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There was a Long pending demand of the people of Bahal and surrounding villages within a radius of about 60 kms for opening a co-educational degree college as it was not possible for the parents to send their wards at far off places for getting higher stu

जीडीसी मेमोरियल महाविद्यालय बहल के छात्राओं ने भिवानी में चल रहे 5 नवंबर से 9 नवंबर 2024 तक पांच दिवसीय यूथ रेड क्रॉस प्...
09/11/2024

जीडीसी मेमोरियल महाविद्यालय बहल के छात्राओं ने भिवानी में चल रहे 5 नवंबर से 9 नवंबर 2024 तक पांच दिवसीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया। इस प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण में घर में, पड़ोस में आगजनी होने पर और अचानक आपदा आने पर, कहीं अचानक दुर्घटना घटने पर अपना बचाव और दूसरे का बचाव कैसे करें आदि प्रशिक्षण प्राप्त किया।

*शारीरिक स्वच्छता ही सुखी जीवन का आधार है: डॉक्टर शर्मिला बुरा* आज ,16 अक्टूबर 2024 (बुधवार) को जीडीसी मेमोरियल महाविद्य...
16/10/2024

*शारीरिक स्वच्छता ही सुखी जीवन का आधार है: डॉक्टर शर्मिला बुरा*
आज ,16 अक्टूबर 2024 (बुधवार) को जीडीसी मेमोरियल महाविद्यालय(बहल) के महिला प्रकोष्ठ इकाई के द्वारा "महिला शारीरिक स्वच्छता" कार्यक्रम का आयोजन करवाया गया। इस कार्यक्रम की आयोजन कर्ता महिला प्रकोष्ठ की इंचार्ज डॉ अनीता रही। इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉक्टर शर्मिला बूरा (मानव कल्याण अस्पताल, बहल) रही। डॉ श्रीमती शर्मिला बुरा ने अपने वक्तव्य में महाविद्यालय की छात्राओं को शरीर से संबंधित रोग-बीमारियों से परिचित करवाया। किस तरह से छात्राओं को अपने शरीर की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए, संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने शारीरिक स्वच्छता को ही जीवन का मूल मंत्र बताते हुए इस जीवन का मूल आधार बताया।इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की स्नातक तथा स्नातकोत्र कक्षाओं की 140 छात्राओं एवं अध्यापिकाओं ने बढ़ -चढ़कर के भाग लिया। इस कार्यक्रम में भाग ले रही सभी छात्राओं को डॉक्टर शर्मिला बुरा ने छात्राओं को स्त्री शारीरिक स्वच्छता के बारे में तथा फास्ट फूड के हानिकारक प्रभाव से अवगत करवाया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की डॉ. पूनम कुमारी ,डॉ. सुमन देवी, डॉ.अंजु, डॉ. मुकेश कुमारी , सुश्री किर्ती , सुश्री प्रियंका, सुश्री रेखा सहायक प्राध्यापिकाएं हाजिर रही।
बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के निदेशक एवं जीडीसी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.एस. के. सिन्हा ने इस तरह के कार्यक्रम की सराहना करते हुए महाविद्यालय में कार्यरत महिला प्राध्यापकों की हौसला बजाई की। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि महाविद्यालय में समय-समय पर छात्राओं के प्रति इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करवाया जाना अति आवश्यक होता है।

जीडीसी महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा मनाया गया ओजोन दिवस आज ,16 सितंबर 2024 (सोमवार) स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्था...
16/09/2024

जीडीसी महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा मनाया गया ओजोन दिवस

