28/07/2023
झुमको में उलझता जुल्फों का पहरा
नूर सा चमकता ये सादगी सा चेहरा
जरूर है पारियों से रिश्ता कोई गहरा
जो दिल आके इन निगाहों में है ठहरा
अब तो तुम्हारे रंगो में रंगने से लगे
तो लगने लगा है रंग जैसे सुनहरा
झुमकों में उलझता जुल्फों का पहरा
नूर सा चमकता ये सादगी सा चेहरा।
अंकिता की कलम से ✍️✍️✍️✍️