24/05/2026
जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय दें और उनकी एक रचना का नाम लिखें।
उत्तर-
हिन्दी-साहित्य को प्रसाद जी की उपलब्धि एक युगान्तरकारी घटना है। ऐसा अनोखा होता है कि ये हिन्दी-साहित्य का श्री स्वरूप ही अवतरित हो गया। यही कारण है कि हिन्दी-साहित्य का प्रत्येक पक्ष ग्रंथ से गौरवान्वित हो उठता है। ये हिन्दी के महान कवि, नाटककार, कहानीकार, निबन्धकार आदि के रूप में जाने जाते हैं।
जीवन-परिचय - हिन्दी-साहित्य के महान कवि, नाटककार, कथाकार एवं निबन्धकार श्री जयशंकर प्रसाद जी का जन्म सन् 1889 ई0 में वाराणसी के प्रसिद्ध सुंघनी साहू परिवार में हुआ था। इनके पिता बाबू देवीप्रसाद काशी के प्रतिष्ठित और धनाढ्य व्यक्ति थे। वैज्ञानिक शिक्षा घर पर हुई तथा स्वाध्याय से ही अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और फारसी का श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त किया और साथ ही वेद, पुराण, इतिहास, दर्शन आदि का भी गहन अध्ययन किया। माता-पिता और बड़े भाई की मृत्यु हो जाने पर मुख्य व्यवसाय और परिवार का उत्तरदायित्व संभाला ही था कि युवा अवस्था की पूर्व ही भाभी , फिर एक के बाद दूसरी पत्नी की मृत्यु से इन्हें गहरा आघात लगा । फलतः वैभव के पालने में उनके परिवार पर कर्ज का बोझ पड़ गया। फिर भी प्रसाद जी ने हार नहीं मानी और आजीवन साहित्य-सेवा में लगे रहे। अंतत: प्रसाद जी क्षय रोग से ग्रसित हो गए 14 मार्च, सन् 1937 ई0 को केवल 48 वर्ष की आयु में हिन्दी साहित्यकाश का यह सूर्य सदा के लिए अस्त हो गया ।
प्रमुख रचनाएं -
1. काव्य रचनाएँ – कामायनी उनकी सर्वश्रेष्ठ एवं विश्वविख्यात महाकाव्यात्मक रचना है। इसके अतिरिक्त आँसू, लहर, झरना, चित्राधार तथा कानन कुसुम उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं।
2. नाटक – जयशंकर प्रसाद ने हिंदी नाटक साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उनके प्रमुख नाटकों में चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, अजातशत्रु, राज्यश्री तथा जनमेजय का नागयज्ञ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
3. कहानी संग्रह – उनकी कहानियों में मानवीय संवेदनाओं और जीवन के यथार्थ का सुंदर चित्रण मिलता है। उनके प्रमुख कहानी संग्रह आकाशदीप, प्रतिध्वनि, छाया तथा इंद्रजाल हैं।
4. उपन्यास – जयशंकर प्रसाद ने उपन्यास विधा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रमुख उपन्यास कंकाल, तितली तथा इरावती हैं।
हिंदी साहित्य में स्थान -
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के ऐसे महान साहित्यकार थे, जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से साहित्य को समृद्ध बनाया। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, प्रकृति-सौंदर्य और मानव जीवन का गहन चित्रण मिलता है। हिंदी साहित्य में उनका स्थान अत्यंत ऊँचा और सम्माननीय है।