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मेरे नानी का घर फर्रुखाबाद में था।  एक ट्रेन हुआ करती थी, जिसके आगे भाप का काला इंजन लगा होता था। आज के बच्चों को शायद य...
25/09/2026

मेरे नानी का घर फर्रुखाबाद में था। एक ट्रेन हुआ करती थी, जिसके आगे भाप का काला इंजन लगा होता था। आज के बच्चों को शायद यह बात कुछ अजीब लगे, लेकिन हमारे बचपन में हम उसे ट्रेन नहीं, छुक-छुक गाड़ी कहा करते थे। और सच कहूँ तो उस गाड़ी में बैठकर नानी के घर जाना मेरे बचपन की उन यादों में से है, जिन्हें उम्र के इतने लंबे सफर के बाद भी मन ने जाने क्यों बिल्कुल संभालकर रखा है।

उस समय ट्रेन आज की तरह चुपचाप नहीं चलती थी। उसके आने की खबर बहुत पहले मिल जाती थी। दूर कहीं से इंजन की आवाज सुनाई देती, फिर काले धुएँ का गुबार दिखाई देता और थोड़ी देर बाद वह काला-काला इंजन सामने आ जाता। पहले उसकी आवाज आती—छू... छू... छू...
फिर पहियों की छुक-छुक तेज होती जाती और उसके पीछे लगे लाल रंग के छोटे-छोटे डिब्बे भी जैसे उसके साथ भागने लगते। और फिर अचानक उसका वह लंबा हॉर्न—कूऊऊऊऊऊऊऊऊ...!
पता नहीं उस आवाज में ऐसा क्या था कि मेरे जैसे छोटे बच्चे का मन एकदम खिल उठता था। मुझे इंजन से न जाने क्यों बहुत प्यार था। उसके काले शरीर को देखते रहना, ऊपर से निकलते धुएँ को देखते रहना, उसकी आवाज सुनना और खिड़की के पास बैठकर यह देखना कि धुआँ हवा में पीछे की ओर कैसे भाग रहा है, मेरे लिए यात्रा से कम खुशी की बात नहीं थी। मुझे तब क्या मालूम था कि किसी दिन यही इंजन मेरे बचपन की सबसे प्यारी यादों में बदल जाएगा।

एक बार नानी के घर कोई शादी-ब्याह का कार्यक्रम था। मम्मी और घर के बाकी लोग पहले ही फर्रुखाबाद चले गए थे। पीछे रह गए थे सिर्फ मैं और पिता जी। सुबह करीब पाँच बजे की ट्रेन थी। मुझे आज ठीक-ठीक समय तो याद नहीं, लेकिन शायद दोपहर के आसपास वह हमें फर्रुखाबाद पहुँचाती थी। सुबह-सुबह मैं बड़े उत्साह से तैयार हुआ था। नानी के घर जाना था और ऊपर से ट्रेन में बैठकर जाना था, इसलिए मेरे लिए उस दिन से बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती थी। लेकिन एक बात मुझे तब बड़ी अजीब लगी थी—मैं तो जैसे राजा बाबू बनकर तैयार हुआ था, जबकि पिता जी ने घर में पहनने वाले बिल्कुल सामान्य कपड़े ही पहन रखे थे। उस उम्र में मुझे लगा कि नानी के घर जा रहे हैं तो पिता जी को भी अच्छे कपड़े पहनने चाहिए थे। मुझे कहाँ मालूम था कि कुछ घंटों बाद यही सामान्य कपड़े अपने भीतर भाप के इंजन की एक पूरी कहानी समेटे होंगे।

