Excellence School Balaghat

Excellence School Balaghat Not an official School Page. Established in 1911, Excellence School Balaghat is a well known school

10/08/2023

#आत्महत्या_नहीं

शाम को घर लौटते समय पिता का मन कुछ उद्विग्न सा था! बेटे का अब तक फोन नहीं आया था! तो क्या रिजल्ट आज भी नहीं निकला!

हो सकता है ना निकला हो!
या क्या पता, निकला हो!
फिर तो बेटे का फोन आना चाहिए था!
तो क्या ........!

बस!
इससे आगे सोचने क ताब ना थी उनमें! दिल बैठता सा महसूस हुआ था!

इसी उधेड़बुन में घर पहुँचे तो पत्नी को आँगन में सोचों में गुम पाया!

"क्या बात है, चूल्हा नहीं जला अब तक!"

"बस, आग सुलगाने ही जा रही थी!"

"बेटे ने फोन किया था?"

"हाँ!"

"रिजल्ट निकल गया उसका?"

"हाँ!"--पत्नी ने संक्षिप्त जवाब दिया।

आगे कुछ पूछने की जरुरत नहीं थी! पास होता तो पत्नी उनके पूछने से पहले ही पूरी कथा सुना रही होती!

"विचलित तो बहुत होगा वो!"

"हाँ, पर आपको लेकर!"

"मुझे लेकर!"

"कह रहा था, पापा का सपना तोड़ दिया! कर्जे के बोझ से दबे कैसे उन्होंने मुझे कोटा भेजा, मैं ही जानता हूँ!"

"अरे, तो क्या हुआ! हर बाप अपने बेटे के लिए ऐसा करता है! पागल कहीं का, फालतू बातें सोचता रहता है! और कुछ कहा क्या उसने!"

पत्नी की आँखों में आँसू आ गये--"कह रहा था, मन करता है कि पंखे से लटक जाऊँ!"

"अरे पागल! और तू मुझे अब बता रही है!"

घबराते हुए उन्होंने जल्दी से फोन लगाया बेटे को! दूसरी बार जाकर फोन लगा...

"अपनी माँ से क्या अंट-शंट बक रहा था?"

"कुछ भी तो नहीं पापा!"

"और तेरी आवाज को क्या हुआ! हमेशा चहकता रहता था और आज इस तरह....!"

"पापा, मुझे माफ करना!"

"माफ! तूने चोरी की, किसी का अहित किया?"

"नहीं पापा, मैं फिर से फेल हो गया!"

"तो!"

"आपका सपना टूट गया!"

"वो मेरा नहीं, तेरा सपना था पगले! मैं तो बस तेरी जरुरतें पूरी कर रहा हूँ!"

"फिर भी, कालिख तो पोत ही दी आपके चेहरे पे!"

"बिल्कुल नहीं बेटे! तूने कुकर्म किये होते, किसी लड़की का शीलभंग किया होता, तब मेरे चेहरे पे कालिख पुतती! तू केवल फेल हुआ है, कागजी पढ़ाई में!"

"पर फेल होने का नतीजा तो आप जानते हैं ना पापा?"

"अच्छी तरह जानता हूँ! फेल होने का बस इतना ही परिणाम होगा कि तू कभी जीवन में इंजीनियर नहीं बनेगा!"

"ये कम है क्या पापा?"

"बहुत कम! इस विराट जीवन की उपलब्धि क्या केवल डॉक्टर, इंजीनियर या फिर क्लास वन का नौकर बनने में है! ये मात्र रोटी कमाने का जरिया भर है बेटे! और जीवन में ईमानदारी से रोटी कमाने के हजारों तरीके हैं!"

"पर मैंने तो कुछ और सोचा था पापा!"

"क्या?"

"यही, कि मैं वो काम करुंगा जिसपर आप गर्व करेंगे, समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी!"

"मेरा गर्व तो तू है बेटे, और आजतक तेरे बारे में कुछ भी बुरा नहीं सुनने को मिला मुझे किसी से! इससे अधिक प्रतिष्ठा और क्या होगी!"

"फिर भी....!"

