04/07/2026
सेवा और साधना का अद्भुत संगम…
एक डॉक्टर का जीवन केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। जब कोई चिकित्सक दिन-रात अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से अनगिनत लोगों को नया जीवन देता है, तब वह केवल अपना कर्तव्य नहीं निभाता, बल्कि ईश्वर की सेवा करता है।
लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं, जो केवल शरीर का उपचार ही नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान का मार्ग भी चुनते हैं। दिनभर अस्पताल में मरीजों की सेवा और शाम को भगवान की कथा के माध्यम से लोगों को जीवन का सच्चा उद्देश्य समझाना, यह वास्तव में विरले लोगों के ही बस की बात है।
डॉ. धवल दलाल (हरिकाधीश प्रभु), डॉ. विवेकानंद शानभाग (विश्वरूप प्रभु) और डॉ. गौर विलास प्रभु जैसे व्यक्तित्व यह सिद्ध करते हैं कि चिकित्सा और अध्यात्म एक-दूसरे के पूरक हैं। एक ओर वे रोगी के शरीर को स्वस्थ करने का प्रयास करते हैं, तो दूसरी ओर भगवान श्री जगन्नाथ की कथा के माध्यम से मन और आत्मा को शांति तथा मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। आज के समय में, जब अधिकांश लोग केवल सफलता और भौतिक उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहे हैं, ऐसे व्यक्तित्व हमें याद दिलाते हैं कि जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि केवल सफल होना नहीं, बल्कि सार्थक होना है। अपने पेशे को 100% समर्पण के साथ निभाना और साथ ही मानव जीवन के परम लक्ष्य भगवत् प्रेम और मुक्ति की ओर स्वयं चलना तथा दूसरों को भी प्रेरित करना, सचमुच अद्भुत, अकल्पनीय और प्रेरणादायक है।
ऐसे सभी सेवाभावी और आध्यात्मिक चिकित्सकों को सादर प्रणाम। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे समाज को स्वास्थ्य के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रकाश भी प्रदान करते रहें।
"जहाँ सेवा में समर्पण हो और साधना में भगवान का स्मरण, वहीं जीवन अपनी सर्वोच्च पराकाष्ठा को प्राप्त करता है। 🙏