हम उस समय की ट्रेन को देखकर ही खुश हो जाते थे। मुश्किल से चार-पाँच डिब्बे होते थे। लाल रंग के डिब्बे और आगे काला-काला इंजन। लकड़ी की सीटें, खुली खिड़कियाँ और बाहर भागती हुई दुनिया। आज के डिब्बों की तरह न इतनी भीड़ में चमकते हुए सामान, न हर जगह खाने-पीने की दुकानें और न यात्रा को लेकर इतनी भागदौड़। यात्रा जैसे धीरे-धीरे हमारे सामने खुलती थी। बच्चा खिड़की के पास बैठता और बाहर की दुनिया को अपनी आँखों से पकड़ने की कोशिश करता रहता। खेत आते, पेड़ आते, गाँव आते और फिर सब पीछे छूट जाता। कभी लगता हम बहुत तेज भाग रहे हैं और कभी लगता कि पेड़ और खेत ही हमारे साथ दौड़ रहे हैं।

उस समय हमारे यहाँ से कोई फर्रुखाबाद जाता तो टिकट नहीं लेता था और उधर से जो लोग आते थे, वे भी टिकट नहीं लेते थे। इसका कारण यह था कि मेरे नाना जी ट्रेन में गार्ड थे और मामा जी फर्रुखाबाद स्टेशन पर ही काम करते थे। इसलिए जब टीटी आता तो बस इतना बता देते कि हम लोग “शुक्ल जी के घर से हैं।” और बात खत्म। बचपन में मुझे यह सब बिल्कुल सामान्य लगता था। शायद मुझे लगता था कि ट्रेन में यात्रा करने के लिए टिकट से ज्यादा जरूरी यह जानना है कि आप किसके घर से हैं।

लेकिन उस यात्रा में मेरे लिए सबसे खास स्टेशन कन्नौज हुआ करता था। कानपुर से निकलने के बाद जब कन्नौज आता तो मुझे लगता कि अब फर्रुखाबाद आधा ही बचा है। बच्चों को समय और दूरी का हिसाब भी कितना अलग होता है। आज कोई पूछे कि फर्रुखाबाद कितने किलोमीटर है तो शायद हम किलोमीटर बताएँगे, लेकिन उस समय मेरे लिए कन्नौज एक पैमाना था—कन्नौज आ गया मतलब आधा रास्ता खत्म।

और कन्नौज की अपनी दो खास चीजें थीं—चाय और कलावती के गट्टे।

उस समय चाय आज की तरह हर आदमी की जिंदगी का हिस्सा नहीं थी। हमारे यहाँ मैंने लोगों को चाय कहते कम और “चा” या “चाह” कहते ज्यादा सुना था। स्टेशन पर चाय किसी मशीन से नहीं निकलती थी। एक बड़ा-सा पीतल का बर्तन होता था, नीचे अंगीठी जलती रहती थी और उसी में चाय गर्म होती रहती। पिता जी अपना सामान खोलते और उसमें से लोटा और गिलास निकालते। चाय वाले को एक रुपया या शायद पचास पैसे देते और चाय लोटे में भरवा लेते। आज यह दृश्य शायद किसी को कहानी जैसा लगे, लेकिन तब यात्रा में अपना लोटा और गिलास लेकर चलना बिल्कुल सामान्य था। लोग पानी भी साथ लेकर चलते थे और खाने का सामान भी। स्टेशन पर आज की तरह खाने-पीने का बाजार नहीं होता था। यात्रा का मतलब था—अपनी जरूरत की चीजें अपने साथ लेकर चलना।

और तभी थोड़ी देर बाद ट्रेन में वह आवाज सुनाई देती थी जिसका मुझे सबसे ज्यादा इंतजार रहता था—“गट्टे ले लो... गट्टे... कलावती के गट्टे!” मुझे आज तक नहीं मालूम कि कलावती कौन थीं, लेकिन बचपन में मेरे लिए कलावती कोई व्यक्ति नहीं थीं, वह एक मिठास थीं। कागज के बने छोटे-से डिब्बे में लंबे-लंबे आकार के करीब बारह मीठे गट्टे होते थे। आज मिठाई की दुकानों में सैकड़ों चीजें मिल जाती हैं, लेकिन उस समय ऐसी चीजें रोज-रोज देखने को नहीं मिलती थीं। हमारे घर से कोई फर्रुखाबाद जाता तो गट्टे जरूर लेकर जाता और फर्रुखाबाद से कोई कानपुर आता तो उसके हाथ में भी गट्टों के डिब्बे जरूर होते। किसी रिश्तेदार के लिए, किसी बच्चे के लिए या बस इसलिए कि रास्ते में किसी के चेहरे पर खुशी आ जाए।