"अरे क्या फिर भी! ना तेरे बाबा किसी बड़े पद पर थे, ना मैं! तो क्या हमारे खानदान की नाक कट गयी, या हममें से किसी ने आत्महत्या कर ली!"

"मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा पापा!"

"कुछ समझना भी नहीं है! तू इन सबको भुला और मन लगाकर पढ़! आगे ईश्वर ने जो तेरे भाग्य में लिखा है, वो होगा! और हाँ, दिवाली की छुट्टी में घर आ! हम मिलकर इकट्ठे सफाई करेंगे, खरीददारी करेंगे, दीये जलायेंगे!"

"हूँ!"

"आ, इस बार तुझे खेत घुमाता हूँ! खूब मोर और हिरन देखने को मिलेंगे! मधुमक्खियों ने बगीचे में छत्ता भी लगाया है, उसमें से शहद निकालेंगे! और हाँ, इस बार फूलों की खेती भी अच्छी हुई है। तितलियों के पीछे भी भागेंगे! देखना, बहुत मजा आता है इसमें!"

दूसरी ओर से बेटे की हँसी गूँजी--"क्या पापा! आप अभी भी बच्चों जैसी बातें करते हैं!"

"अच्छा! तो मेरा ही जन्मा, मुझे ही सयानापन सिखा रहा है!"

"तो सीख लीजिये ना! क्या हर्ज है!"

"सयानापन अपने साथ संताप लाता है बेटे! मेरी तरह बचपने को बचाये रख! जीने का इससे बेहतर तरीका और कुछ नहीं है!"

दूसरी तरफ बेटे ने चैन की एक लंबी साँस ली! जीवन का मर्म वो समझ चुका था! छत से लटकते पंखे से अब भय की आँधी नहीं बल्कि ठंडी हवा आ रही थी!*

कृपा शंकर मिश्र

If someone edits your photo with AI or Photoshop to create a n**e photo, then you go to stopncii.org and submit the orig...
07/08/2023

If someone edits your photo with AI or Photoshop to create a n**e photo, then you go to stopncii.org and submit the original photo and the edited photo, then they will remove the edited photo from all the places on the Internet.
You don't need to talk directly to anyone for this. Your identity will remain confidential.

If someone has made your picture viral like this, immediately inform the cyber security team, file a case with them and take immediate action.

StopNCII.org is operated by the Revenge P**n Helpline which is part of SWGfL, a charity that believes that all should benefit from technology, free from harm.

01/04/2021

01 अप्रैल से प्रारंभ होगा नवीन शिक्षण सत्र
रेडियो स्कूल, डिजीलैप एवं दूरदर्शन पर शैक्षणिक गतिविधियां होंगी संचालित
मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग के 30 मार्च 2021 के आदेश द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रदेश के समस्त शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों में कक्षा 01 से 08 तक के विद्यालय 15 अप्रैल 2021 तक बंद रखने के निर्देश जारी किये गये है।
--स्रोत कलेक्टर बालाघाट

उत्कृष्ठ विद्यालय बालाघाट की वार्षिक पत्रिका ज्ञानदीप का विमोचन करते हुए प्राचार्य, अध्यापक और अतिथिगण।
11/02/2021

उत्कृष्ठ विद्यालय बालाघाट की वार्षिक पत्रिका ज्ञानदीप का विमोचन करते हुए प्राचार्य, अध्यापक और अतिथिगण।

उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट में कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए MP ऑनलाइन पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जनवरी है।
24/01/2021

उत्कृष्ट विद्यालय बालाघाट में कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए MP ऑनलाइन पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जनवरी है।

05/01/2021

जिसने भी लिखा कमाल का लिखा है..

पांचवीं तक स्लेट की बत्ती को जीभ से चाटकर कैल्शियम की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज न हो जायें...

पढ़ाई का तनाव हमने पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था..

पुस्तक के बीच पौधे की पत्ती और मोरपंख रखने से हम होशियार हो जाएंगे ऐसा हमारा दृढ विश्वास था..

कपड़े के थैले में किताब कॉपियां जमाने का विन्यास हमारा रचनात्मक कौशल था..

