दिव्य ज्ञान धारा

दिव्य ज्ञान धारा पंडित ब्रजकिशोर .कबीर मर्मज्ञ एवं वेद, उपनिषद,पुराण , के ज्ञाता।

आज पिता जी का जन्मदिन है। 77 वें साल में प्रवेश कर गए। आप हमेशा स्वस्थ रहें जीवन पर्यन्त आपका आशीर्वाद हम लोगों को मिलता...
02/10/2025

आज पिता जी का जन्मदिन है। 77 वें साल में प्रवेश कर गए। आप हमेशा स्वस्थ रहें जीवन पर्यन्त आपका आशीर्वाद हम लोगों को मिलता रहे आज के दिन यही कामना है।‌ 🎉🎂🙏
आपको दिव्य ज्ञान धारा परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं जन्मदिन की 🙏💐

दीया अउरु बाती ___________________________सुकृत के तेल लेइ सत्य के बाती हो दाया के दियना जराव हो संघतिया ब्रम्भ के अगिनि...
19/09/2025

दीया अउरु बाती
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सुकृत के तेल लेइ सत्य के बाती हो
दाया के दियना जराव हो संघतिया
ब्रम्भ के अगिनि लेई के दियना जराव तुहूँ
चारू ओरी रोशनी फैलाव दिन रतिया
दाया के दियना जराव हो संघतिया...

काम क्रोध मद्द लोभ के फइलल बा अन्हरिया हो
प्रेम नगरिया के लउकत नईखे हो डगरिया
ज्ञान के प्रकाश जब होई घट भितरा हो
अज्ञान के मिट जईहे सकलो अन्हरिया हो
दाया के दियना जराव हो संघतिया....

प्रेम नगरिया में लागल बा बजरिया हो
सद्गुरु खोलले बाड़े नाम के दोकनिया हो
निरखि परखि तुहूँ नाम के सौदा करs
हिय बिचवा जतन से राखs हो संघतिया
दाया के दियना जराव हो संघतिया...

स्वांसा सार सद्गुरु दिहले तहरा के
जिनगी के असल मे इहे ह निसनिया
जनमत साँस के देखे ला सब केहू
मरलो पर साँस के देखे सारी दुनिया
दाया के दियना जराव हो संघतिया...

साँस पर नाम के सुमिरन कई लेहु
गहि लेहु सद्गुरु के अब तू चरनिया
अनुभव दास के बतिया तुहूँ मानी लेहु
एक सतनाम बाड़े तहरो संघतिया
दाया के दियना जराव हो संघतिया...
सुकृत के तेल लेइ सत्य के बाती हो
दाया के दियना जराव हो संघतिया...
पं ब्रजकिशोर अनुभव दास
दिव्य ज्ञान धारा

दिलवे में खोजs..._______________________दिलवे में खोजs तुहूँ दिलवे में खोजsदिलवे में बइठल बाड़े राम रहिमाना अयोध्या काशी ...
17/09/2025

दिलवे में खोजs...
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दिलवे में खोजs तुहूँ दिलवे में खोजs
दिलवे में बइठल बाड़े राम रहिमाना
अयोध्या काशी अउरी मथुरा में खोजलs
सम्भल के बनवले बाड़ वोट के खजाना
दिलवे में खोजs...
चली गईले कुम्भकरण अउरु रावण
चारू भइया चली गईले राम लक्षमना
दिलवे में खोजs...
कंस अउरु किशन दुनो चली गईले
दुरियोधन और परीक्षित बाद में पछताना
दिलवे में खोजs...
धरती , आकाश , पवन अउरु पानी
चांद सुरुज के ना रहीहें ठिकाना
दिलवे में खोजs...
अखियां से जवन कुछु लउकत बाटे
मिटी जईहे एक दिन सबकर निशाना
दिलवे में खोजs...
कण कण में त राम रमत बाड़े
लक्ष बाड़े राम उहवाँ मनवा के लगाना
दिलवे में खोजs...
राम लक्षमन जब एक होई जईहे
खुली जाईहें दसवाँ द्वार
मिल जाईहें खजाना
दिलवे में खोजs...
'अनुभव दास' पुकार कहे ले
राम के नउआ हवे सतनामा
दिलवे में खोजs तुहूँ दिलवे में खोजs
दिलवे में बइठल बाड़े राम रहिमाना
©पं ब्रजकिशोर अनुभव दास दिव्य ज्ञान धारा

घर ही में पियवा हेराई गईले हमरो..._______________________________घर ही में पियवा हेराई गईले हमरो होबहरी हम खोजी दिन रतिय...
12/09/2025

