10/05/2026
संगीत जगत की विभूतियों से परिचित कराना चाहते हैं। **’संगीत’** पत्रिका (संगीत कार्यालय, हाथरस) दशकों से भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार का एक विश्वसनीय स्तंभ रही है।
अगस्त 2007 के अंक 8 में प्रकाशित जानकारी के आधार पर **श्रीमती सुशीला सुर्वे** जी का संक्षिप्त जीवन परिचय और संगीत में उनका योगदान यहाँ प्रस्तुत है:
# # **श्रीमती सुशीला सुर्वे: शास्त्रीय संगीत की अनन्य साधिका**
श्रीमती सुशीला सुर्वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक प्रतिष्ठित गायिका और समर्पित गुरु थीं। उनका योगदान विशेष रूप से संगीत के प्रचार-प्रसार और शिक्षण के क्षेत्र में स्मरणीय है।
# # # **जीवन परिचय और शिक्षा**
* **जन्म:** उनका जन्म महाराष्ट्र के **रत्नागिरी** जिले में हुआ था।
* **संगीत शिक्षा:** उन्होंने **खैरागढ़** (इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय) से बी.म्यूज़. (B.Mus.) की डिग्री प्राप्त की थी।
* **गुरु-शिष्य परंपरा:** उन्होंने प्रसिद्ध संगीतज्ञ **बाला साहब पूछवाले** जी से संगीत की शिक्षा ली। इस प्रकार वे **ग्वालियर घराने** की गायकी की प्रतिनिधि बनीं।
* **निधन:** उनका निधन **27 जनवरी, 2007** को सरगुजा (छत्तीसगढ़) में हुआ।
**संगीत जगत में मुख्य योगदान**
1. **ग्वालियर घराने का विस्तार:** सुशीला जी ने ग्वालियर घराने की शुद्ध और समृद्ध गायकी को न केवल आत्मसात किया, बल्कि उसे विकसित और प्रसारित करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
2. **संस्थान की स्थापना:** उन्होंने 80 के दशक में छत्तीसगढ़ के **सरगुजा** जैसे आदिवासी बहुल और उस समय संगीत की दृष्टि से उपेक्षित क्षेत्र में **'अर’ण संगीत महाविद्यालय'**’की स्थापना की।
3. **संगीत का लोकतंत्रीकरण:** दूरदराज के क्षेत्रों में शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने और वहां के विद्यार्थियों को निपुण बनाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
**विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा**
श्रीमती सुशीला सुर्वे जी का जीवन हमें सिखाता है कि एक सच्चा कलाकार केवल अपनी कला का प्रदर्शन ही नहीं करता, बल्कि कठिन परिस्थितियों और सुविधाओं के अभाव वाले क्षेत्रों में जाकर भी विद्या का दान देता है। उनका नाम संगीत जगत की उन विभूतियों में गिना जाता है जिन्होंने "संगीत“सेवा” को ही अपना परम लक्ष्य माना।