डालिए।

6. अगर आप किसी पार्टी/सामाजिक आयोजन में जाते हैं और बच्चों के साथ देर रात तक लौटते हैं तो अगले दिन बच्चे को आराम करने दीजिए (स्कूल मत भेजिए) अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अगले दिन स्कूल जाए तो रात 10:00 बजे तक घर लौट आइए।

7. अपने बच्चे में पौधे लगाने और उनका ख्याल रखने की आदत का विकास कीजिए।

8. *सोने के समय अपने बच्चों को वीर शिवाजी, डॉ बी आर अम्बेडकर, सावित्री बाई फुले ज्योतिबा फुले की जीवन गाथा और संघर्ष की कहानियां जरूर सुनाए*

9. हर साल गर्मी की छुट्टी में (अपने बजट के अनुसार ) कहीं घूमने जाइए। इससे वे अलग लोगों के साथ और अलग जगहों पर रहना सीखते हैं।

10. अपने बच्चे की प्रतिभा का पता लगाइए और उसे इसको निखारने में सहायता कीजिए (वह किसी विषय, संगीत, खेल, अभिनय, चित्रांकन, नृत्य आदि में दिलचस्पी रख सकता है)। इससे उसका जीवन आनंददायक हो जाएगा।

11. उसे सिखाइये कि प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना चाहिए (कम से कम गर्म चीजें प्लास्टिक में उपयोग न करें )।

12. हर रविवार कोशिश कीजिए कि खाने की कोई ऐसी चीज बनाएं जो उन्हें पसंद है। उन्हें इसमें अपनी मदद करने के लिए कहिए (उन्हें अच्छा लगेगा)।

13. प्रत्येक बच्चा जन्म से वैज्ञानिक होता है उसके पास ढेरों सवाल होते हैं मुमकिन है हम जवाब न दे पायें पर जानकारी न होने के कारण हमें सवाल पर गुस्सा नहीं दिखाना चाहिए (उत्तर पता करने की कोशिश कीजिए और उन्हें बताइए)।

14. उन्हें अनुशासन और जीने के बेहतर तरीकों के बारे में बताइए। ( सही गलत के बारे में समझाइए )

15. दाखिले के लिए किसी स्कूल के सर्वश्रेष्ठ होने संबंध में निर्णय ( कॉरपोरेट स्कूल या पास प्रतिशत ज्यादा होने या परिचितों, पड़ोसियों की सिफारिश या सरकारी स्कूल या कम बजट वाला स्कूल होने के आधारहोने के आधार पर मत कीजिए ) । सबसे अच्छा स्कूल वह है जो आपके बजट के लिहाज से उपयुक्त हो। भविष्य में आपको बच्चे की शिक्षा पर ज्यादा खर्च करने की जरूरत है। इसलिए आपको आज कुछ पैसे बचाने की जरूरत है। इसके अलावा दूसरे खर्चे तो हैं ही। इसलिए योजना सोच समझकर बनाइए।

16. उनमें खुद पढ़ने और सीखने की आदत डालिए।

17. उन्हें मोबाइल फोन का उपयोग न करने दिया जाए, आवश्यक होने पर अपनी देख-रेख में ही मोबाइल का उपयोग करने दिया जाए।

18. बच्चे को अपने काम में सहायता करने के लिए कहिए। (इसमें खाना बनाना, सफाई,चीजों को व्यवस्थित करना शामिल है।)

19. और सबसे महत्त्वपूर्ण कि हमें अपने बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार भी देने चाहिए ताकि वो जीवन में सफल और सही इन्सान बन सके।

हमें अपने अनुभव के आधार पर अपने बच्चों का जीवन सुंदर और स्वस्थ बनाने में उनकी सहायता करना चाहिए।
🙏 🙏

श्रेय - सोनी शाही जी
दिनांक - ०१.१०.२०२२
--- #राज_सिंह---

Congratulations all....
02/05/2022

Congratulations all....

14/10/2020
Scoop whoop hindi  से साभारभारतीय गणितज्ञ द्वारा खोजे गए '6174' को आख़िर मैजिकल नंबर क्यों कहा जाता है?आख़िर ये संख्या क्य...
11/08/2020

Scoop whoop hindi से साभार

भारतीय गणितज्ञ द्वारा खोजे गए '6174' को आख़िर मैजिकल नंबर क्यों कहा जाता है?