घर ही में पियवा हेराई गईले हमरो...
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घर ही में पियवा हेराई गईले हमरो हो
बहरी हम खोजी दिन रतिया हो सखिया
मंदिर में गईनी मूरति हम देखनी
देखनी हम पंडित पूजरिया हो सखिया
पत्थर के काटी छाटी मूरति जे बनवले रहे
हाथ जोड़ी बिनती करेले मोर सखिया
पत्थर के देवी देवता
पत्थर के भगवान भइले
पत्थर में सब ज्ञान समइले हो सखिया
मस्जिद में जाई हम मौलवी के देखनी
अल्लाह के शीस झुकावत रहले सखिया
ज़रा ज़रा में अल्लाह के ही नूर बाड़े
बिस्मिल्लाह कही जीव बद्ध करावसु हो सखिया
हिन्दू मारेले झटका मुसलमान हलाल करसु
दुनो घर अगिया लागल बा हो सखिया
चारू ओरी घोर अन्हरिया भईल बाटे
आन्हर भइले हमरो नज़रिया हो सखिया
जुगन जुगन से खोजी हारी जब गईनी हम
गुरू जी के सरन में गईनी हो सखिया
गुरु जी के दाया अउरू साधु लोग के संगत से
लउके लागल पूनम के अंजोरिया हो सखिया
घर ही में पिया के दरस जब भइले
बुझी गईली जुगन के पियासिया हो सखिया
एक से अनेक भइनी अनेकता में फंसी गईनी
अब त चारू ओरी एक ही लउकत बा हो सखिया
अनुभव दास कहत बाड़े सबका से
अपने मे सबका के देखs हो सखिया
© पं ब्रजकिशोर अनुभव दास
दिव्य ज्ञान धारा

अबहुँ से जागs आतम राम______________________अबहुँ से जाग आतम राम हो तू अबहुँ से जागsआतम राम तू कहिया ले सुतबsमोह निसा से ...
29/08/2025

अबहुँ से जागs आतम राम
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अबहुँ से जाग आतम राम हो तू
अबहुँ से जागs
आतम राम तू कहिया ले सुतबs
मोह निसा से जागs हो
मोह माया संग ई मन बनिया
तहरो सँगवा में लागल हो
तू अबहुँ से जागs....
पांच पच्चीस के बनवलस जेल खाना
जामे तहरा के राखलs हो
नव दरवाजा खोल के रखलस
दसवाँ बन्द करवलस हो
तू अबहुँ से जागs....
पांच विषय के जहर पिया के
सारा धन लूट लिहलस हो
काम क्रोध मद लोभ के आगी में
तहरा के जरवलस हो
तू अबहुँ से जागs....
बांड़ी अरबो खरब बना के
जामे तहरा के फाँसल हो
नाम रूप में तू फंसी गईल
धर्म अनेक बनावल हो
तू अबहुँ से जागs....
सद्गुरु कृष्ण गीता में कहले
सब धरम छोड़s के आवs हो
हमारा शरण मे आके अब तू
सत्य राह के पावs हो
तू अबहुँ से जागs....
बिना गुरु कृपा अउरी साधु के संगत
ज्ञान वैराग्य ना जागी हो
बिन सत्संग विवेक ना होई
भरम कबहुँ नाहि भागी हो
तू अबहुँ से जागs....
अनुभव दास पुकारी कहले
जगत पीठ देई भागs हो
तू अबहुँ से जागs.....
अबहुँ से जागs आतम राम हो
तू अबहुँ से जागs
©पं ब्रजकिशोर अनुभव दास
दिव्य ज्ञान धारा

दुविधा दूर बहाई दिहलsपरमब्रह्म परमेश्वर से पहिले ब्राम्हण ही पैदा भइले संस्कार भईल माया के संग दुबारा फेरू से जन्म लिहले...
26/08/2025

दुविधा दूर बहाई दिहलs

परमब्रह्म परमेश्वर से पहिले
ब्राम्हण ही पैदा भइले
संस्कार भईल माया के संग
दुबारा फेरू से जन्म लिहले
ज्ञान दृष्टि से आन्हर कइके
मन माया चर्म दृष्टि के दे दिहले
चर्म दृष्टि के कारण ही
ब्रम्ह अब नारी पुरुष
दुई रूप धइले
लख चौरासी योनि बना के
भ्रम में तहरा के डाल दिहले
छः विकार और पांच विषय मे
तहरा के अब त पागि दिहले
जन्म से अब तू शुद्र हो गईलs
गुरु फेर से अब संस्कार कइले
सभ विकार जब हटी गईले
तब फिर से तू द्विज कहइलs तू
सभ ज्ञान जब पाई लिहलs
तब फिर से विप्र कहइलs
त्रिगुण से जब परे हो गइलs
तब ब्रम्ह के तू पहिचान लिहलs
ब्रम्ह और तू एक हो गइलs
तब अपना के तू जान लिहलs
सभका में अपना के तू
अपना में सभके देखे लगलs
अनुभव दास सद्गुरु कृपा से
दुविधा दूर बहाई दिहलs
© पं ब्रजकिशोर अनुभव दास
दिव्य ज्ञान धारा

