Indin Student Union भारतीय छात्र संघ

  • Home
  • India
  • Baghpat
  • Indin Student Union भारतीय छात्र संघ

Indin Student Union भारतीय छात्र संघ this is

18/03/2017

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी –
1 – लक्ष्य निर्धारित करें-
ये सबसे पहला काम है लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का सिलेबस एक सा ही होता हैं। लेकिन इनमें प्रश्नों का स्तर और पैटर्न अलग होता हैं। इसलिए बेहतर हैं कि पहले ये तय कर ले कि आपको किस एग्जाम पर फोकस करना हैं।
2 – प्लानिंग बनाकर करें शुरुआत-
आपके पास पढ़ने के लिए कई सब्जेक्ट्स और कई टॉपिक्स होते हैं। वहीं अलग-अलग सब्जेक्ट्स पर आपकी कमांड भी एक सी नहीं होती। इसलिए इन सब बातों को ध्यान में रखकर पहले ही एक प्लान बना लें और उसके अनुसार ही तैयारियां करें।
3 – टाइम मैनेजमेंट सीखें-
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय हम सब कुछ पढ़ लेने पर ज्यादा ध्यान देते हैं लेकिन एग्जाम को ध्यान में रखकर अपनी स्पीड पर कोई काम नहीं करते हैं। परीक्षा की तैयारी की शुरुआत के साथ ही टाइम मैनेजमेंट करके चलना चाहिए। शुरुआत से ही सवालों को टाइम अलॉट कर सॉल्व करने की आदत डालें।
3 – प्रेक्टिस ही सबकुछ है-
कॉलेज या स्कूल की एग्जाम में तो एक दिन पहले पढ़कर काम चल जाता है। लेकिन यहाँ मामला अलग हैं, यहाँ तो लगातर प्रैक्टिस की ज़रुरत होती हैं। इसलिए इस मामले में शार्टकट वाले भ्रम में ना रहें और लगातार प्रश्न पत्र के सेट लगाते रहे।
4 – बेसिक से करें शुरुआत-
किसी भी सब्जेक्ट पर अच्छी कमांड बनाना चाहते हैं तो इसे पढ़ने की शुरुआत इसके बेसिक्स से करे। सबसे पहले बेसिक फार्मूलों और सम्बंधित परिभाषाओं को अच्छी तरह समझ ले उसके बाद ही आगे बढ़े।
5 – स्टडी मटेरियल की रखें व्यवस्था-
आपको क्या-क्या टॉपिक्स और सब्जेक्ट्स पढ़ने हैं ये तो आपको पता ही रहता है। इसलिए सबसे पहले देख लें कि आपके पास ज़रूरी किताबें, नोट्स और पेपर्स वगैरह हों। उसके बाद फिर सब्जेक्ट के हिसाब से टाइम टेबल बनाकर पढ़ना शुरू करें।
6 – एग्जाम से पहले दिमाग रखे शांत-
परीक्षा वाले दिन स्टूडेंट्स ऐन मौके पर सबकुछ घोट लेने की कोशिश में लगे रहते हैं। जबकि एग्जाम से कुछ घंटे पहले तक किताबों से दूरी बनाकर दिमाग को बिल्कुल शांत रखना चाहिये। आप इस दौरान अपना पसंदीदा संगीत भी सुन सकते हैं। इससे आपको परीक्षा को लेकर ज्यादा तनाव नहीं होगा।
7 – इस बात का रखे ध्यान-
एग्जाम के पहले जितना मैनेजमेंट जरुरी है उतना ही ‘टाइम मैनेजमेंट’ एग्जाम हॉल में भी जरुरी है। एग्जाम में कई तरह के सवाल आते हैं। इसलिए बेहतर हैं एक ही सवाल को घण्टों लेकर बैठे रहने की बजाए पहले सरल सवाल कर लें फिर आगे बढ़ें।
8 – इंटरव्यू की तैयारी को न भूलें-
अगर आप लिखित परीक्षा को क्लियर कर भी लें तो उसके बाद आने वाले इंटरव्यू के पड़ाव को पार करना भी बेहद ज़रुरी होता हैं। इसके लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में लिखित परीक्षा की तैयारी के साथ ही इंटरव्यू में पूछे जाने वाले सवालों के जवाबों की भी अच्छी तरह प्रैक्टिस कर लें।
इस तरह से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करे – प्रतियोगी परीक्षा को निकालने के लिये एक्सपर्ट की राय का उपयोग करे। अगर आप इन टिप्स का सही तरीके से इस्तेमाल करेंगे तो आपको सरकारी दामाद बनने से कोई रोक नही सकता।

