Indian Administrative Service - IAS

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WISHING YOU ALL A HAPPY REPUBLIC DAY🇮🇳🫡On this day 76 years ago, India became a sovereign republic!Happy 76th Republic D...
26/01/2025

WISHING YOU ALL A HAPPY REPUBLIC DAY🇮🇳🫡

On this day 76 years ago, India became a sovereign republic!
Happy 76th Republic Day 🫡🇮🇳Let us remember our forefathers and countless freedom fighters who fought for our country and helped build our nation.

🇮🇳🫡

किसी को कोई फर्क नही पड़ता कि आप किस हालात में जी रहे है आपको खुद ही अपने हालात बदलने होंगे ~
09/01/2025

किसी को कोई फर्क नही पड़ता कि आप किस हालात में जी रहे है आपको खुद ही अपने हालात बदलने होंगे ~

07/10/2024

पुणे के येरवडा की झुग्गी-झोपड़ी से लेकर अमेरिका में प्रोफ़ेसर बनने तक का बेहतरीन सफ़र तय करने वाली शैलजा पाइक ने अब प्रतिष्ठित 'मैकआर्थर' फ़ैलोशिप भी हासिल कर लिया है।

इस फ़ैलोशिप के लिए सिलेक्ट हुए उम्मीदवारों को पांच साल के लिए कई चरणों में 8 लाख डॉलर (भारतीय मुद्रा में 6 करोड़ 71 लाख रुपये) की राशि मिलती है।

शैलजा को एक ऐसी इतिहासकार के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने दलित महिलाओं के योगदान और उनकी आत्मचेतना की जागृति का इतिहास लिखा है।

शैलजा ने खुद अपनी ज़िन्दगी में बहुत भेदभाव झेला है — सिर्फ दलित होने के कारण ही नहीं, बल्कि एक महिला होने के कारण भी। इन मुश्किलों के बावजूद, वह अपनी दृढ़ता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं, जिन्होंने कई मुश्किलों के बावजूद उनकी और उनकी तीन बहनों की पढ़ाई नहीं रुकने दी।

"बचपन में, मुझे जीने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा," पाइक ने NPR से बातचीत में बताया। महाराष्ट्र के पोहेगांव में जन्मी शैलजा का परिवार 1960 के दशक में बेहतर अवसरों की तलाश में पुणे आ गया था।

वे येरवाड़ा की एक झुग्गी में एक कमरे के मकान में रहते थे, जहाँ उनकी माँ, जो सिर्फ 6वीं तक पढ़ी थीं, ने उन्हें इंग्लिश का अल्फाबेट सिखाया।

"मेरी माँ सारा काम अकेले ही करती थीं ताकि मैं और मेरी बहनें अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। उन्होंने हमें हर मुश्किल से बचाया और हमें खुद को सुरक्षित रखना सिखाया। उन्होंने मुझे सिखाया कि अपने सपनों का पीछा बिना किसी रुकावट के करना चाहिए और अपने काम पर विश्वास रखना चाहिए।"

अपने माता-पिता के इस समर्थन से प्रेरित होकर, शैलजा ने सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए UK और US चली गईं।

आज, एक प्रसिद्ध इतिहासकार और सामाजिक न्याय की समर्थक के रूप में, शैलजा दलित कहानियों पर काम करती हैं, प्रचलित धारणाओं को चुनौती देती हैं और बदलाव की प्रेरणा बनीं हैं।

अब, MacArthur fellow के रूप में, उन्हें 5 साल में $800,000 की फेलोशिप मिलेगी, जिससे वह बिना किसी बाधा के अपना अहम शोध जारी रख सकेंगी।


[Shailaja Paik, MacArthur Fellowship, Inspiring, Education, academic achievement]

06/10/2024


इतिहास की गलियों में विज्ञान की दुनिया को रौशन करने वाले भारतीय वैज्ञानिकों की कमी नहीं है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं भारतीय खगौल वैज्ञानिक मेघनाथ साहा को! जिन्होंने ‘साहा समीकरण’ से तारों के अंदर के भौतिक और रासायनिक गुणों के बारे में बताया था।

