14/01/2026
आज मकर संक्रांति का पर्व है। पौष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। यह पर्व देशभर में विभिन्न नामों से जाना जाता है। उत्तराखंड में इसे उत्तरायणी, कर्नाटक में संक्रांति, तमिलनाडु और केरल में पोंगल, पंजाब-हरियाणा में माघी, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण तथा उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। वहीं पंजाब में इस पर्व को लोहड़ी के रूप में संक्रांति से एक दिन पूर्व ही मनाया जाता है।
पुराणों के अनुसार, इस दिन तीर्थ या गंगा में स्नान और दान करने से पुण्य एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के अवसर पर पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण करना विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन खिचड़ी का भोग लगाया जाता है तथा अनेक स्थानों पर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए खिचड़ी का दान भी किया जाता है। तिल और गुड़ का प्रसाद बांटने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके अतिरिक्त, कई क्षेत्रों में पतंग उड़ाने की परंपरा है। इस दिन व्रत, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से मकर संक्रांति का भारत में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर जाते हैं। शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं, इसलिए यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन का प्रतीक भी माना जाता है।
इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर झुकने लगता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य भगवान मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
अधिकांश हिंदू पर्व चंद्रमा पर आधारित पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं, जबकि मकर संक्रांति सूर्य पर आधारित पंचांग की गणना से मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इस पर्व से ऋतु परिवर्तन की प्रक्रिया आरंभ होती है। शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और बसंत ऋतु का आगमन प्रारंभ हो जाता है। इसके साथ ही दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं।
आप सभी को परिवार सहित मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏🏻🙏🏻