10/03/2017

छात्रों और शिक्षकों की संख्या का अनुपात है मूल समस्या
शिमला: विधानसभा बजट सत्र में आज बीजेपी के विधायक कर्नल इन्द्र सिंह ने सरकारी स्कूलों में छात्रों की घटती संख्या के कारणों पर सदन में संकल्प रखा जिसमे पक्ष तथा विपक्ष के विधानसभा सदस्यों ने भाग लिया। जिसमे सभी सदस्यों ने कहा कि मुफ्त मिड-डे मील, मुफ्त वर्दी, मुफ्त किताबें आदि के बावजूद लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में न पढ़ा कर किसी भी प्राइवेट स्कूल में भेज रहें है विषय पर चिंता जाहिर की । इन हालात को बदलने के लिए सभी ने अपने -2 विचार रखे कि लुभावनी योजनाओं के स्थान पर स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्तियों को बढ़ाया जाए, ताकि प्रति कक्षा एक शिक्षक मिल सके तथा सरकारी स्कूल के अध्यापको के ऊपर नकेल कसी जाए।

शिक्षा समाज का आईना है और समृद्ध समाज को सशक्त शिक्षा का आधार माना जाता है। लेकिन सरकारी शिक्षा का गिरता स्तर और छात्रों की दिन-प्रतिदिन घटती संख्या चिंता का विषय बना हुआ है। सरकारी शिक्षण संस्थानों से निकल कर ही कई लोगों ने सफलता के परचम लहराए हैं। उन्हीं लोगों के दृष्टिकोण में आए बदलाव से सरकारी शिक्षा अपने अस्तित्व की जंग लड़ती नजर आ रही है। सूबे के आज सेकड़ो स्कूल कम छात्र संख्या के कारण बंद होने के कगार पर खड़े हैं। यहां इंतजार है तो बस एक सरकारी फरमान का। आने वाले समय में ऐसा न हो कि सरकारी स्कूल कहानी बन कर रह जाएं। प्राथमिक शिक्षा, जिसे शिक्षा की नींव माना जाता है, वहां हालात और भी दयनीय हैं। प्रश्न उठता है कि सरकार की कई लुभावनी योजनाओं, जिनमें मुफ्त मिड-डे मील, मुफ्त वर्दी, मुफ्त किताबें, कई छात्रवृत्ति आदि बांट कर भी क्यों लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में न पढ़ा कर किसी भी प्राइवेट स्कूल में भेज देते हैं। इस प्रश्न का हल जाने बिना सरकारी शिक्षा को बचाना संभव नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण है कक्षा और अध्यापक का अनुपात सही न होना। अभिभावक अपने बच्चों को उन स्कूलों से निकाल लेते हैं, जहां एक या दो अध्यापकों के सहारे पूरा स्कूल चलता है।