मेघनाथ एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे, लिहाज़ा उच्च शिक्षा के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। उनके पंसारी पिता चाहते थे कि वह व्यवसाय में उनकी मदद करें, पर होनहार मेघनाद को यह मंज़ूर नहीं था। वह अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में लगाते थे। पढ़ने लिए 10 किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाते और उनकी इसी लगन और जिज्ञासा को देखकर उनके बड़े भाई ने उनकी शिक्षा का खर्च उठाने का फैसला किया। साहा ने 1911 में इंटरमीडिएट परीक्षा पास की और प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया जहाँ उनके शिक्षक प्रफुल्ल चंद्र रॉय और जगदीश चंद्र बोस थे। दोनों का इस छात्र पर गहरा प्रभाव पड़ा और 1916 में मेघनाद कलकत्ता यूनिवर्सिटी में शिक्षक के रूप में कार्य करने लगे।

आगे चलकर उन्होंने गणित व भौतिकी के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण काम किए। 1919 में अमेरिकी खगोल भौतिकी जर्नल में मेघनाद साहा का रिसर्च पेपर छपा जिसमें उन्होंने "आयनीकरण फार्मूला" दिया। यह फार्मूला खगोलशास्त्रियों को सूर्य और अन्य तारों के आंतरिक तापमान और दबाव की जानकारी देने में सहायक था। इस खोज ने उनको इस क्षेत्र में अलग पहचान दी और 1927 में वह रॉयल सोसायटी के सदस्य बनें। इसके अलावा, साहा ने इंडियन साइंस न्यूज एसोसिएशन (1935) और इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स (1949) की भी स्थापना की।
साधारण परिवार से आने वाले एक आम से लड़के ने भौतिक और खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिए थे, जिससे हर भारतीय को परिचित होना चाहिए। क्या आप इस वैज्ञानिक के बारे में जानते थे?

06/10/2024

अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा वर्षा सोलंकी ने गरीबी में बिताया। उन्होंने बचपन में ही पिता को खो दिया था; माँ परिवार चलाने के लिए लोगों के घरों में काम करने लगीं और माँ की मदद के लिए वर्षा और उनकी बहन भी सफाई करने और बर्तन धोने का काम करती थीं।

तंगहाली की वजह से स्कूल के बाद पढ़ाई छूट गई और जीवन के संघर्षों के बीच वर्षा का डांस का सपना कहीं दब कर रह गया!

"मुझे वो दिन आज भी बहुत अच्छे से याद हैं। मैं माँ के साथ घर-घर जाती थी। जब काम ज़्यादा होता, उनका हाथ बंटाती थी। हम इसी तरह गुज़ारा करते थे। जब ज़िम्मेदारियाँ सिर पर आती हैं, तो बाकी सब कुछ पीछे छूट जाता है।"

कठिनाइयां कितनी भी हों, लेकिन वर्षा के दिल में हमेशा एक उम्मीद की किरण बाकी रही।

इसी तरह कई साल बीत गए। बचपन से शुरू हुआ संघर्षों का सफर शादी के बाद भी जारी रहा। वर्षा अब अपनी बेटी के भविष्य के लिए सपने तो कई देखतीं, लेकिन आर्थिक तंगी हर बार रास्ते की रुकावट बन जाती।

अभी भी अपनी कला के लिए उनका प्यार बरकरार था और आखिरकार गमों के अंधेरे में डांस और कॉमेडी ने उन्हें उजालों का रास्ता दिखाया।

घर के काम के बाद बचे वक्त में वर्षा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर
अपलोड करने लगीं। लेकिन कहते हैं ना कि पहला कदम सबसे मुश्किल होता है... उसी तरह शुरुआत में वर्षा को भी सोशल मीडिया पर अच्छा रिस्पांस नहीं मिला।

लोगों ने उन्हें नीचा दिखाने के लिए उनका खूब मज़ाक बनाया; लेकिन वर्षा रुकने या हार मानने वालों में से नहीं थी। वह वीडियो बनाती रहीं और धीरे-धीरे उनका कंटेंट वायरल होने लगा।

"मैं अपने हेटर्स से ज़्यादा मज़बूत हूँ। लोग पहले मुझपर खूब हँसे, लेकिन फिर कुछ कमाल हुआ। मेरी वीडियोज़ वायरल होने लगीं और देखते ही देखते हज़ारों-लाखों लोग मेरे सफ़र का हिस्सा बन गए।"

इंस्टाग्राम पर आज वर्षा के आज 5.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं। उन्हें डांस दीवाने रियलिटी शो में जाने का भी मौका मिला। वहां एक जज ने उनसे कहा था, "आप रियल हीरो हैं। लोगों को आपसे सीखना चाहिए। आप ज़िंदगी से हारी नहीं, बल्कि लड़कर जीती हैं।"

"मैंने हमेशा ये सब सपने में सोचा था, लेकिन यह नहीं जानती थी कि एक दिन मेरे सपने सच होंगे। ज़िंदगी आपको कभी भी दूसरा मौक़ा दे सकती है, बस उम्मीद रखने की ज़रूरत है।"
- वर्षा