आख़िर ये संख्या क्यों इतनी मैजिकल है? इसे समझने के लिए आगे बताए जा रहे कुछ दिलचस्प तथ्यों को देखिए. चलिए आख़िर '6174' को Mysterious Number यानि कि जादुई संख्या क्यों कहा जाता है वो भी जान लेते हैं-

उदाहरण के लिए आप अपने मन से 4 अंकों की कोई भी संख्या चुनिए, लेकिन ध्यान रहे कि कोई भी अंक दोबारा न आए.

उदाहरण के लिए 1234 ले लेते हैं-

अब इन्हें घटते क्रम में लिख लेते हैं- 4321
फिर इन्हें बढ़ते क्रम में लिख लेते हैं- 1234
अब बड़ी संख्या से छोटी संख्या को घटा दें- (4321 - 1234) = 3087
अब नतीजे में मिली संख्या को घटते क्रम में लिख लें- 8730
फिर नतीजे में मिली संख्या को बढ़ते क्रम में लिख लें- 0378
अब बड़ी संख्या में से छोटी संख्या को घटा दीजिए- (8730 - 0378) = 8352
अब नतीजे में मिली संख्या को घटते क्रम में लिख लें- 8532
फिर नतीजे में मिली संख्या को बढ़ते क्रम में लिख लें- 2358
अब बड़ी संख्या में से छोटी संख्या को घटा दीजिए- (8532 - 2358) = 6174 (मैजिकल नंबर)

अब मैजिकल नंबर '6174' को भी ऊपर की प्रक्रिया की तरह ही को दोहराए.
यानी की बढ़ते और घटते क्रम में रखने के बाद इसे घटाएं.(7641-1467) = 6174 जैसा कि आप देख सकते हैं, प्रक्रिया दोहराने के बाद उत्तर '6174' ही आ रहा है. आप चाहें तो इसे आगे भी दोहरा सकते हैं लेकिन नतीजा '6174' ही मिलेगा.

चलिए अब कोई दूसरी संख्या 2005 को ले लेते हैं. अब इसके साथ भी ऊपर दी गई प्रक्रियाएं दोहराइये-5200 - 0025 = 5175
7551 - 1557 = 5994
9954 - 4599 = 5355
5553 - 3555 = 1998
9981 - 1899 = 8082
8820 - 0288 = 8532
8532 - 2358 = 6174
7641 - 1467 = 6174अब आप ख़ुद देख सकते हैं, चाहे कोई भी 4 अंकों की संख्या चुन लें अंतिम नतीजा '6174' ही मिलेगा. इस फ़ॉर्मूले को कैप्रेकर्स कॉन्स्टेंट कहते हैं.

News 18  से साभारआज ही के दिन भारत की खोज पर निकला था कोलंबस, गलती से पहुच गया विंडीजजब समुद्र के जरिए व्यापार (Trade by...
07/08/2020

News 18 से साभार
आज ही के दिन भारत की खोज पर निकला था कोलंबस, गलती से पहुच गया विंडीज
जब समुद्र के जरिए व्यापार (Trade by sea rout) और आवागमन शुरू हुआ तो यूरोप के जहाजियों का एक ही सपना होता था-भारत पहुंचना, क्योंकि उस समय दुनियाभर में भारत के मसालों की बहुत ख्याति थी. 3 अगस्त 1492 को क्रिस्टोफर कोलंबस (christopher columbus) भारत की खोज पर निकला. हालांकि वो भारत की जगह अमेरिकी द्वीपों की ओर पहुंच गया.इटली (Italy) का नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस (christopher columbus) आज ही के दिन भारत के समुद्री रास्ते की खोज (Discover of India by sea rout) पर निकला था. इस बात को तो सभी जानते हैं कि कोलंबस ने 1492 में अपनी यात्रा की शुरुआत की थी. लेकिन इसकी जानकारी कम ही लोगों को है कि वो तारीख 3 अगस्त की थी. 3 अगस्त 1492 को क्रिस्टोफर कोलंबस भारत की खोज पर निकला और गलती से उसने अमेरिकी द्वीप खोज लिए.कोलंबस ने अमेरिकी द्वीपों को ही भारत मान लिया और उसे इंडीज का नाम दे दिया. कोलंबस गलत था. लेकिन पूरी जिंदगी वो इसी गलती के साथ जिया कि उसने भारत को खोज निकाला है. अपनी मौत तक उसे ये जानकारी नहीं हो सकी कि दरअसल वो अमेरिकी द्वीपों को भारत समझ रहा है.

कोलंबस के समुद्री सफर की बड़ी ही रोचक दास्तान है.

