Anand Shishu Niketan

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18/03/2026
07/02/2026

Admission Open for 2026- 27
We are hiring......

29/11/2023

शुद्र, वैश्य, क्षेत्रीय, ब्राह्मण ----ये चार व्यक्तित्व के ढंग है। ओशो

शूद्र वह है,,,
जो परम आलस्य से भरा है।
जिसे कुछ करने की इच्छा नहीं है।
कुछ होने की इच्छा नहीं है।
खाना मिल जाये, वस्त्र मिल जायें, बस काफी है।
वह जी लेगा। और जो इस तरह जी रहा है, वह शूद्र है।

तुममें से अधिक लोग शूद्र की भांति जी रहे हैं।
तुम किसी और को शूद्र मत कहना।
तुम क्या कर रहे हो?
खाना-कपड़े, इनको कमा लेना। रात सो जाना, सुबह उठ कर फिर कमाने में लग जाना।

जन्म से लेकर मृत्यु तक तुम्हारी प्रक्रिया शूद्र की है।
इसलिए मनु कहते हैं कि हर आदमी शूद्र की भांति पैदा होता है। सब आदमी शूद्र की भांति पैदा होते हैं। ब्राह्मणत्व तो एक उपलब्धि है।

दूसरा वर्ग है,,,
जिसके लिए जीवन लग जाये
लेकिन धन इकट्ठा करना है, पद इकट्ठा करना है,
वह वैश्य है।

चाहे सब खो जाये, आत्मा बिक जाये उसकी, कोई हर्जा नहीं है, लेकिन तिजोरी भरनी चाहिए।
आत्मा बिलकुल खाली हो जाये, लेकिन तिजोरी भरी होनी चाहिए। बैंक-बैलेंस असली परमात्मा है।
धन असली धर्म है। वह भी तुम्हारे भीतर है।
उसको मनु ने वैश्य कहा है।

इस वैश्य शब्द को थोड़ा सोचो।

जो स्त्री अपने शरीर को बेचती है, उसे हम वेश्या कहते हैं। और जो अपनी आत्मा को बेचता है उसे मनु ने वैश्य कहा है। वह वेश्या से बुरी हालत में है।

एक तीसरा वर्ग है,,,
जिसकी जिंदगी में अहंकार के सिवाय और कुछ भी नहीं है। जो किसी भी तरह, ‘मैं सब कुछ हूं’, बस, इस मूंछ पर ही ताव देता रहता है। वह क्षत्रिय है।

वह हमेशा तलवार पर धार रखता रहता है। उसको अहंकार के सिवाय कोई रस नहीं। धन जाये, जीवन जाये, सब दांव पर लगा देगा।
लेकिन दुनिया को दिखा देगा, कि मैं कुछ हूं। ना-कुछ नहीं। वह एक वर्ग है।

और
एक चौथा वर्ग है,,,,
जो सिर्फ ब्रह्म की तलाश में है।
जो कहता है: सब व्यर्थ है।

न तो आलस्य का जीवन अर्थपूर्ण है, क्योंकि वह प्रमाद है। होश चाहिये। न धन के पीछे दौड़ अर्थपूर्ण है, क्योंकि वह कहीं भी नहीं ले जाती। उससे कोई कहीं पहुंचता नहीं। धन तो मिल जाता है, आत्मा खो जाती है।

नहीं, ब्रह्म से कम पर राजी नहीं होना है।

ब्राह्मण कहता है--तुम कुछ भी नहीं हो, तभी तो जीवन का परम धन उपलब्ध होगा।
जब तुम नहीं रहोगे, तभी तो ब्रह्म उतरेगा।

आलस्य तोड़ना है शूद्र जैसा;
धन की दौड़ छोड़नी है वैश्य जैसी;
अहंकार छोड़ना है क्षत्रिय जैसा;
तब कभी कोई ब्राह्मण हो पाता है।

ये चार व्यक्तित्व के ढंग हैं।
ऐसे चार तरह के लोग हैं जमीन में।
इन चार में तुम बराबर बांट लोगे।
पांचवां आदमी तुम न पाओगे।

और चार से कम में भी काम न चलेगा, तीन से भी काम न चलेगा। इसलिए दुनिया में जितने भी मनुष्यों को बांटने के प्रयोग हुए हैं, सबने चार में बांटा है।

ओशो...दीया तले अंधेरा
*संकलन-रामजी
Sabhar

16/08/2023

काम पूरा नही हुआ है.... मैं फिर आऊंगा..