हर साल जब नई कक्षा के बस्ते बंधते तब कॉपी किताबों पर जिल्द चढ़ाना हमारे जीवन का वार्षिक उत्सव था..

माता पिता को हमारी पढ़ाई की कोई फ़िक्र नहीं थी.. न हमारी पढ़ाई उनकी जेब पर बोझा थी.. सालों साल बीत जाते पर माता पिता के कदम हमारे स्कूल में न पड़ते थे ।

एक दोस्त को साईकिल के डंडे पर और दूसरे को पीछे कैरियर पर बिठा हमने कितने रास्ते नापें हैं , यह अब याद नहीं बस कुछ धुंधली सी स्मृतियां हैं..

स्कूल में पिटते हुए और मुर्गा बनते हमारा ईगो हमें कभी परेशान नहीं करता था , दरअसल हम जानते ही नही थे कि ईगो होता क्या है ?

पिटाई हमारे दैनिक जीवन की सहज सामान्य प्रक्रिया थी ,"पीटने वाला और पिटने वाला दोनो खुश थे" ,
पिटने वाला इसलिए कि कम पिटे , पीटने वाला इसलिए खुश कि हाथ साफ़ हुवा..

हम अपने माता पिता को कभी नहीं बता पाए कि हम उन्हें कितना प्यार करते हैं,क्योंकि हमें "आई लव यू" कहना नहीं आता था..

आज हम गिरते - सम्भलते , संघर्ष करते दुनियां का हिस्सा बन चुके हैं , कुछ मंजिल पा गये हैं तो कुछ न जाने कहां खो गए हैं..

हम दुनिया में कहीं भी हों लेकिन यह सच है , हमे हकीकतों ने पाला है , हम सच की दुनियां में थे..

कपड़ों को सिलवटों से बचाए रखना और रिश्तों को औपचारिकता से बनाए रखना हमें कभी नहीं आया इस मामले में हम सदा मूर्ख ही रहे..

अपना अपना प्रारब्ध झेलते हुए हम आज भी ख्वाब बुन रहे हैं , शायद ख्वाब बुनना ही हमें जिन्दा रखे है, वरना जो जीवन हम जीकर आये हैं उसके सामने यह वर्तमान कुछ भी नहीं..

हम अच्छे थे या बुरे थे पर हम एक साथ थे, काश वो समय फिर लौट आए..

"एक बार फिर अपने बचपन के पन्नो को पलटिये, सच में फिर से जी उठेंगे”...

12/12/2020

पहले बच्चों को सूजी, मैदा और आटे में भेद करना सिखाइये

पहले बच्चों को मूंग, मसूर, उडद, चना और अरहर पहचानना सिखाइये

पहले बच्चों को मख्खन, घी, पनीर, चीज़ के बीच अंतर और उन्हें बनाने की जानकारी सिखाइये

पहले बच्चों को सोंठ और अदरक, अंगूर और किशमिश, खजूर और छुहारे के बीच का अंतर सिखाइये

पहले बच्चों को दालचीनी, कोकम, राई, सरसों, जीरा और सौंफ पहचानना सिखाइये

पहले बच्चों को आलू, अदरक, हल्दी, प्याज और लहसुन के पौधे दिखाइये

पहले बच्चों को मेथी, पालक, चौलाई, बथुआ, सरसों, लाल भाजी में फर्क सिखाइये

पहले बच्चों को फलों से लदे पेड़ों, फूलों की बगिया दिखाइए

पहले बच्चे को गाय, बैल, सांड का फर्क सिखाओ, गधे, घोड़े और ख़च्चर में अंतर समझाओ

पहले बच्चों को दिखाएं कि गाय, भैंस और बकरी से दूध कैसे दुहा जाता है।

पहले बच्चों को कीचड़ और मिट्टी में उलट पुलट होना सिखाइये, बरसात में भीगना और गर्मियों में पसीने से तरबतर होना सिखाइये

पहले बच्चों को बुजुर्गों के पास जाना, उनसे बातें करना, उनके साथ खेलना और मस्ती करना सिखाइये