10/03/2017

फोन पर सुलझेगी छात्रों की समस्याएं
वाराणसी। भगवान भोलेनाथ की नगरी बनारस की प्रतिष्ठित काशी विद्यापीठ अब छात्रों की समस्याओं के फोन पर ही निराकरण की अनूठी व्यवस्था करने जा रही है। इसके लिए ऐसी तकनीक पर काम किया जा रहा है जिससे कि आज के दौर में संवाद और सम्पर्क का जरिया बन चुके स्मार्टफोन के जरिए छात्र छात्राए विश्वविद्यालय के प्रशासन को अपनी समस्याएं भेजकर उनका निराकरण करा सकेंगे।
काशी विद्यापीठ के कुलपति डा पृथ्वीशनाग ने आईपीएन से यह जानकारी देते हुए बताया कि तकनीक के इस दौर में छात्र छात्राओं को यह सुविधा देकर उनको कार्यालय के चक्कर लगाने की समस्या से निजात दिलाया जाएगा। यह सुविधा विद्यापीठ से जुडे सभी 400 कालेजों के छात्र छात्राओं को भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व भी विद्यापीठ की तमाम छात्र छात्राओं से जुड़ी प्रक्रियाओं को आनलाइन किया जा चुका है। इसके साथ ही पहली बार विद्यापीठ में छात्रों को पढ़ाए जाने वाले लेक्चर भी अब 2 दिन पहले से ही वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिससे कि छात्र छात्राएं कक्षा में आने के पहले ही उनका अध्ययन करके आए तथा उन्हें उस विषय का बेहतर ज्ञान मिल सके।
यह लेक्चर आगे भी वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे। इसके लिए 31 शिक्षकों को संसाधन के तौर पर लैपटाप उपलब्ध कराए गए हैं जिससे कि उन्हे लेक्चर तैयार करने में सुविधा हो। उन्होंने कहा कि यूपी के डिग्री कालेजों से पढ़कर निकलने वाले छात्र छात्राओं को मिलने वाली नौकरी का प्रतिशत काफी कम करीब 10 प्रतिशत के बराबर ही है। इसको बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है और इस दिशा में कार्य आरंभ कर दिया गया है।
इसके लिए पर्सनेलटी डेवलेपमेन्ट के कोर्स आरंभ किए गए हैं। उसमें छात्र छात्राओं को एक एक चीज बताई जाती है। उन्हें कम्प्यूटर का भी ज्ञान दिया जाता है। इसके साथ ही कैरियर काउन्सिलिंग भी की जा रही है। इसके साथ ही नौकरी के लिए कम्पनियों में व्यवस्था की जा रही है। इससे युवाओं को रोजगार मिल रहे हैं। इसके अलावा वोकेशनल कोर्सेज भी आरंभ किए गए हैं।

http://m.patrika.com/news/bemetara/problem-for-student-in-school-without-boundary-wall-1161376/
06/06/2016

http://m.patrika.com/news/bemetara/problem-for-student-in-school-without-boundary-wall-1161376/

शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दाढ़ी में अहाता नहीं होने से छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात में स्कूल परिसर पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।

Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, Kumar Vishwas and Pankaj Gupta at a Thank You Meeting with the Donors.
22/02/2015

Arvind Kejriwal, Manish Sisodia, Kumar Vishwas and Pankaj Gupta at a Thank You Meeting with the Donors.

26/01/2015

राजपथ पर 66वें गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के भारत का ‘विजन’ राजपथ पर झांकियों के रूप में बखूबी दर्शाया गया.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और मेक इन इंडिया की झांकी न सिर्फ आकर्षण का केंद्र रही बल्कि इसके जरिये सरकार ने यह बताने की भी कोशिश की कि मोदी अपने विजन को मूर्त रूप देने मे किस तरह के प्रयासों में जुटे हैं.

सबसे पहले मंच की तरफ स्टेच्यू आफ यूनिटी के जरिये मोदी के गुजरात में लौह पुरूष कहलाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति और साथ ही उसमें सरदार सरोवर परियोजना की झलक दिखी. टर्बाइन और इस पर बांध का जल प्रपात बखूबी दिखाया गया. ज्ञात हो कि यह परियोजना मोदी के काफी करीब मानी जाती है.

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य की इस झांकी के अलावा उनके मेक इन इंडिया के नारे को ध्यान में रखकर तैयार की गई झांकी को देखकर सभी गण्यमान्य लोगों के चेहरों पर मुस्कान आ गई. विदेशों मे जाकर भारत में निवेश करने और उद्योग स्थापित करने के मेक इन नारे के चिन्ह ‘शेर’ को मशीनी रूप में दिखाया गया. मोदी इस झांकी को देखते हुये खासे उत्साहित दिखे.

वाराणसी से सांसद प्रधानमंत्री मोदी की गंगा की सफाई के मुद्दे को जोरशोर से उठाने वाली केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की झांकी तथा बेटी बचाओ, बेटी पढाओ, के उनके नारे से जुडी सोच भी झांकी के रूप में दिखाई दी. प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा था कि यदि बेटी को नहीं बचाया जाएगा तो बहू भी नहीं आयेगी.

इसके अलावा वित्त और रेल मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री को खुश करने का मौका नहीं छोड़ा और झांकी में उनकी महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जन धन योजना को प्रस्तुत किया. इस योजना के तहत देश में अभी तक दस करोड़ से ज्यादा निम्न आय वर्ग के लोगों के खाते खुलवाये गये हैं. आम चुनावों में देश को बुलेट ट्रेन का सपना दिखाने वाले मोदी के इस विजन की झलक रेल मंत्रालय की झांकी में दिखी. हालांकि देश को यही उम्मीद है कि ये विजन केवल झांकियों में दिखाई न दे.