आज ,16 सितंबर 2024 (सोमवार) स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्थान बहल के जीडीसी महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा "ओजोन दिवस" मनाया गया। प्रोग्राम का संचालन एमएससी भूगोल तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं अनुजा और कौशल्या द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री हिमांशु ग्रोवर विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग द्वारा किया गया। जिसमें उन्होंने अपने उद्बोधन में ओजोन को बचाने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयास करने के ऊपर जोर दिया व बच्चों को पर्यावरण के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। इसी क्रम में प्रोग्राम को आगे बढ़ाते हुए डॉ संजय गौड, डॉ सुखेंद्र महला, डॉ अशोक, भूगोल विभाग से सचिन, प्रियंका इत्यादि शिक्षक गण द्वारा विद्यार्थियों को ओजोन की उपयोगिता व हम इसे कैसे सुरक्षित रख सकते हैं पर उद्बोधन दिया गया ।विद्यार्थियों द्वारा भूगोल विभाग से सीमा, काजल, पूजा ने भाषण व कविता से विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति सजग किया। तत्पश्चात क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें दो राउंड संचालित करवाए गए। कुल 12 टीमों ने भाग लिया जो अलग-अलग विभागों से थी। इसमें से दो टीम विजेता रही।आर्यभट्ट प्रथम रहीं एवं हमबोल्ट टीम द्वितीय स्थान पर रही। विजेता टीम को प्रशस्ति पत्र देकर के सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में भूगोल विभाग के अध्यक्ष ने सभी सहभागी विद्यार्थियों का व सहयोगी प्राध्यापकों का तहदिल से धन्यवाद किया।

बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के  महाविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों ने किया वाद- विवाद प्रतियोगिता का सफलतम आयोजन आज 11 सितंबर...
11/09/2024

बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के महाविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों ने किया वाद- विवाद प्रतियोगिता का सफलतम आयोजन

आज 11 सितंबर 2024,( बुधवार)स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्थान (बहल) के जीडीसी महाविद्यालय एवं विधिक( लाॅ )महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में हिंदी विभाग के अंतर्गत हिंदी दिवस के उपलक्ष में चल रहे हिंदी पखवाड़े में हिंदी भाषा "वाद-विवाद प्रतियोगिता" कार्यक्रम का सफलतम आयोजन करवाया गया। जिसमें जीडीसी महाविद्यालय एवं विधिक महाविद्यालय के स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं के सभी छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
हिंदी विभागाध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने अपने वक्तव्य में हिंदी भाषा के सुनना, बोलना, पढ़ना तथा लिखना कौशलों पर प्रकाश डालते हुए हिंदी भाषा में वाद- विवाद प्रतियोगिता के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उनहोने प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को वाद- विवाद या आलोचना की संक्षिप्तता, गद्य-पद्य की अनिवार्यता, व्यक्तित्व की प्रधानता, सजीवता तथा वाचन शैली एवं संचार कौशल तत्वों के बारे में विस्तार से समझाया । प्रतियोगिता के नियमों से अवगत करवाया ।उन्होंने आगे काव्य के तीनों रूप- प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य तथा गीति काव्य के बारे में आलोचनात्मक संबंधी वाद- विवाद विषय पर भी विद्यार्थियों को विस्तार से बताया। बी.ए. एल एल बी (प्रथम व पंचम सेमेस्टर),बीए,बीएससी( मेडिकल, नोन मेडिकल तथा कंप्यूटर साईंस), बीपीईएस, बीकॉम, एम तथा एमएससी के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया।
विधिक(लाॅ)महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार शुक्ला ने कार्यक्रम की देखरेख करते हुए हिंदी विभाग के इस तरह के उपलब्धि प्रतिष्ठित कार्यक्रम की सराहना करते हुए बताया कि इस तरह के कार्यक्रम से बच्चों में स्वाभाविकता व मौलिकता जैसे गुणों का विकास होता है। कानून की पढ़ाई अर्थात वकालत कर रहे विद्यार्थियों के लिए तो वाद- विवाद प्रतियोगिता का अहम योगदान होता है। इस अवसर पर जीडीसी एवं विधिक(लाॅ) महाविद्यालय के समस्त शिक्षकवृंद ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना अहम योगदान दिया। कला संकाय, विज्ञान संकाय एवं वाणिज्य संकाय , बीपीईएस एवं लाॅ महाविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर् सत्र के सभी विद्यार्थियो ने अपने कक्षा- कक्ष में ही प्रतियोगिता को सफल बनाने में अनुशासन का परिचय दिया।
बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के महानिदेशक एवं जीडीसी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. के. सीन्हा ने इस तरह के कार्यक्रम कि महता बताते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि महाविद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों की प्रतिभा का विकास होता है। विद्यार्थी अपने भावी जीवन में भाषा के वाचन कौशल (वाद- विवाद )में कभी असफलता का सामना नहीं करेंगे। उनका भविष्य स्वर्णमयी होगा। हम उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।

" कविता पाठ प्रतियोगिता" में छात्रों का रहा सराहनीय प्रदर्शन आज ,9 सितंबर 2024,( सोमवार)स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्थान ...
09/09/2024