बड़ों से तमीज़ से बात करना और घर के काम धाम में माँ-पिता का सहयोग करना सिखाइये

इन सब के बगैर आप बच्चों को कोडिंग सिखाना चाह रहे हैं तो आपका बच्चा ATM बनेगा, समस्याओं का

व्हाइटहैट जूनियर की जल्दी क्या है? कोडिंग भी सीख लेंगे, पहले डिकोडिंग तो कर लें, अपने आस-पास की...बचपन को ज़िंदा रखें, मरने न दें। हाथ जोड़कर निवेदन है।

साभार ::-- डॉ. राजश्री जी की वाल से

10/12/2020

हमारे देश का तंत्र कितना मानवताविहीन है, इसको समझने के लिये सिद्धांत बत्रा के केस को जानना अनिवार्य है।

सिद्धांत बत्रा की आयु 18 वर्ष है। सिद्धांत के पिता की मृत्यु उसके बचपन में हो गयी जबकी उसके मां की मृत्यु अभी 2018 में हुई। आगरा के रहने वाला सिद्धांत का देखरेख एक तरह से उसके दादा दादी ही कर रहे थे। सिद्धांत पढने में बेहद मेहनती है। उसने इन सब के बावजुद कोई रोना नहीं रोया। उसने 12वी पास करने के बाद IIT की इन्ट्रेन्स परीक्षा में पुरे भारत में 270वी रैंक हासिल की।

जब उसने इस परीक्षा में कालेज के लिये ऑनलाइन आवेदन किया तो उसने कालेज सेलेक्ट करने के बाद स्क्रीन पर दिख रहे एक विकल्प फ्रीज़ को चुन लिया। जिसका अर्थ IIT वालों के हिसाब से यह था की आप अपनी पुरी प्रक्रिया रोक रहे हैं और इस तरह से आप अपने एडमिशन को मना कर रहे हैं। सिद्धांत को इस विकल्प का अर्थ यह लगा की इस पुरी प्रक्रिया को वह फ्रीज़ के माध्यम से सॉलिडिफाई (कन्फर्म) कर रहे हैं।

इस गलत क्लिक के कारण उसे IIT के एडमिशन प्रक्रिया से बाहर निकाल दिया गया। जबकी उसने जल्द से जल्द इस बात की सूचना सम्बन्धित लोगों को भेज दिया। पर IIT के अधिकारियों ने सिद्धान्त को सुनने से ही मना कर दिया। इसके बाद वह इस मामले को लेकर मुम्बई हाईकोर्ट गया पर आश्चर्यजनक तौर पर मुंबई हाईकोर्ट ने सिद्धांत को ही दोषी बताया और कहा की उसका एडमिशन अब IIT में नहीं हो सकता। जिसके बाद वह सर्वोच्च न्यायालय गया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया की किसी के जीवन भर के सपने और मेहनत को एक गलत क्लिक कर कारण नहीं कुचला जा सकता। मानवीय आधार पर एक सीट बढ़ाकर सिद्धांत को IIT मुंबई में दाखिला दिया जाय।

इस छोटी सी घटना से आप समझ सकते हैं की बड़े बड़े पोस्ट पर कितने छोटे छोटे लोग बैठे हैं जो इसी में अपनी प्रसन्नता खोजते हैं की किस तरह से किसी को बैठे बैठे श्राप दिया जा सके। मानों हर आदमी एक मौके के इन्तज़ार में है की आप गलती करें और लोग आपको डस लें। न तो उन्हें आपके सपने की कदर है, न आपके मेहनत की, न आपके परिवार के तपस्या की।

बड़े बड़े जगहों पर छोटे मन के लोग भारत और भारतीयता की सबसे बड़ी समस्या हैं।

वैसे हमारी तरफ से सिद्धांत बत्रा को उसके भविष्य के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं 🙏

https://www.jagran.com/news/national-supreme-court-directs-iit-bombay-to-grant-interim-admission-to-siddhant-batra-21149305.html

