राजकीय हाई स्कूल अहाता जरवल बहराइच उत्तर प्रदेश

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12/07/2026
प्रिय ललित,परीक्षा के प्रथम चरण में सफलता प्राप्त करने पर आपको हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।एक अति पिछड़े गाँव से नि...
12/07/2026

प्रिय ललित,

परीक्षा के प्रथम चरण में सफलता प्राप्त करने पर आपको हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।

एक अति पिछड़े गाँव से निकलकर, सीमित संसाधनों के बीच राजकीय हाई स्कूल अहाता, जरवल, बहराइच में अध्ययन करते हुए यह उपलब्धि प्राप्त करना वास्तव में आपके अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प, लगन और आत्मविश्वास का प्रमाण है। आपकी यह सफलता न केवल आपके परिवार और विद्यालय के लिए गौरव का विषय है, बल्कि अनेक विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनेगी।

ईश्वर से प्रार्थना है कि वे आपको उत्तम स्वास्थ्य, अटूट आत्मविश्वास एवं निरंतर सफलता प्रदान करें। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप आगामी चरण में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपने जीवन के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे।

आपके उज्ज्वल भविष्य एवं अगले चरण की सफलता के लिए हार्दिक अग्रिम शुभकामनाएँ।

💐 बहुत-बहुत बधाई एवं मंगलकामनाएँ! 💐

— राजकीय हाई स्कूल अहाता, जरवल, बहराइच
प्रधानाचार्य एवं समस्त शिक्षक परिवार

📢 महत्वपूर्ण सूचना | यूपी बोर्ड कक्षा 9 एवं 11 अग्रिम पंजीकरण 2026-27माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वा...
19/06/2026

📢 महत्वपूर्ण सूचना | यूपी बोर्ड कक्षा 9 एवं 11 अग्रिम पंजीकरण 2026-27

माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 (परीक्षा वर्ष 2028) हेतु कक्षा 9 एवं 11 के छात्र-छात्राओं के अग्रिम पंजीकरण तथा वर्ष 2027 की कृषि भाग-1 परीक्षा में सम्मिलित होने वाले कक्षा 11 के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण संबंधी समय-सारिणी जारी कर दी गई है।

🗓 महत्वपूर्ण तिथियाँ: ✅ कक्षा 9 एवं 11 में प्रवेश की अंतिम तिथि – 05 अगस्त 2026

✅ हाईस्कूल कम्पार्टमेंट/सन्निरीक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों के कक्षा 11 में प्रवेश की अंतिम तिथि – 20 अगस्त 2026

✅ विद्यालय द्वारा पंजीकरण शुल्क जमा कर विवरण ऑनलाइन अपलोड करने की अंतिम तिथि – 25 अगस्त 2026 (दोपहर 12:00 बजे तक)

✅ अपलोड विवरणों के सत्यापन (चेकिंग) की अवधि – 26 अगस्त से 05 सितम्बर 2026 तक

✅ त्रुटि संशोधन/अपडेट की अवधि – 06 सितम्बर से 20 सितम्बर 2026 (दोपहर 12:00 बजे तक)

✅ नामावली एवं कोषपत्र जमा करने की अंतिम तिथि – 30 सितम्बर 2026

सभी विद्यालय प्रधानाचार्यों, कक्षा अध्यापकों एवं विद्यार्थियों से अनुरोध है कि नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, विषय आदि सभी विवरणों का सावधानीपूर्वक सत्यापन कर ही परिषद की वेबसाइट पर अपलोड करें, क्योंकि किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए संबंधित विद्यालय उत्तरदायी होगा।

जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय दें और उनकी एक रचना का नाम लिखें। उत्तर-हिन्दी-साहित्य को प्रसाद जी की उपलब्धि एक युगान्तरका...
24/05/2026

जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय दें और उनकी एक रचना का नाम लिखें।
उत्तर-
हिन्दी-साहित्य को प्रसाद जी की उपलब्धि एक युगान्तरकारी घटना है। ऐसा अनोखा होता है कि ये हिन्दी-साहित्य का श्री स्वरूप ही अवतरित हो गया। यही कारण है कि हिन्दी-साहित्य का प्रत्येक पक्ष ग्रंथ से गौरवान्वित हो उठता है। ये हिन्दी के महान कवि, नाटककार, कहानीकार, निबन्धकार आदि के रूप में जाने जाते हैं।