उस दिन कन्नौज आते ही पिता जी ने चाय ली और थोड़ी देर बाद गट्टे वाला भी आ गया। पिता जी ने तुरंत चार डिब्बे खरीद लिए। चार डिब्बे देखकर मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ। मैंने तुरंत अपना हिसाब लगा लिया—ज्यादा से ज्यादा दो डिब्बे नानी के यहाँ देंगे, बाकी दो तो अपने हैं। उस उम्र में खुशी का गणित भी कितना सीधा होता है। लेकिन नानी के घर पहुँचने के बाद जब देखा कि पिता जी चारों डिब्बे चारों मामाओं के घर देने के लिए ले गए, तो मेरे मन का सारा हिसाब वहीं खत्म हो गया। चारों डिब्बे चले गए और मेरे हिस्से में बस उनकी याद रह गई।

कन्नौज से ट्रेन आगे चली तो गुरसहायगंज, फिर कमालगंज और आखिर में फतेहगढ़ आया। यहीं पहुँचकर पिता जी ने अपना सामान खोला और कपड़े बदलने लगे। मैं फिर हैरान था। सुबह तो मैं इसलिए हैरान हुआ था कि नानी के घर जाने के लिए पिता जी ने अच्छे कपड़े क्यों नहीं पहने और अब वह अचानक कपड़े क्यों बदल रहे हैं। उस समय मुझे भला क्या मालूम कि इसके पीछे मेरा वही प्यारा भाप का इंजन था।

अनवरगंज से फर्रुखाबाद जाने वाली उस रेलगाड़ी की एक और चीज मुझे बहुत याद आती है—रेल की पटरियों के साथ-साथ चलती हुई वह सड़क।

खिड़की से बाहर देखता तो लगता था जैसे हमारी छुक-छुक गाड़ी अकेली नहीं जा रही। उसके साथ एक सड़क भी लगातार दौड़ रही है। कभी वह पटरियों के बिल्कुल पास आ जाती, कभी थोड़ी दूर चली जाती और फिर अचानक किसी मोड़ से निकलकर दोबारा हमारे साथ आ खड़ी होती। ट्रेन अपनी रफ्तार में आगे भागती और सड़क भी जैसे अपनी पूरी ताकत लगाकर हमारे साथ दौड़ती रहती। बचपन में मुझे समझ ही नहीं आता था कि सड़क हमें पीछे छोड़ क्यों नहीं देती और हम उसे हमेशा आगे निकलकर फिर पीछे कैसे छोड़ आते हैं।

रास्ते में कहीं-कहीं सड़क के ऊपर बनी छोटी-सी क्रॉसिंग आती थी। जैसे ही ट्रेन उसके पास पहुँचती, सड़क पर चल रहे लोग और बैलगाड़ियाँ रुक जातीं। कोई साइकिल वाला उतरकर खड़ा हो जाता, कोई मोटरसाइकिल रोक देता और कोई दूर से ही ट्रेन को देखने लगता। हमें लगता जैसे पूरी सड़क हमारी छुक-छुक गाड़ी को रास्ता देने के लिए कुछ पल के लिए ठहर गई हो। ट्रेन क्रॉसिंग पार करती और हम खिड़की से गर्दन निकालकर पीछे देखते रहते कि अभी-अभी जो लोग रुके थे, वे अब क्या कर रहे होंगे।