" कविता पाठ प्रतियोगिता" में छात्रों का रहा सराहनीय प्रदर्शन

आज ,9 सितंबर 2024,( सोमवार)स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के जीडीसी महाविद्यालय एवं विधिक( लाॅ )महाविद्यालय में हिंदी विभाग के अंतर्गत हिंदी दिवस के उपलक्ष में चल रहे हिंदी पखवाड़े में हिंदी भाषा "कविता प्रतियोगिता" कार्यक्रम का सफलतम आयोजन करवाया गया। जिसमें जीडीसी महाविद्यालय एवं विधिक महाविद्यालय के स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं के लगभग सभी छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
हिंदी विभागाध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने अपने वक्तव्य में हिंदी भाषा के सुनना, बोलना, पढ़ना तथा लिखना चारों कौशलों पर प्रकाश डालते हुए हिंदी भाषा में कविता पाठ के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उनहोने प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को कविता की संक्षिप्तता, पद्य की अनिवार्यता, व्यक्तित्व की प्रधानता, सजीवता तथा वाचन शैली तत्वों के बारे में विस्तार से समझाया । उन्होंने आगे काव्य के तीन रूप- प्रबंध काव्य, मुक्तक काव्य तथा गीति काव्य के बारे में भी विद्यार्थियों को विस्तार से बताया। बीए,बी.ए. एल एल बी (प्रथम व पंचम सेमेस्टर),बीएसएससी( मेडिकल, नोन मेडिकल तथा कंप्यूटर साईंस), बीपीईएस, एम तथा एमएससी के विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया।
विधिक(लाॅ)महाविद्यालय के प्राचार्य श्री सुनील कुमार शुक्ला ने कार्यक्रम की देखरेख करते हुए हिंदी विभाग के इस तरह के उपलब्धि प्रतिष्ठित कार्यक्रम की भूरी- भूरी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम से बच्चों में स्वाभाविकता व मौलिकता जैसे गुणों का विकास होता है। इस अवसर पर पीजी विभागाध्यक्ष- डॉ संजय गौड़ तथा यूजी विभागाध्यक्ष -डॉ सुखेन्द्र महला सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षक वृंद ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना अहम योगदान दिया तथा हिंदी विभाग की मदद करने में अपना अहम योगदान दिया।
बी.ए. एलएलबी फिफ्थ सेम के विद्यार्थियों में पुष्पा रोल नंबर 22503 ने अपनी कविता-( लड़की होना आसान नहीं) में प्रथम स्थान भव्या रोल नंबर 22568 ने अपनी कविता-( मैं अकेला) के वाचन से द्वितीय स्थान तथा प्रीति रोल नंबर 22590 ने अपनी कविता-( गीत गाने दो मुझे), खुशी रोल नंबर 22540 ने अपनी कविता-( वह तोड़ती पत्थर) एवं नितेश रोल नंबर 22571 ने अपनी कविता-( इतिहास परीक्षा) के माध्यम से तृतीय स्थान हासिल किया। वही बीए एलएलबी प्रथम सेम के विद्यार्थी- संयोगिता, दीक्षा, अंजलि, रोशनी तथा माधव ने कविता वाचन के माध्यम से सराहनीय प्रदर्शन किया। जीडीसी महाविद्यालय के स्नातक कक्षा के विद्यार्थियों में बीए द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी- निशा, प्रियंका, नीतू, करीना, मुकेश, सानिया, सीखा, कोमल आदि विद्यार्थियों की कविता व भाषण सराहनीय रहा। वहीं बीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों में- रीना ने प्रथम स्थान, सपना ने द्वितीय स्थान तथा ज्योति व सरिता ने तृतीय स्थान हासिल किया।
बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के महानिदेशक एवं जीडीसी महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. एस. के. सीन्हा ने इस तरह के कार्यक्रम कि महता बताते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि महाविद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों की प्रतिभा का विकास होता है। विद्यार्थी अपने भावी जीवन में भाषा के वाचन कौशल में कभी असफलता का सामना नहीं करेंगे। उनका भविष्य अच्छी व मीठी वाणी द्वारा स्वर्णमयी होगा।

जीडीसी महाविद्यालय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया: शिक्षक दिवस आज ,5 सितंबर 2024 ,(वीरवार) स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्...
05/09/2024

