15/08/2025
रमता राम भजन गुण गईह
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वन में जाई पात जनि तुरिह
जनि वृक्षा के सतईह
पात- पात में बसत महादेव
उनहूँ के सीस झुकईह
रमता राम भजन गुण गईह
कण कण में श्रीराम बसत है
त्याग भाव से उपभोग तू करिह
ना तहार कुछ ना हमार कुछ
कवनो धन के लोभ जनि करिह
रमता राम भजन गुण गईह
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई कहिके
आपस मे जनि लड़िह
सब घट भीतर राम रमत बाड़े
उनही के दर्शन करिह
रमता राम भजन गुण गईह
राम रहीमा एके हवे
उनका में भेद जनि करिह
नाम, रूप, लीला में जनि भूलिह
एक के तू पहचनीह
रमता राम भजन गुण गईह
जीव हिंसा कबहुँ जनि करिह
हरदम दया भाव तू रखिह
नफरत त्याग प्रेम के धारा
जगत में तू बहईह
रमता राम भजन गुण गईह
"अनुभव दास" के बिनती ई बाटे
खुद बिचार तू करिह
आतम राम अउर शरीर के
भेद जाने के प्रयास तू करिह
रमता राम भजन गुण गईह
मंदिर - मस्जिद - गिरजाघर गुरुद्वारा
आपस मे बैर जनि करिह
सबका भीतर उ बइठल बाड़े
उहवाँ तू दर्शन करिइह
रमता राम भजन तू गईह
© पं ब्रजकिशोर अनुभव दास
दिव्य ज्ञान धारा