[Varsha Solanki | Inspiring | SoulStory | Never Give Up | Motivation | Ideas ]

13/11/2020

UPSC Topper Mock Interview

(Rank 5, CSE 2018)

सर्दियों में टमाटर सूप पीने से रहेंगे आप स्वस्थ, जाने इसके ये चमत्कारी फायदे सर्दियां शुरू हो गई है. और सर्दियों गर्म-गर...
03/11/2020

सर्दियों में टमाटर सूप पीने से रहेंगे आप स्वस्थ, जाने इसके ये चमत्कारी फायदे

सर्दियां शुरू हो गई है. और सर्दियों गर्म-गर्म चीजे खाने में मजा आता है. ज्यादातर लोग ठंड के मौसम में सूप पीना पसंद करते हैं. और सूप में बहुत से लोगों को टमाटर का सूप बहुत पसंद होता है. टमाटर के सूप का सिर्फ टेस्ट ही अच्छा नहीं होता है बल्कि ये हमारी हैल्थ के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. एक कप टमाटर के सूप में 13.3 मिग्रा लाइकोपिन होता है जो कई बीमारियों के इलाज में फायदेमंद है. समें कैलोरी की मात्रा भी काफी कम होती है. इसे आप लंच में भी ले सकते हैं और ये डिनर पार्टी का स्टार्टर भी हो सकता है.

टमाटर के सूप में बहुत से पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं. इसमें विटामिन A,E,C,K और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं. यह आपको हेल्दी और फिट रखते हैं. टमाटर के सूप के ये फायदे हैं:

1.हड्डियों के लिए लाभकारी: इसमें विटामिन K और केल्शियम होता है जो हड्डियों को मजबूत रखता है. टमाटर का सूप रोजाना पीने से यह TNF अल्फा के ब्लड लेवल को 34% घटा देता है. शरीर में लाइकोपीन की कमी से हड्डियों पर तनाव बढ़ता है. टमाटर में लाइकोपीन होता है और नियमित रूप से इसका सेवन करने से आप बीमारियों से दूर रहते हैं.

2. दिमाग को भी दुरुस्त रखता है: टमाटर सूप में भारी मात्रा में कॉपर पाया जाता है, जिससे नर्वस सिस्टम ठीक रहता है. इसमें पोटेशियम की मात्रा भी काफी रहती है. यह सब दिमाग को मजबूत रखता है.

3. विटामिन का अच्छा सोर्स: टमाटर का सूप विटामिन A और C का स्त्रोत होता है. विटामिन A, टिशू के विकास के लिए जरूरी होता है. शरीर में रोजाना 16% विटामिन A और 20% विटामिन C की जरूरत होती है और टमाटर का सूप शरीर की इस जरूरत को पूरा करता है.

4.वजन घटाने में मददगार: टमाटर सूप यदि ऑलिव ऑयल से बनाया जाए तो यह वजन घटाने में मददगार होता है. इसमें पानी और फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे आपको काफी समय तक भूख नहीं लगती.

5. कैंसर: टमाटर के सूप में लाइकोपीन और कैरोटोनॉयड जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जिससे महिला और पुरुष दोनों में कैंसर होने की संभावना घट जाती है. हफ्ते में तीन दिन यह सूप पीने से ब्रेस्ट, प्रोस्टेट कैंसर की संभावना कम हो जाती है.

6. डायबिटीज: डायबिटीज के मरीजों के डाइट में टमाटर का सूप अवश्य होना चाहिए. इसमें क्रोमियम होता है, जो ब्ल्ड शुगर को नियंत्रण में रखता है.

7. रक्त प्रवाह: टमाटर में सेलेनियम होता है, जो रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे एनिमिया का खतरा कम हो जाता है.

'मिशन कर्मयोगी' से प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू किया सिविल सेवा में सबसे बड़ा बदलाव।   Narendra Modi  Ji  🙏
03/09/2020

'मिशन कर्मयोगी' से प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू किया सिविल सेवा में सबसे बड़ा बदलाव। Narendra Modi Ji 🙏

"Health is Wealth".( सेहत के लिए लाभदायक  जानकारियाँ  ) 👍
21/08/2020

"Health is Wealth".
( सेहत के लिए लाभदायक जानकारियाँ ) 👍

पिता ने घर बेचकर पढ़ाया, बेटा बना IAS यूपीएससी का रिजल्ट कल  घोष‍ित कर दिया गया. देश की टॉप परीक्षाओं में से एक इस परीक्ष...
05/08/2020