कहीं सड़क के किनारे छोटा-सा गाँव दिखाई देता। मिट्टी या ईंट के घर, बाहर बंधे जानवर, किसी पेड़ के नीचे बैठे दो-चार आदमी और सड़क पर धीरे-धीरे चलता कोई किसान। कई बार लगता कि ट्रेन के साथ-साथ पूरा गाँव भी कुछ दूर तक चल रहा है। फिर अचानक खेत आ जाते और घर पीछे छूट जाते। गेहूँ या धान के खेतों के बीच से सड़क एक पतली लकीर की तरह आगे निकलती दिखाई देती और हमारी रेल उसकी बगल में अपनी काली पटरियों पर दौड़ती रहती।

सबसे मजेदार बात यह थी कि उस उम्र में मुझे सड़क और रेल में कोई फर्क ही नहीं लगता था। मुझे लगता था दोनों एक-दूसरे से दौड़ लगा रहे हैं। ट्रेन कभी आगे निकलती, फिर कोई मोड़ आने पर सड़क गायब हो जाती और थोड़ी देर बाद वही सड़क किसी दूसरे मोड़ से फिर सामने आ जाती। मैं खिड़की से बाहर आँखें गड़ाकर उसे ढूँढता रहता—“अरे, सड़क कहाँ गई?”

और जब वह फिर दिखाई देती तो मन को जैसे कोई अपना मिल जाता।

आज सोचता हूँ तो लगता है, वह सड़क केवल सड़क नहीं थी। वह भी मेरी उस यात्रा का हिस्सा थी। एक तरफ लोहे की पटरी पर धुआँ उड़ाती हमारी काली छुक-छुक गाड़ी थी और दूसरी तरफ मिट्टी-धूल से भरी वह सड़क, जिस पर गाँव, खेत, बैलगाड़ियाँ, साइकिलें और लोग अपनी-अपनी दुनिया लेकर हमारे साथ फर्रुखाबाद की ओर चले जा रहे थे।

उस छोटी-सी खिड़की से मुझे तब शायद पूरी दुनिया इतनी ही बड़ी दिखाई देती थी—एक ट्रेन, उसके साथ दौड़ती सड़क, रास्ते में आते छोटे-छोटे गाँव और हर थोड़ी देर में कोई क्रॉसिंग।

और मैं उन सबको पीछे छूटते हुए देखकर भी बार-बार आगे देखने लगता था, क्योंकि मुझे पता था कि कहीं आगे फर्रुखाबाद है… और फर्रुखाबाद में मेरी नानी का घर।

भाप के इंजन कोयले से चलते थे। जैसे-जैसे इंजन की गति बढ़ती थी, वैसे-वैसे उसके धुएँ के साथ कोयले की राख और छोटे-छोटे कण पीछे के डिब्बों तक उड़ते चले आते थे। खिड़की के पास बैठा आदमी तो जैसे उस धुएँ और राख का सबसे आसान शिकार होता था। वे दोनों हवा के साथ अंदर आते और बालों से लेकर कपड़ों तक अपना निशान छोड़ जाते। अगर कपड़े सफेद हों तो यात्रा खत्म होते-होते उनकी सफेदी का पता लगाना मुश्किल हो जाता। इसलिए अपनी ससुराल जाने वाले पिता जी फर्रुखाबाद से करीब पाँच किलोमीटर पहले फतेहगढ़ में कपड़े बदल लेते थे। उस समय मुझे यह बात समझ नहीं आई थी, लेकिन आज सोचता हूँ तो लगता है कि मेरे पिता जी ने यात्रा की एक ऐसी समझ अपने अनुभव से सीख रखी थी, जो उस समय के बच्चे किताबों में नहीं सीख सकते थे।