जीडीसी महाविद्यालय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया: शिक्षक दिवस

आज ,5 सितंबर 2024 ,(वीरवार) स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के जीडीसी महाविद्यालय में "शिक्षक दिवस" के उपलक्ष पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा बड़े हर्षो उल्लास से मनाया गया शिक्षक दिवस। इसमें जीडीसी महाविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के सभी छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम का श्री गणेश महाविद्यालय के हिंदी सहायक प्राध्यापक मनोज कुमार द्वारा गुरु वंदना से किया गया। उन्होंने अपने गीति काव्य के माध्यम से सभागृह में उपस्थित मुख्य अतिथि सहित सभी दर्शकवृंद को मंत्र मुक्त कर दिया। उन्होंने अपनी गायन कला के माध्यम से शिक्षकों के दायित्व व महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्कृत के श्लोक, हिंदी के दोहे व चौपाईं छंदों की प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों में शिक्षकगण के प्रति आदर भाव, उत्तम प्रभाव व महिमा का बखान गायन के माध्यम से प्रस्तुत किया । जीडीसी महाविद्यालय के विद्यार्थी नीलम (बीएससी एग्रीकल्चर, प्रथम वर्ष) रेनू( इतिहास ,द्वितीय वर्ष) काजल (बीएससी एग्रीकल्चर, प्रथम वर्ष) आशा एम( इतिहास द्वितीय वर्ष )मंजू (बीएससी एग्रीकल्चर प्रथम वर्ष )योगिता( बीएससी मेडिकल तृतीय वर्ष) बबीता( बीएससी एग्रीकल्चर प्रथम वर्ष) तथा दीपक (बीएससी एग्रीकल्चर प्रथम) ने कविता के माध्यम से सभी को अध्यापक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं पेश की।

इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार पिलानिया ने अपने वक्तव्य में इतिहास में वर्णित समाज सुधारक एवं पूर्व शिक्षकगण यथा- गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, स्वामी विवेकानंद, स्वामी विवेकानंद, सावित्रीबाई आदि के द्वारा शिक्षा के प्रति उठाए गए आंदोलन व उनके अहम् योगदान की याद दिलाते हुए शिक्षक दिवस की बधाइयां दी। इसी कड़ी में आगे बॉटनी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पूनम कुमारी तथा स्टेज संचालकी के माध्यम से मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक उपेंद्र प्रसाद जी ने भी शिक्षक दिवस की बधाइयां प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के निदेशक एवं जीडीसी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एसके सिन्हा ने अपने वक्तव्य में सर्वप्रथम संस्थान के शिक्षक और गैर शिक्षण स्टाफ को बीआरसीएम अध्यक्ष हरिकृष्ण चौधरी की तरफ से एवं अपनी ओर से शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने बताया कि पहली बार 1962 से 5 सितंबर को शिक्षा के क्षेत्र में डॉ राधाकृष्णन सर्वपल्ली के और सभी शिक्षकों के साधारण योगदान को सम्मानित करने के लिए शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। तब से आज तक हर वर्ष इसी तारीख को देश में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। प्रेरणा के अपर स्तोत्र डॉ राधाकृष्णन की एक -एक बातें और उनके दिखाए गए मार्ग से आज शिक्षा में बहुत बड़ी क्रांति आ गई है। देश उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है ।और विश्व को एक नई दिशा मिल रही है। विश्व के कुछ देशों में शिक्षकों (गुरुजन) को विशेष सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है। भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन 5 सितंबर भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है ।उन्होंने अपने छात्रों से जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की इच्छा जताई थी। शिक्षक हमारे समाज का निर्माण करते हैं ।वही हमारे मार्गदर्शक होते हैं ।शिक्षक का स्थान माता-पिता से भी ऊंचा होता है। माता-पिता बच्चों को जन्म जरूर देते हैं लेकिन शिक्षक उनके चरित्र को आकार देकर के उज्जवल भविष्य की नींव तैयार करते हैं। इसलिए हम चाहे कितने भी बड़े क्यों ना हो जाए हमें अपने शिक्षकों को कभी नहीं भूलना चाहिए। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कोलकाता यूनिवर्सिटी तथा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी इंग्लैंड में भी पठन-पाठन का कार्य किया था।
डॉ सिन्हा ने अपने वक्तव्य में आगे बताया कि गुरु -शिष्य परंपरा किस तरह से प्राचीन काल से चली आ रही है। यह बड़ा पवित्र व पावन नाता होता है। उन्होंने रामायण व महाभारत धार्मिक ग्रंथो में गुरुओं की महिमा पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान युग में गुरुजनों के कर्तव्यनिष्ठ होने की बात कही। उन्होंने अपने शिक्षक उमाशंकर बेरियर जी को याद किया। उन्होंने वर्तमान में अच्छे शिक्षकों की कमी रहने की वजह से 20 साल बाद के भविष्य पर चिंता व्यक्त की। अध्यापक की बुरी इच्छा-शक्ति ,अच्छा व्यक्तित्व न होना, बच्चों की संख्या कक्षा में कम होना, स्वयं का मूल्यांकन न करना ,अच्छे समाज का निर्माण न करना ,अपनी सोच न बदलना, आत्मविश्वास न रखना आदि दुर्गुणों से बचते हुए एक अध्यापक को राष्ट्र निर्माण के कार्यों में अपना अहम योगदान देना ही एक सफल अध्यापक का कर्तव्य बताया। वर्तमान युगीन विद्यार्थीगण में भी आत्मविश्वास की कमी व अहंकार का होना तथा अपने अध्यापकगण पर पूर्ण विश्वास व भरोसा न होना उनके पतन का प्रमुख कारण बताया। इस प्रकार अपने दिल की बात कहते हुए उपस्थित सभी विद्यार्थियों व शिक्षकवृंद को अच्छे रिलेशनशिप बनाने के लिए प्रेरित किया तथा शिक्षक दिवस की सभी को कोटि-कोटि बधाइयां दी। कार्यक्रम के समापन पर महाविद्यालय के समस्त अध्यापकगण व अन्य गैर शैक्षणिक कर्मचारी को पुरस्कृत किया।