सबको न्याय, वाक फार जस्टिस, पंचायती राज की आदर्श ग्राम पंचायत, समग्र स्वास्थ्य के लिये आयुष, परमाणु उंर्जा विभाग का राष्ट्र की सेवा में परमाणु झांकियां भी मोदी के विजन का हिस्सा थीं.

राजपथ पर प्रदर्शित 25 झांकियों में से 16 राज्यों एवं नौ केन्द्र सरकार के विभागों की झांकियां थीं जिनमें गुजरात एवं केन्द्रीय विभागों की कुल दस झांकियां मोदी मिशन से जुडी थीं

राजपथ पर 66वें गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के भारत का ‘विजन’ राजपथ पर झांकियों के रूप में बखूबी द...
26/01/2015

राजपथ पर 66वें गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के भारत का ‘विजन’ राजपथ पर झांकियों के रूप में बखूबी दर्शाया गया.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और मेक इन इंडिया की झांकी न सिर्फ आकर्षण का केंद्र रही बल्कि इसके जरिये सरकार ने यह बताने की भी कोशिश की कि मोदी अपने विजन को मूर्त रूप देने मे किस तरह के प्रयासों में जुटे हैं.

सबसे पहले मंच की तरफ स्टेच्यू आफ यूनिटी के जरिये मोदी के गुजरात में लौह पुरूष कहलाने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति और साथ ही उसमें सरदार सरोवर परियोजना की झलक दिखी. टर्बाइन और इस पर बांध का जल प्रपात बखूबी दिखाया गया. ज्ञात हो कि यह परियोजना मोदी के काफी करीब मानी जाती है.

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य की इस झांकी के अलावा उनके मेक इन इंडिया के नारे को ध्यान में रखकर तैयार की गई झांकी को देखकर सभी गण्यमान्य लोगों के चेहरों पर मुस्कान आ गई. विदेशों मे जाकर भारत में निवेश करने और उद्योग स्थापित करने के मेक इन नारे के चिन्ह ‘शेर’ को मशीनी रूप में दिखाया गया. मोदी इस झांकी को देखते हुये खासे उत्साहित दिखे.

वाराणसी से सांसद प्रधानमंत्री मोदी की गंगा की सफाई के मुद्दे को जोरशोर से उठाने वाली केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की झांकी तथा बेटी बचाओ, बेटी पढाओ, के उनके नारे से जुडी सोच भी झांकी के रूप में दिखाई दी. प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा था कि यदि बेटी को नहीं बचाया जाएगा तो बहू भी नहीं आयेगी.

इसके अलावा वित्त और रेल मंत्रालय ने भी प्रधानमंत्री को खुश करने का मौका नहीं छोड़ा और झांकी में उनकी महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जन धन योजना को प्रस्तुत किया. इस योजना के तहत देश में अभी तक दस करोड़ से ज्यादा निम्न आय वर्ग के लोगों के खाते खुलवाये गये हैं. आम चुनावों में देश को बुलेट ट्रेन का सपना दिखाने वाले मोदी के इस विजन की झलक रेल मंत्रालय की झांकी में दिखी. हालांकि देश को यही उम्मीद है कि ये विजन केवल झांकियों में दिखाई न दे.

सबको न्याय, वाक फार जस्टिस, पंचायती राज की आदर्श ग्राम पंचायत, समग्र स्वास्थ्य के लिये आयुष, परमाणु उंर्जा विभाग का राष्ट्र की सेवा में परमाणु झांकियां भी मोदी के विजन का हिस्सा थीं.

राजपथ पर प्रदर्शित 25 झांकियों में से 16 राज्यों एवं नौ केन्द्र सरकार के विभागों की झांकियां थीं जिनमें गुजरात एवं केन्द्रीय विभागों की कुल दस झांकियां मोदी मिशन से जुडी थीं

13/01/2015

this is

12/01/2015

Address

Careerplus Baraut Dsitt Baghpat
Baghpat
250609

Telephone

9219495184

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Indin Student Union भारतीय छात्र संघ posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share