जीवन-परिचय - हिन्दी-साहित्य के महान कवि, नाटककार, कथाकार एवं निबन्धकार श्री जयशंकर प्रसाद जी का जन्म सन् 1889 ई0 में वाराणसी के प्रसिद्ध सुंघनी साहू परिवार में हुआ था। इनके पिता बाबू देवीप्रसाद काशी के प्रतिष्ठित और धनाढ्य व्यक्ति थे। वैज्ञानिक शिक्षा घर पर हुई तथा स्वाध्याय से ही अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू और फारसी का श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त किया और साथ ही वेद, पुराण, इतिहास, दर्शन आदि का भी गहन अध्ययन किया। माता-पिता और बड़े भाई की मृत्यु हो जाने पर मुख्य व्यवसाय और परिवार का उत्तरदायित्व संभाला ही था कि युवा अवस्था की पूर्व ही भाभी , फिर एक के बाद दूसरी पत्नी की मृत्यु से इन्हें गहरा आघात लगा । फलतः वैभव के पालने में उनके परिवार पर कर्ज का बोझ पड़ गया। फिर भी प्रसाद जी ने हार नहीं मानी और आजीवन साहित्य-सेवा में लगे रहे। अंतत: प्रसाद जी क्षय रोग से ग्रसित हो गए 14 मार्च, सन् 1937 ई0 को केवल 48 वर्ष की आयु में हिन्दी साहित्यकाश का यह सूर्य सदा के लिए अस्त हो गया ।

प्रमुख रचनाएं -
1. काव्य रचनाएँ – कामायनी उनकी सर्वश्रेष्ठ एवं विश्वविख्यात महाकाव्यात्मक रचना है। इसके अतिरिक्त आँसू, लहर, झरना, चित्राधार तथा कानन कुसुम उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं।

2. नाटक – जयशंकर प्रसाद ने हिंदी नाटक साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उनके प्रमुख नाटकों में चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, अजातशत्रु, राज्यश्री तथा जनमेजय का नागयज्ञ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

3. कहानी संग्रह – उनकी कहानियों में मानवीय संवेदनाओं और जीवन के यथार्थ का सुंदर चित्रण मिलता है। उनके प्रमुख कहानी संग्रह आकाशदीप, प्रतिध्वनि, छाया तथा इंद्रजाल हैं।

4. उपन्यास – जयशंकर प्रसाद ने उपन्यास विधा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रमुख उपन्यास कंकाल, तितली तथा इरावती हैं।

हिंदी साहित्य में स्थान -
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के ऐसे महान साहित्यकार थे, जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से साहित्य को समृद्ध बनाया। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, प्रकृति-सौंदर्य और मानव जीवन का गहन चित्रण मिलता है। हिंदी साहित्य में उनका स्थान अत्यंत ऊँचा और सम्माननीय है।

प्रश्न - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन-परिचय देते हैं और उनकी एक रचना का नाम लिखिए ।उत्तर - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्...
24/05/2026

प्रश्न - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन-परिचय देते हैं और उनकी एक रचना का नाम लिखिए ।

उत्तर - आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हिन्दी साहित्याकाश के ऐसे दीप्यमान नक्षत्र हैं जो पाठक को अज्ञान रूपी अन्धकार से दूर वैज्ञानिक ज्ञान के ऐसे आलोक में ले जाते हैं, जहाँ विवेक और बुद्धि का सुखद सम्मोहन होता है। शुक्ल जी एक कुशल निबन्धकार तो थे ही, वे समलोचना और इतिहास-लेखन के क्षेत्र में भी अग्रगण्य थे।