"हिंदी भाषा का उद्भव एवं विकास" निबंध प्रतियोगिता में छात्रों का रहा सराहनीय प्रदर्शनआज 3 सितंबर 2024,( मंगलवार )स्थानीय...
03/09/2024

"हिंदी भाषा का उद्भव एवं विकास" निबंध प्रतियोगिता में छात्रों का रहा सराहनीय प्रदर्शन

आज 3 सितंबर 2024,( मंगलवार )स्थानीय बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के जीडीसी महाविद्यालय एवं विधिक( लाॅ )महाविद्यालय में हिंदी विभाग के अंतर्गत हिंदी दिवस के उपलक्ष में चल रहे हिंदी पखवाड़े में "हिंदी भाषा उद्भव एवं विकास" संबंधित निबंध प्रतियोगिता कार्यक्रम का सफलतम आयोजन करवाया गया। जिसमें जीडीसी महाविद्यालय एवं विधिक महाविद्यालय के स्नातक व स्नातकोत्तर कक्षाओं के सभी छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
हिंदी विभागाध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने अपने वक्तव्य में हिंदी भाषा के सुनना, बोलना, पढ़ना तथा लिखना चारों कौशलों पर प्रकाश डालते हुए हिंदी भाषा की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उनहोने प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को निबंध की संक्षिप्तता गद्य की अनिवार्यता, व्यक्तित्व की प्रधानता, सजीवता तथा भाषा शैली तत्वों के बारे में विस्तार से समझाया ।बीए, बीकॉम ,बीएसएससी( मेडिकल, नोन मेडिकल तथा कंप्यूटर साईंस), बीपीईएस, एम तथा एमएससी के कुल 243 विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता में भाग लिया।
विधिक(लाॅ)महाविद्यालय के प्राचार्य श्री सुनील शुक्ला जी ने कार्यक्रम की देखरेख करते हुए हिंदी विभाग के इस तरह के उपलब्धि प्रतिष्ठित कार्यक्रम की भूरी- भूरी प्रशंसा की। इस अवसर पर पीजी विभागाध्यक्ष डॉ संजय गौड़ तथा यूजी विभाग अध्यक्ष डॉ सुखेन्द्र महला सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षक वृंद ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना अहम योगदान दिया। बीआरसीएम शिक्षण संस्थान के महानिदेशक एवं जीडीसी महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ एस. के. सीन्हा ने इस तरह कार्यक्रम कि सराहना करते हुए बताया की ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों की प्रतिभा का विकास होता है।

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