28/11/2020

बाज पक्षी जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है। पक्षियों की दुनिया में ऐसी Tough and tight training किसी और की नही होती।
मादा बाज अपने चूजे को लेकर लगभग 12 Km ऊपर ले जाती है। जितने ऊपर अमूमन हवाई जहाज उड़ा करते हैं और वह दूरी तय करने में मादा बाज 7 से 9 मिनट का समय लेती है। यहां से शुरू होती है उस नन्हें चूजे की कठिन परीक्षा। उसे अब यहां बताया जाएगा कि तू किस लिए पैदा हुआ है?तेरी दुनिया क्या है?
तेरी ऊंचाई क्या है? तेरा धर्म बहुत ऊंचा है और फिर मादा बाज उसे अपने पंजों से छोड़ देती है।
धरती की ओर ऊपर से नीचे आते वक्त लगभग 2 Km उस चूजे को आभास ही नहीं होता कि उसके साथ क्या हो रहा है। 7 Kmt. के अंतराल के आने के बाद उस चूजे के पंख जो कंजाइन से जकड़े होते है, वह खुलने लगते हैं। लगभग 9 Kmt. आने के बाद उनके पंख पूरे खुल जाते है। यह जीवन का पहला दौर होता है जब बाज का बच्चा पंख फड़फड़ाता है।
अब धरती से वह लगभग 3000 मीटर दूर है लेकिन अभी वह उड़ना नहीं सीख पाया है। अब धरती के बिल्कुल करीब आता है जहां से वह देख सकता है अपने इलाके को। अब उसकी दूरी धरती से महज 700/800 मीटर होती है लेकिन उसका पंख अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है की वो उड़ सके। धरती से लगभग 400/500 मीटर दूरी पर उसे अब लगता है कि उसके जीवन की शायद अंतिम यात्रा है। फिर अचानक से एक पंजा उसे आकर अपनी गिरफ्त मे लेता है और अपने पंखों के दरमियान समा लेता है।

यह पंजा उसकी मां का होता है जो ठीक उसके उपर चिपक कर उड़ रही होती है। और उसकी यह ट्रेनिंग निरंतर चलती रहती है जब तक कि वह उड़ना नहीं सीख जाता। यह ट्रेनिंग एक कमांडो की तरह होती है, तब जाकर दुनिया को एक बाज़ मिलता है अपने से दस गुना अधिक वजनी प्राणी का भी शिकार करता है।

हिंदी में एक कहावत है... "बाज़ के बच्चे मुँडेरों पर नही उड़ते....."

बेशक अपने बच्चों को अपने से चिपका कर रखिए पर उसे दुनियां की मुश्किलों से रूबरू कराइए, उन्हें लड़ना सिखाइए। बिना आवश्यकता के भी संघर्ष करना सिखाइए।

वर्तमान समय की अनन्त सुख सुविधाओं की आदत व अभिवावकों के बेहिसाब लाड़ प्यार ने मिलकर,आपके बच्चों को "ब्रायलर मुर्गे" जैसा बना दिया है जिसके पास मजबूत टंगड़ी तो है पर चल नही सकता। वजनदार पंख तो है पर उड़ नही सकता क्योंकि..

"गमले के पौधे और जमीन के पौधे में बहुत फ़र्क होता है।"

माता पिता अपने बच्चो को कोमल नही कठोर बनाएँ
शस्त्र और शास्त्र दोनो की विद्दा अवश्य दें 🙏 यही आपका प्रथम कर्तव्य है,

AC की हवा मे तभी बैठने दें जब वह गर्मी मे रहना सीख जाए, गाडी की चाबी तभी दें जब वह कई कीलोमीटर पैदल चलने से हिचहिचाता न हो ।

भारत की प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर झूलन गोस्वामी 'नादिया एक्सप्रेस' के नाम से भी जाना जाता है। झूलन गोस्वामी अंतरराष्ट्रीय ...
25/11/2020

भारत की प्रसिद्ध महिला क्रिकेटर झूलन गोस्वामी 'नादिया एक्सप्रेस' के नाम से भी जाना जाता है। झूलन गोस्वामी अंतरराष्ट्रीय एक दिवसीय क्रिकेट मैच में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाली महिला क्रिकेटर हैं। गोस्वामी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं

जन्म दिवस की शुभकामनाएं
🎉🎂🎂🎉

Address

Ambedkar Chowk
Balaghat
481001

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Excellence School Balaghat posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share