क्रिस्टोफर कोलंबस का जन्म 1451 में जिनोआ में हुआ था. उसके पिता जुलाहे थे. बचपन में कोलंबस अपने पिता के काम में मदद किया करता था. बाद में जाकर उसे समुद्री यात्राओं का चस्का लग गया और इसी को उसने अपना रोजगार बना लिया.कोलंबस के वक्त में यूरोप के व्यापारी भारत समेत एशियाई देशों के साथ व्यापार किया करते थे.

जमीन के रास्ते आकर वो यूरोपिय देशों को अपना माल बेचते और यहां से मसाले वगैरह अपने साथ ले जाते. व्यापार का रास्ता ईरान और अफगानिस्तान से होकर निकलता था. 1453 में इस इलाके में मुस्लिम तुर्कानी साम्राज्य स्थापित हो गया, जिसने यूरोपिय व्यापारियों के लिए ये रास्ते बंद कर दिए. एशियाई देशों के साथ यूरोप का व्यापार बंद हो गया. यूरोप के व्यापारी परेशान हो गए.

इसी दौर में कोलंबस के मन में समुद्र के रास्ते भारत जाने का विचार आया. ये किसी को पता नहीं था कि वहां से भारत कितनी दूर है और किस दिशा में सफर करने पर भारत पहुंचा जा सकेगा. कोलंबस को अपने ज्ञान पर भरोसा था. उसे यकीन था कि समुद्र में पश्चिम के रास्ते निकला जाए तो भारत पहुंचा जा सकता है. लेकिन उसकी इस बात पर यकीन करने वाला कोई नहीं था.

कोलंबस को इस सफर के लिए बहुत सारे पैसे और बहुत सारे नाविक चाहिए थे. अपने विचार को लेकर वो पुर्तगाल के राजा के पास गया. लेकिन राजा ने उसके सफर का खर्च उठाने से इनकार कर दिया. इसके बाद स्पेन के शासकों ने उसकी बात गौर से सुनी और यात्रा का खर्च उठाने को तैयार हो गए.

यात्रा के खर्च का इंतजाम हो जाने के बाद भी कोलंबस की मुश्किलें खत्म नहीं हुई. उसे अपने साथ जाने के लिए कोई नाविक नहीं मिल रहा था. किसी नाविक को कोलंबस की बातों पर यकीन नहीं था. उस वक्त लोगों को लगता था कि धरती टेबल की तरह चपटी है और वो समुद्र के लंबे सफर पर निकलेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा कि समुद्र खत्म हो जाएगा और वो कहीं नीचे गिर जाएंगे.बड़ी मुश्किल से कोलंबस ने अपने साथ जाने के लिए 90 नाविकों को तैयार किया. 3 अगस्त 1492 को कोलंबस ने तीन जहाजों- सांता मारिया, पिंटा और नीना के साथ स्पेन से अपने सफर की शुरुआत की.

कई हफ्ते गुजर गए लेकिन सफर खत्म नहीं हुआ. दूर-दूर तक फैले समंदर में जमीन का नामो निशान नहीं दिख रहा था. कोलंबस के साथ गए नाविक घबराने लगे.उसके कई साथी वापस लौटने की बात कहने लगे लेकिन कोलंबस अपनी बात पर अड़ा रहा. हालत ऐसी हो गई कि नाविकों ने कोलंबस को धमकी देने शुरू कर दी कि अगर वो वापस लौटने को राजी नहीं हुआ तो वेलोग उसको मार डालेंगे. कोलंबस ने किसी तरह से उन्हें समझाबुझाकर कुछ दिन और सफर करने पर राजी कर सका.

9 अक्टूबर 1492 को कोलंबस को आसमान में पक्षी दिखाई देने लगे. उसने जहाजों को उसी दिशा में मोड़ने का आदेश दिया जिधर पक्षी जा रहे थे. 12 अक्टूबर 1492 को कोलंबस के जहाजों ने धरती को छुआ. कोलंबस को लगा कि वो भारत पहुंच चुका है. लेकिन दरअसल वो बहामास का आइलैंड सैन सल्वाडोर था. वहां के निवासी उसे गुआनाहानी कहते थे.

15 मार्च 1493 को कोलंबस स्पेन वापस पहुंचा. वहां उसका भव्य स्वागत हुआ. स्पेन के राजा ने उसे ढूंढ़े हुए देशों का गवर्नर बना दिया. इसके बाद भी अपनी मौत से पहले तक कोलंबस ने तीन बार अमेरिकी द्वीपों की यात्रा की. अपने आखिरी वक्त तक उसे ये नहीं पता था कि उसने जिन इलाकों की खोज की है वो भारत नहीं बल्कि अमेरिकी द्वीप हैं.