भारत जमीन का टुकड़ा नहीं,
जीता जागता राष्ट्रपुरुष है।
हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है,
पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं।
पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघायें हैं।
कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है।
यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है,
यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है।
इसका कंकर-कंकर शंकर है,
इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है।
हम जियेंगे तो इसके लिये
मरेंगे तो इसके लिये।
पूज्य अटल जी को नमन

शब्द जब यात्रा करते हैं.......शब्द जब एक मन से दूसरे मन की यात्रा करते है तो उनके अर्थ थोड़े अलग हो जाते हैं। ...लेकिन..श...
15/08/2023

शब्द जब यात्रा करते हैं.......
शब्द जब एक मन से दूसरे मन की यात्रा करते है तो उनके अर्थ थोड़े अलग हो जाते हैं। ...
लेकिन..
शब्द जब किसी एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति की यात्रा करते है तो उनका स्वरूप तो बदलता है साथ साथ उनके निहितार्थ भी बदल जाते हैं।..
पिछले कुछ दिनों से प्रेम पर विमर्श चल रहा है...
इसमे कुछ बुद्धिजीवी लोगो को भी जिनका मैं आदर करता हूँ उनको भी कूदते हुए देखा तो बहुत दुःख हुआ।

इस क्रम में जाने अनजाने सनातन संस्कृति के प्रेम को अंग्रेजी लव और फारसी इश्क के साथ मिलाने का प्रयास भी हो रहा है।..उससे दुखद ये रहा कि प्रेम को की सही व्याख्या करने के बजाय उसे लम्पटता और उच्श्रृंखलता बनाकर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया।..
खैर ये जिनका विषय है वो समझे ... लेकिन आज 74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मैं चाहूंगा कि भारत के लोग स्वतंत्रता और independence के बीच के अंतर को जरूर समझें।
स्वतंत्रता शब्द बना है..... स्व और तंत्र से जिसका अर्थ है अपने अधीन होना। अर्थात आप अपने आत्मबोध के अधीन हैं ।
भारतीय मनीषा सदैव से ही धर्म और अधर्म का भेद समझती रही है... उचित को ग्रहण कर अनुचित का त्याग करती रही है।
अतः स्वतंत्र होना अपने आप ही व्यक्ति को दायित्वबोध कराता है।
जबकि अंग्रेजी के indepndence का अर्थ अन तंत्र होना। अर्थात किसी भी बोध से इसका कोई लेना देना नही है... इसमे उचित अनुचित का भान नही है.....
इसलिए कृपा करके मुझे indepence day की wishes न भेजें।
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं भेजें।
ईश्वर करें हमारी मातृ भूमि सदैव ही स्वस्थ रहे खुशहाल रहे।
आप सभी मित्रों को 74वें स्वतंत्रता दिवस पर बहुत बहुत शुभकामनाएं .....
🙏🙏🙏
जय हिंद
वंदे मातरम

Admission Open for new session 2023-24.Building under construction (new computer lab , common activity room and library....
13/01/2023

Admission Open for new session 2023-24.
Building under construction (new computer lab , common activity room and library.)

Send your CV ..  INTERVIEW AND DEMO STARTS FROM 15th january 2023.
21/12/2022

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Looking for trend graduate teachers(tgt) with good communication skill and having command over subjects like english and...
18/04/2022

Looking for trend graduate teachers(tgt) with good communication skill and having command over subjects like english and computer ,Salary negotiable.
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