पिता ने घर बेचकर पढ़ाया, बेटा बना IAS

यूपीएससी का रिजल्ट कल घोष‍ित कर दिया गया. देश की टॉप परीक्षाओं में से एक इस परीक्षा में प्रदीप सिंह ने ऑल इंडिया रैंक वन हासिल की है. इसी लिस्ट में 26वें स्थान पर भी एक नाम प्रदीप सिंह का है. आईआरएस अफसर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे इस प्रदीप सिंह ने भी अपने पिता और परिवार का मान बढ़ाया है. आइए जानते हैं प्रदीप सिंह के संघर्ष और सफल होने की कहानी.

प्रदीप का कहना है कि आर्थिक रूप से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके माता – पिता ने ये सब उनकी पढ़ाई के बीच में नहीं आने दिया. प्रदीप ने बताया कि उनके घर में पैसों की काफी दिक्कतें थीं, लेकिन मेरे माता- पिता का जज्बा मुझसे कहीं ज्यादा ऊपर था.

प्रदीप के पिता ने कहा “मैं इंदौर में एक पेट्रोल पंप पर काम करता हूं. मैं हमेशा अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहता था ताकि वे जीवन में अच्छा कर सकें. प्रदीप ने बताया कि वह यूपीएससी की परीक्षा देना चाहते हैं, मेरे पास पैसे की कमी थी. ऐसे में मैंने अपने बेटे की पढ़ाई की खातिर अपना घर बेच दिया. उस दौरान मेरे परिवार को काफी संघर्ष करना पड़ा था. लेकिन आज मैं बेटे की सफलता से खुश हूं.”

प्रदीप कहा ” उनकी कोचिंग की फीस करीब 1.5 लाख रुपये थी. इसी के साथ ऊपर का खर्चा अलग था. मेरी पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा न आए. इसके लिए पिताजी ने घर बेच दिया. “

प्रदीप ने बताया कि- मेरे पिताजी की जीवन भर की संपत्ति उनका इंदौर का मकान था. लेकिन मेरी पढ़ाई की खातिर उसे बेच दिया और एक क्षण भी ये नहीं सोचा कि ऐसा क्यों कर रहा हूं. उन्होंने कहा जब मुझे इस बारे में मालूम चला तो मेरा मेहनत करने का जज्बा डबल हो गया. पिता जी के इस त्याग ने मुझे और सक्षम बना दिया. और मैंने ठान लिया कि ये यूपीएससी की परीक्षा हर हाल में पास करनी है.

बता दें, उनके पिताजी इंदौर में निरंजनपुर देवास नगर के डायमंड पेट्रोल पंप पर काम करते हैं. उनकी मां हाउस वाइफ और उनके भाई प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं. उन्होंने बताया तीनों मेरी हर मुश्किल में प्रोटेक्शन वॉल की तरह खड़े रहे. उन्होंने बताया कि पापा और भाई ने मेरी पढ़ाई का काफी ख्याल रखा. जब मेरी यूपीएससी की मेंस परीक्षा चल रही थी उस दौरान मेरी मां अस्पताल में एडमिट थी. लेकिन इस बात की जानकारी मुझे नहीं दी गई. ताकि मैं किसी भी तरह से टेंशन ना लूं, जिसका असर मेरी पढ़ाई पर ना पड़े. प्रदीप ने बताया पिता ने घर ही नहीं बल्कि गांव की बिहार के गोपालगंज की पुश्तैनी जमीन भी मेरी पढ़ाई की खातिर बेच दी ताकि दिल्ली में मुझे किसी भी तरह से पैसों की दिक्कत ना हो. बता दें, प्रदीप का जन्म बिहार में हुआ था, जिसके बाद वह इंदौर शिफ्ट हो गए थे.

सलाम है बिहार के लाल को…. बिहारी मेहनती होते है, यह एक बार फिर से साबित हो गया.

यूपीएससी का रिजल्ट आज घोष‍ित कर दिया गया. देश की टॉप परीक्षाओं में से एक इस परीक्षा में प्रदीप सिंह ने ऑल इंडिया रैं...

"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" इस नारे से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला देने वाले,हिंदू राष्ट...
01/08/2020

"स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" इस नारे से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला देने वाले,हिंदू राष्ट्रवाद के जनक, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ओजस्वी स्वर, भारत के प्रसिद्ध अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी , सभी भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना जगाने वाले, महान शिक्षक एवं समाज सुधारक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
🙏

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