29/06/2020
क्या सूरज की खामोशी लाएगी पृथ्वी पर हिम युग', नासा वैज्ञानिकों ने दिया जवाबकुछ दिन पहले ही पता चला था कि सूर्य की सतह पर...
21/05/2020

क्या सूरज की खामोशी लाएगी पृथ्वी पर हिम युग',
नासा वैज्ञानिकों ने दिया जवाब

कुछ दिन पहले ही पता चला था कि सूर्य की सतह पर असामान्य शांति है. आमतौर पर सूर्य की सतह पर काफी हलचल होती रहती है और कई बार तो सूर्य की सतह से खतरनाक तरंगें तक निकलने लगती है, जिन्हें सौर तूफान (Solar stroms) कहा जाता है. लेकिन फिलहाल ये सूर्य पर शांति है. एक अध्ययन से पता चला है कि इससे पहले इस तरह की शांति सूर्य पर करोड़ों साल पहले हिम युग (Ice Age) में आई थी.

क्या होता है सूर्य की सतह पर हलचल से

सूर्य की सतह पर होनी वाली हलचल से सौर ज्वाला या सौर तूफान बनते हैं, लेकिन इनके साथ ही बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा भी निकलती है जो चुंबकीय और रेडियो तरंगों के रूप में निकलती है लेकिन. इन खतरनाक तरंगों से पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) हमारी रक्षा कर लेता है और हमें पता नहीं चलता. इस तरह के सौर तूफान (Solar stroms ) कई तरह के प्रभाव छोड़ते हैं.

कैसे पता चल रहे हैं हमें सूर्य के बदलाव

हमारे सूर्य में इतनी ताकत है कि वह अपने से लाखों करोड़ों किलोमीटर दूर स्थित ग्रहों की कक्षा को नियंत्रित करता है. इसमें काफी सक्रियता होती है और बदलाव भी होते रहते हैं. हमने विभिन्न तारों की अलग-अलग अवस्थाओं का अध्ययन कर यह पता लगाया है कि सूर्य आज जिस स्थिति में हैं वह वहां कैसे पहुंचा होगा. अब हम यह अनुमान लगाने में भी सक्षम होते जा रहे हैं कि सूर्य में आने वाले सालों में किस तरह के बदलाव होंगे, या किन बदलवों में कितना समय लगेगा.

किस खास दौर से गुजर रहा है सूर्य

इस समय सूर्य एक खास दौर से गुजर रहा है. इस सक्रिय दौर को सोलर मिनिमम (solar minimum.) कहा जाता है. वैज्ञानिकों ने लंबे समय से किए शोध के आधार पर यह भी पता लगा लिया है कि यह दौर सूर्य में हर 11 साल बाद आता है. हर 11 साल में एक बार उसकी ऊर्जा संबंधी गतिविधियां चरम पर होती हैं और एक बार न्यूनतम होती हैं.

क्या होता है सूर्य की सतह पर

चरम अवस्था में सूर्य पर धब्बे (Sun Spots) या फिर सौर तूफान (Solar Storms/Solar flares ) दिखाई देते हैं, लेकिन सोलर मिनिमम में सूर्य बहुत शांत दिखाई देता है, या बेहतर तरीके से कहें तो सूर्य की सतह शांत दिखाई देती है और ऐसे में सूर्य पर बहुत ही कम धब्बे या सौर तूफान दिखाई देते हैं. इसके अलावा सूर्य की सतह से निकलने वाली ऊर्जा भी कम हो जाती है.

अभी है सूर्य पर खास स्थिति

फिलहाल जो सूर्य की स्थिति है उसे नासा के वैज्ञानिक “ग्रैंड सोलर मिनिमम” (Grand Solar Minimum) कह रहे हैं. इससे पहले यह 1650 और 1715 के बीच में हुआ था. वैज्ञानिक इसे पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध की लघु हिम युग (Little Ice Age) का दौर मानते हैं. इस दौरान सौर गतिविधियों में कमी और ज्वालामुखी के एरोसोल्स के ठंडे होने के योग से उत्तरी गोलार्ध की सतह का तापमान कम होने लगा था.

तो क्या अब फिर आएगा हिम युग

वैज्ञानिकों का कहना है नहीं. उनके अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी पर एक और हिम युग नहीं आ पाएगा. नासा क वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के कारण जो गर्मी पैदा हुई है वह उससे छह गुना ज्यादा जो ठंडक लंबे ग्रैंड सोलर मिनिमम से दशकों तक हो पाएगी. अगर ऐसी स्थिति एक सदी तक भी रही तो भी दुनिया का तापमान कम नहीं होगा.
साभार news 18

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