फर्रुखाबाद स्टेशन पर मामा जी हमारा इंतजार कर रहे थे। हमारे लिए वे एक इक्का लेकर आते थे। इक्का भी आज के बच्चों के लिए शायद किसी पुराने किस्से का शब्द हो गया है। इक्का तांगे से अलग होता था। उसमें दो-तीन लोग बैठते थे, जबकि तांगे में चार-पाँच लोग आ जाते थे। दोनों घोड़े से चलते थे, दोनों आगे से उठे हुए होते थे और दोनों पर सजावट होती थी, लेकिन इक्का छोटा और थोड़ा निजी-सा लगता था। कानपुर में खड़खड़ा भी होता था, जो मुख्यतः सामान ढोने के काम आता था। आज की सड़क पर कार, बस और बाइक के बीच उस समय घोड़े की टाप और इक्के के पहियों की आवाज भी जीवन का हिस्सा हुआ करती थी।

हम दोनों इक्के पर बैठकर नानी के घर चल पड़े। नानी का घर स्टेशन से बहुत दूर नहीं था, बमुश्किल दो किलोमीटर, बजरिया निहाल चन्द्र। लेकिन मेरे लिए उस समय वह आखिरी दो किलोमीटर भी किसी बड़ी यात्रा का हिस्सा था। ट्रेन पीछे छूट गई थी, लेकिन उसका धुआँ जैसे अभी भी मेरे कपड़ों में था। कानों में उसका हॉर्न था, आँखों में लाल डिब्बे थे और मन में वही चार गट्टों का हिसाब। इक्के के पहिए धीरे-धीरे घूम रहे थे और मुझे मालूम था कि बस थोड़ी देर में नानी सामने होंगी।

उस समय मुझे क्या पता था कि जिंदगी में एक दिन ऐसा भी आएगा जब मैं पचास साल का हो जाऊँगा और पीछे मुड़कर देखूँगा तो नानी का वह घर, फर्रुखाबाद का वह स्टेशन, कन्नौज का वह पीतल का बर्तन, लोटे में भरी चाय, कलावती के गट्टे, फतेहगढ़ में पिता जी के बदले हुए कपड़े और वह इक्का—सब एक साथ मेरी आँखों के सामने खड़े हो जाएँगे।

आज पचास साल का हो गया हूँ। जिंदगी ने इस बीच न जाने कितनी यात्राएँ कराईं। न जाने कितनी ट्रेनें देखीं, कितने स्टेशन आए और कितने पीछे छूट गए। अब ट्रेनें बहुत तेज चलती हैं। उनके डिब्बे आरामदायक हैं, खिड़कियाँ बंद रहती हैं, चाय कप में मिलती है और रास्ते की हर जरूरत प्लेटफॉर्म पर मिल जाती है। लेकिन जाने क्यों उन सुविधाओं के बीच मन कभी-कभी उसी पुरानी ट्रेन को ढूँढ़ता है। उस काले इंजन को, जिसकी धुआँ छोड़ती हुई देह मुझे इतनी प्यारी थी; उन लाल डिब्बों को, जिनकी लकड़ी की सीट पर बैठकर मुझे लगता था कि दुनिया मेरे साथ दौड़ रही है; उस हॉर्न को, जिसकी आवाज आज भी कहीं भीतर सुनाई देती है।

अब समझ आता है कि उस बच्चे को भाप के इंजन से इतना प्रेम क्यों था। वह इंजन सिर्फ कोयले और पानी से नहीं चलता था, वह मेरी छोटी-सी दुनिया को अपने साथ लेकर चलता था। उसकी एक सीटी मुझे नानी के घर पहुँचा देती थी, उसकी छुक-छुक मुझे मामाओं के पास ले जाती थी और उसके पीछे उड़ता हुआ धुआँ जैसे मेरे बचपन को आसमान में लिखता हुआ चला जाता था।

शायद इसलिए आज भी किसी पुराने इंजन की तस्वीर सामने आ जाए तो मैं उसे कुछ देर तक देखता रहता हूँ। मुझे उसमें कोई पुरानी मशीन नहीं दिखाई देती। मुझे उसमें वही बच्चा दिखाई देता है जो कभी कानपुर अनवरगंज स्टेशन पर पिता जी का हाथ पकड़े खड़ा था और सामने खड़े काले इंजन को देखकर खुशी से भर गया था।

वह बच्चा अब पचास साल का हो चुका है।

लेकिन सच कहूँ तो वह पूरी तरह बड़ा कभी हुआ ही नहीं।

वह आज भी कहीं भीतर बैठा है और किसी सुबह अचानक अगर दूर से कोई आवाज आए—छू... छू... छू...—तो उसकी आँखें आज भी उसी तरह चमक उठती हैं।

उसे लगता है...