रमता राम भजन गुण गईह-----------------------------------वन में जाई पात जनि तुरिह जनि वृक्षा के सतईहपात- पात में बसत महादे...
15/08/2025

रमता राम भजन गुण गईह
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वन में जाई पात जनि तुरिह
जनि वृक्षा के सतईह
पात- पात में बसत महादेव
उनहूँ के सीस झुकईह
रमता राम भजन गुण गईह
कण कण में श्रीराम बसत है
त्याग भाव से उपभोग तू करिह
ना तहार कुछ ना हमार कुछ
कवनो धन के लोभ जनि करिह
रमता राम भजन गुण गईह
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई कहिके
आपस मे जनि लड़िह
सब घट भीतर राम रमत बाड़े
उनही के दर्शन करिह
रमता राम भजन गुण गईह
राम रहीमा एके हवे
उनका में भेद जनि करिह
नाम, रूप, लीला में जनि भूलिह
एक के तू पहचनीह
रमता राम भजन गुण गईह
जीव हिंसा कबहुँ जनि करिह
हरदम दया भाव तू रखिह
नफरत त्याग प्रेम के धारा
जगत में तू बहईह
रमता राम भजन गुण गईह
"अनुभव दास" के बिनती ई बाटे
खुद बिचार तू करिह
आतम राम अउर शरीर के
भेद जाने के प्रयास तू करिह
रमता राम भजन गुण गईह
मंदिर - मस्जिद - गिरजाघर गुरुद्वारा
आपस मे बैर जनि करिह
सबका भीतर उ बइठल बाड़े
उहवाँ तू दर्शन करिइह
रमता राम भजन तू गईह
© पं ब्रजकिशोर अनुभव दास
दिव्य ज्ञान धारा

13/08/2025

घट घट में बसे कृष्ण
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भादो ही मास के अन्हरिया
घटा घन गरजे ले हो
है ललना पांच से बनल सरीरवा
गुनन तीन खड़ा भइले हो
काया कंस के जेलखाना
त मनवे ही कंस भइले हो
ए ललना जीव वासुदेव माया संग
जेल में बंद भइले हो
मुक्ति के कारण जीव के
कृष्ण प्रकट भईले हो
ए ललना सूति गईले देव पहरेदार
द्वारा तब खुली गईले हो
सद्गुरु कृष्ण भइले सारथी
अर्जुन के उपदेश दिहले हो
ए ललना गीता के ज्ञान तब दिहले मोह सब भंग कइले हो
घट ही में राम व रावण
कृष्ण व कंस बाड़े हो
ए ललना ज्ञान के नज़रिए से देख
भरम सब मिटी जईहे हो
एक ही से अनेक भइले
एक अनेक में समाई गईले
ए ललना परिचय एक से भइले
अनेक सब एक भइले हो
बाहर भीतर एक ही संत लोग गावेले हो
ए ललना बिन गुरू होइहें ना ज्ञान
भरम नाही मिटी हे हो
अनुभव दास पुकारेले
गुरू के सरण जाहू हो
ए ललना दुविधा दूर हो जईहे
भरम सब मिटी जईहे हो
घट घट में बसे कृष्ण
कोई घट सुन नाही हो
ललना जाहि घट प्रगट हो गईले
उहे घट धन्य बड़े हो
© पं ब्रजकिशोर अनुभव दास
दिव्य ज्ञान धारा

जीव मुसाफ़िर भूल गया _____________________काया नगर की भूल भुलैयाजीव मुसाफ़िर भूल गया भूल गया निज नाम गांव को माया संग लपिट...
11/08/2025

जीव मुसाफ़िर भूल गया
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काया नगर की भूल भुलैया
जीव मुसाफ़िर भूल गया
भूल गया निज नाम गांव को
माया संग लपिटाय गया
बेटा बेटी कुल कुटुंब ने
बहुत ही नाच नचाया
अपने आप को जान ना पाया
मेरा मेरा खूब गोहराया
अंत मे कोई काम नही आया
जीव मुसाफ़िर भूल गया
माँ की गोद में बचपन बीता
पिता का प्यार आशीष मिला
जवान भया पत्नी संग आयी
सुख दुख में तो साथ दिया
बेटा बेटी का जन्म भया
परिवार मैं एक बसाया
साथ छोड़ कर चले गए सब
अपने को अब तो अकेला पाया
अंत मे कोई काम नही आया
जीव मुसाफ़िर भूल गया
सद्गुरु पिव जीव का रक्षक
उनसे मिल नही पाया
गुरु मिला तब भेद बताया
नाम को हमे लखाया
नाम सुमिर सद्गुरु को पाया
दुविधा दूर भगाया
अनुभव दास अपने को जान कर
आप मे आप समाया
© पं ब्रजकिशोर अनुभव दास

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