आजमगढ़ के शिक्षक :: आवाज एक बदलाव की

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क्या हम अपने समाज और देश के लिए एक मजबू?

21/06/2020

है समाज का नियम भी ऐसा पिता सदा गंभीर रहे,
मन में भाव छुपे हो लाखो,आँखों से न नीर बहे।
करे बात भी रुखी-सुखी, बोले बस बोल हिदायत के,
दिल में प्यार है माँ जैसा ही, किन्तु अलग तस्वीर रहे।।
❤️ 💓Happy Father's Day💓❤️

16/06/2020

जिसदिन बच्चे यह सीख गए कि कैसे सोचे भरोसा रखिये उसके बाद उन्हें कभी भी यह नही बताना पड़ेगा कि क्या सोचे। बच्चों में आतनिर्भरता का विकास करने का यह सबसे सरल और आसान तरीका हैं।

14/06/2020

आप तो किसान भी नही थे जो कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे,आप तो ब्यापारी भी नही थे कि ब्यापार में नुकसान के तले दबे हुए थे,ऐसा भी तो नही था कि आप फिल्मों में फ्लॉप थे।
सबकुछ तो था आपके पास धन- दौलत,नाम-शोहरत।।
आप तो चले गए लेकिन लोगों के लिए एक बहुत बड़ा सवाल छोड़ गए।आखिर कौन सी ऐसी मजबूरियाँ आ जाती हैं जो इंसान को इस सोच पर खड़ा कर देती हैं जहां वह उन अपनो को भूल जाता है जो उससे बेइंतहा मोहब्बत करते हैं।
काश ब्यक्ति ऐसे हालात में उस समय की अपनी खुद की गलत सोच और समझ से ऊपर उठकर एक बार उनके बारे में भी सोच लेता जो उसके जाने के बाद जिंदगी भर घुट-घुट कर जीते हैं तो शायद कोई भी ब्यक्ति ऐसा कदम नही उठाता।
😢😢😢😢😢RIP😢😢😢😢😢

03/06/2019

संघर्ष भाषा का ----- #मातृभाषा #राष्ट्रभाषा #राजभाषा

कल हमने देखा कि किस तरह से तमिलनाडु में हिन्दी भाषा को लेकर एक उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गयी।
अब सवाल यह भी उठता है कि क्या इसतरह कि चेतावनी अंग्रेजी भाषा को लेकर भी मिल सकती है शायद,हाँ कहना थोड़ा सा मुश्किल हो खैर छोड़िये यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसे कि पड़ोसी का भला नही होना चाहिए भले ही उसकी कीमत कुछ भी हो।

हम उस देश मे रहते हैं जिस देश कि संस्कृति और मूल ही अनेकता में एकता है,जिस देश का आभूषण पग-पग पर बदलती हुई भाषा और रंग रूप है,और इस पग-पग पर बदलती हुई भाषा और रंगरूप को संजोए रखना भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती हैं।लेकिन जब हम इनसबसे आगे जाकर एक देश की कल्पना करते हैं तब कही न कही हमे एक बिंदु पर केंद्रित होना पड़ता है,और तब हमें यह भी ख्याल रखना पड़ता कि आखिर वे कौन से बिंदु हैं जिससे हमारी संस्कृति और सभ्यता भी और मजबूत बन सकती हैं। जब हम एक क्षेत्र में रहते है तब हमारी क्षेत्रीय भाषा हमारे लिए गर्व का विषय होना चाहिए लेकिन जब हम एक देश की कल्पना करते हैं तब यह क्लेश का कारण नही बनना चाहिए।

सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हम परिस्थियों का आकलन सिर्फ वर्तमान को ध्यान में रखकर ही करते हैं।जबकि आज के वर्तमान की नींव बीता हुआ कल होती है,और इसको मजबूती आने वाला कल देता हैं।

इन सब तकरारों के बीच हमे लॉर्ड मैकाले का 1835 में ब्रिटिश संसद में दी गयी यह स्पीच भी सुननी चाहिए,जिसमे उन्होंने कहा कि-

--मैंने भारत की लंबाई और चौड़ाई में यात्रा की है और मैंने एक व्यक्ति को नहीं देखा है जो एक भिखारी है, जो एक चोर है। ऐसी दौलत मैंने इस देश में देखी है, ऐसे उच्च नैतिक मूल्य, ऐसे कैलिबर के लोग, कि मुझे नहीं लगता कि हम कभी इस देश पर विजय प्राप्त करेंगे, जब तक कि हम इस राष्ट्र की रीढ़ नहीं तोड़ेंगे, जो उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत है, और इसलिए, मैं प्रस्ताव करता हूं कि हम उसकी पुरानी और प्राचीन शिक्षा प्रणाली, उसकी संस्कृति को बदल दें, क्योंकि अगर भारतीयों को लगता है कि वह सब कुछ विदेशी और अंग्रेजी अच्छा है और अपने से बड़ा है, तो वे अपना आत्म-सम्मान खो देंगे, उनका मूल स्व- संस्कृति और वे वही बन जाएंगे जो हम उन्हें चाहते हैं, एक सही मायने में वर्चस्व वाला राष्ट्र। ”

भाषा सम्प्रेषण का माध्यम और संपर्क का साधन होने के साथ-साथ संस्कृति व संस्कार के संरक्षण,संवर्धन व संवहन का साधन हो न कि टकराव का कारण।
मुकेश कुमार सिंह

16/08/2018

व्यक्ति नही एक व्यक्तित्व😢

20/11/2017
Photos 14/05/2017

Wish u all happy Mother's Day

Photos 04/03/2016

Education is the best friend. An educated person is respected everywhere. Education beats the beauty and the youth

Photos 06/09/2015
Photos 05/04/2015

बचपन की वोह अमीरी न जाने कहाँ खो गई?
वरना बारिश के पानी में हमारे कई जहाज चला करते थे l

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