नानी के घर जाने वाली छुक-छुक गाड़ी फिर आ गई है।

25/09/2026

चिता से अचानक आने लगी तेज आवाजें!
मंजर देखकर सहम गए लोग

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर सीधा और तीखा हमला बोला ह...
25/09/2026

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर सीधा और तीखा हमला बोला है। राहुल ने एक टाइमलाइन जारी करते हुए आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने दिसंबर 2023 में एक नया कानून बनाकर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'इम्यूनिटी' (सुरक्षा) दी, क्योंकि वह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के लिए काम कर रहे थे। राहुल ने खुलासा किया कि 17 फरवरी 2025 को उन्होंने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर अपनी कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री को एक 'डिसेंट नोट' (असहमति पत्र) भी भेजा था, जिसे पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। कांग्रेस नेता का दावा है कि वह पिछले तीन सालों से लगातार सबूतों के साथ चुनाव प्रक्रिया में हो रही धांधली को उजागर कर रहे हैं।

 #आजमगढ़ फरिहा में हौसला बुलंद  #चोरों का धावा: ओम ज्वैलर्स का शटर चाड़कर 35 लाख के आभूषण पर किया हाथ साफ, पुलिस जांच मे...
25/09/2026

#आजमगढ़ फरिहा में हौसला बुलंद #चोरों का धावा: ओम ज्वैलर्स का शटर चाड़कर 35 लाख के आभूषण पर किया हाथ साफ, पुलिस जांच में जुटी*

*फरिहा, आजमगढ़।* #निजामाबाद थाना क्षेत्र के फरिहा चौकी से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित ओम ज्वैलर्स की दुकान में बीती रात बड़ी चोरी की वारदात हुई। हौसला बुलंद अज्ञात चोरों ने दुकान का शटर चाड़कर अंदर घुसकर लगभग 35 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण चोरी कर लिए।

दुकान के मालिक पवन कुमार पुत्र राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि शुक्रवार सुबह लगभग 4 बजे जब वे बाहर निकले तो दुकान का शटर खुला देखकर अवाक रह गए। अंदर जाकर देखा तो सारा सामान बिखरा पड़ा था। चोर अलमारी तोड़कर उसमें रखे लगभग 100 ग्राम सोने के आभूषण और करीब 12 किलो चांदी के आभूषण लेकर फरार हो गए।

सूचना पर प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह मय फोर्स और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू कर दिया है और साक्ष्य संकलन में जुट गई है।

जान से मारने की नियत से पत्नी को फांसी पर लटकाने वाला वांछित अभियुक्त गिरफ्तार*थाना निजामाबाद पुलिस ने वांछित अभियुक्त क...
24/09/2026

जान से मारने की नियत से पत्नी को फांसी पर लटकाने वाला वांछित अभियुक्त गिरफ्तार*

थाना निजामाबाद पुलिस ने वांछित अभियुक्त को मोलनापुर नहर पुलिया से किया गिरफ्तार*

*पूर्व की घटना–* दिनांक 23.09.2026 को वादिनी शशिकला पत्नी राकेश यादव निवासी बुद्धसेनपुर, थाना निजामाबाद, जनपद आजमगढ़ द्वारा तहरीर दी गयी कि उसके पति राकेश यादव पुत्र मुन्ना उर्फ मुन्नीलाल यादव द्वारा दिनांक 09.09.2026 को रात्रि करीब 09:00 बजे उसके साथ मारपीट करते हुए जान से मारने की नियत से फांसी पर लटका दिया गया। जिसके आधार पर थाना निजामाबाद पर मु0अ0सं0- 238/2026 धारा 85, 109(1), 115(2) बीएनएस पंजीकृत कर विवेचना प्रारम्भ किया गया ।