जीवन-परिचय - हिन्दी के प्रतिभासम्पन्न मूर्धन्य एवं समीक्षक युग-प्रवर्तक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जन्म सन् 1884 ई0 में बस्ती जिले के अगोना नामक ग्राम के एक सम्भ्रांत परिवार में हुआ था। इनके पिता चन्द्रबली शुक्ल पक्ष में कानूनगो थे। अन्य माता अत्यंत विदुषी और धार्मिक स्थान। अपने पिता के पास जिले की राठ तहसील में हुई और मैसाचुसेट्स मिशन स्कूल से मित्रता 73 फिजियोथेरेपी शिक्षा-दीक्षा। गणित में ख़राब होने के कारण ये आगे नहीं पढ़ें। फोर्थ एफ0 ए0 (इंटरमीडियट) की शिक्षा, इलिनोइस से ली थी, वडोदरा परीक्षा से पूर्व ही विद्यालय को छूट दी गई। इसके मूल मॉडल के कोर्ट में नौकरी की शुरुआत कर दी गई। यह नौकरी स्वाभाविक स्वभाव के अनुकूल नहीं थी, मूलतः ये कलाकारों के मिशन स्कूल में चित्रकारों के शिक्षक हो गये थे। अध्याय का कार्य करते हुए कई कहानियाँ, कविता, निबन्ध, नाटक आदि की रचनाएँ। 'वैधता' से प्रभावित 'हिन्दी शब्द-सागर' के सम्पादन-कार्य में सहयोग के लिए श्यामसुन्दर दास जी को काशी नागागी प्रचारिणी सभा में सम्बोधन बुलाया गया। 19 वर्ष तक काशी नागागी प्रचारिनी पत्रिका का सम्पादन भी किया गया। कुछ समय अनोखे बेकार काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के बटालियन के रूप में हो। श्यामसुंदर दास जी की छुट्टी मिलने के बाद ये हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी हो गए। रूमानी और प्रकृति प्रकृति का हिंदी का यह दिग्गज साकेत सन् 1941 ई0 में स्वर्गवासी हो गया था।

रचनाएँ - शुक्ल जी एक प्रसिद्ध निबन्धकार, विद्वान आलोचक, श्रेष्ठ इतिहासकार और सफल सम्पादक थे। अन्य का विवरण निम्नवत है-
(1) निबन्ध - इन निबन्धों का संग्रह 'चिंतामणि' (दो भाग) तथा 'विचारवीथी' नाम से प्रकाशित हुआ।
(2) आलोचक – शुक्ल जी आलोचक के सम्राट हैं। इस क्षेत्र में तीन ग्रंथ प्रकाशित हुए -
(क) रस मीमांसा - इसमें सैद्धान्तिक आलोचनात्मक निबन्ध हैं,
(ख) त्रिवेणी - इस क्षेत्र में सूर, तुलसी और जायसी पर आलोचना लिखी गई हैं तथा
(ग) सूरदास।
(3) इतिहास - युगीन प्रवृत्तियों के आधार पर लिखा गया इनका हिन्दी-साहित्य का इतिहास हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ इतिहासों में से एक है।
(4) सम्पादन - 'जायसी ग्रन्थावली', 'तुलसी ग्रन्थावली', 'भ्रमरगीत सार', 'हिन्दी शब्द-सागर', 'काशी नागागी प्रचारिनी पत्रिका' और 'आनन्द कादम्बिनी' का कुशल सम्पादन।
इसके अतिरिक्त शुक्ल जी ने कहानी (ग्यारह साल का समय), काव्य-रचना (अभिमन्यु-वध) की रचनाएँ और कुछ अन्य मसालों की हिंदी में व्याख्या भी की। इनमें 'मेगस्थानीज का भारतवर्षीय विवरण', 'आदर्श जीवन', 'कल्याण का आनंद', 'विश्व प्रबंध', 'बुद्धचरित' (काव्य) आदि प्रमुख हैं।

साहित्य में स्थान - हिन्दी निबन्धों को नया आयाम आयाम देने के लिए उन्हें प्रतिष्ठित करने वाले शुक्ल जी हिन्दी-साहित्य के मूर्धन्य आलोचक, श्रेष्ठ निबन्धकार, विद्वान इतिहासकार, महान शैलीकार एवं युग-प्रवर्तक विद्वान थे। ये हृदय से कवि, मस्तिष्क से आलोचक और जीवन से शिक्षक थे। हिन्दी-साहित्य में यह मूर्धन्य स्थान है। विलक्षण प्रतिभा के कारण ही समकालीन हिन्दी गद्य के काल को 'शुक्ल युग' के नाम से जाना जाता है।

24/05/2026

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