*गिरफ्तारी का विवरण–* आज दिनांक 24.09.2026 को उ0नि0 अखिलेश नारायण सिंह मय हमराह द्वारा मुकदमा उपरोक्त से सम्बन्धित अभियुक्त राकेश यादव पुत्र मुन्ना उर्फ मुन्नीलाल, उम्र करीब 33 वर्ष, निवासी बुद्धसेनपुर, थाना निजामाबाद, जनपद आजमगढ़ को मोलनापुर नहर पुलिया से समय करीब 07:35 बजे गिरफ्तार कर चालान मा0 न्यायालय किया गया ।

*गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण–* राकेश यादव पुत्र मुन्ना उर्फ मुन्नीलाल यादव, निवासी बुद्धसेनपुर, थाना निजामाबाद, जनपद आजमगढ़, उम्र करीब 33 वर्ष।
*पंजीकृत अभियोग–* मु0अ0सं0- 238/2026 धारा 85, 109(1), 115(2) बीएनएस, थाना निजामाबाद, जनपद आजमगढ़।
*आपराधिक इतिहास–*
1. मु0अ0सं0 138/2021 धारा 147, 149, 323, 325, 352, 427, 504, 506 भादवि, थाना निजामाबाद, जनपद आजमगढ़।
*गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम–* उ0नि0 अखिलेश नारायण सिंह, का0 धर्मवीर प्रजापति, रि0का0 अभिषेक पटेल थाना मुबारकपुर जनपद आजमगढ़।

मटेरा का अगला विधायक कौन? 🤔 मटेरा की राजनीति में इस समय सबसे ज़्यादा चर्चा इन दो युवा चेहरों की है। अगर आने वाले समय में...
24/09/2026

मटेरा का अगला विधायक कौन? 🤔

मटेरा की राजनीति में इस समय सबसे ज़्यादा चर्चा इन दो युवा चेहरों की है। अगर आने वाले समय में मुकाबला इन दोनों के बीच हुआ, तो आप किसे चुनेंगे?

1️⃣ मारिया शाह 🟢 2️⃣ शौकत अली 🟠

First फोटो मारिया शाह जी का है और दूसरी फोटो शौकत अली साहब का है दोनों फोटो को फुल साइज 8k Full HD कंपैरिजन इमेज बनाओ

🗳️ मटेरा की सियासत में आमने-सामने दो बड़े चेहरे! 🤔
मटेरा विधानसभा क्षेत्र (284), बहराइच की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर तस्वीर अब पहले से ज्यादा चर्चा में है। एक तरफ मौजूदा विधायक मारिया अली शाह हैं, जो 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मटेरा से निर्वाचित हुई थीं। 2022 में उन्होंने भाजपा के अरुण वीर सिंह को 10,428 वोटों के अंतर से हराया था। �
Uttar Pradesh Legislative Assembly +1
दूसरी तरफ शौकत अली हैं, जो AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं। जून 2026 में AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उन्हें 2027 विधानसभा चुनाव के लिए मटेरा से पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया था। �

यानी आने वाले चुनाव में मटेरा की राजनीति में SP और AIMIM के बीच मुकाबले की चर्चा ने नया रूप ले लिया है। हालांकि चुनाव का अंतिम परिणाम जनता के मतदान से ही तय होगा।
🔴 मारिया अली शाह
मटेरा विधानसभा की वर्तमान विधायक
2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता
2022 में उन्हें 1,02,255 वोट मिले थे
वर्तमान में 18वीं उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य हैं। �
🟠 शौकत अली
AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष
2027 के लिए मटेरा से AIMIM उम्मीदवार घोषित
पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार और चुनावी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका। �

अब मटेरा की जनता के सामने चर्चा का विषय है कि 2027 में क्षेत्र की राजनीति किस दिशा में जाती है?
क्या मौजूदा विधायक के कामकाज और पिछले कार्यकाल के आधार पर जनता अपना फैसला करेगी, या AIMIM के नए उम्मीदवार के आने से चुनावी समीकरण बदलेंगे?
📢 आप मटेरा विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले हैं तो अपनी राय जरूर लिखिए—लेकिन चर्चा सम्मानजनक और तथ्यों पर आधारित रखें।
मटेरा का अगला विधायक कौन होगा?
यह फैसला किसी पोस्ट, सर्वे या सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि मटेरा की जनता के वोट से होगा। 🗳️

#मटेरा #मटेरा_विधानसभा #बहराइच #उत्तरप्रदेश #मारिया_शाह #शौकत_अली #राजनीति #उत्तरप्रदेश_राजनीति #मटेरा_की_जनता #मटेरा_चुनाव #विधानसभा_चुनाव #जनता_की_राय

 #फर्जी रजिस्ट्री व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भूमि हड़पने के मामले में मो0 हैदर गिरफ्तार आजमगढ़ जिले की जीयनपुर कोतवाली ...
24/09/2026

#फर्जी रजिस्ट्री व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भूमि हड़पने के मामले में मो0 हैदर गिरफ्तार

आजमगढ़ जिले की जीयनपुर कोतवाली पुलिस ने फर्जी रजिस्ट्री व कूट रचित दस्तावेज तैयार कर भूमि हड़पने के मामले में गैंगस्टर एक्ट के वांछित अभियुक्त मोहम्मद हैदर को चुनहवा चौराहे के पास से गिरफतार किया है ।
पूर्व की घटना
दिनांक 07.04.2025 को वादी मुकदमा गौतम प्रसाद चौरसिया पुत्र स्व0 रामायन चौरसिया निवासी नगर पंचायत जीयनपुर, तहसील सगड़ी, जनपद आजमगढ़ द्वारा शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया कि विपक्षीगण मो0 हैदर, अशहद व मो0 आजम द्वारा फर्जी व्यक्ति खड़ा कर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर भूमि की फर्जी रजिस्ट्री करायी गयी। प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना जीयनपुर पर मु0अ0सं0- 130/2025 धारा- 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस पंजीकृत कर अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था ।
अभियुक्तों की आपराधिक गतिविधियों के दृष्टिगत प्रभारी निरीक्षक जीयनपुर की रिपोर्ट के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट आजमगढ़ द्वारा दिनांक 13.09.2026 को गैंग चार्ट अनुमोदित किया गया। तत्पश्चात दिनांक 23.09.2026 को थाना जीयनपुर पर मु0अ0सं0- 391/2026 धारा 2(b)(i)/3(1) उ0प्र0 गिरोह बन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 पंजीकृत किया गया ।

गिरफ्तारी का विवरण
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ0 अनिल कुमार* के निर्देशन में वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु चलाये जा रहे अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं क्षेत्राधिकारी सगड़ी के कुशल निर्देशन में निरीक्षक अपराध शम्भूनाथ यादव मय हमराह पुलिस बल द्वारा दिनांक 23.09.2026 को मालटारी में संदिग्ध व्यक्ति/वाहन चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान गैंगेस्टर एक्ट के मुकदमे से सम्बन्धित अभियुक्त मो0 हैदर पुत्र निजामुद्दीन निवासी रौजा सैफन पट्टी, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़ को चुनहवा चौराहा के पास से नियमानुसार पुलिस हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्यवाही करते हुए मा0 न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण
मो0 हैदर पुत्र निजामुद्दीन निवासी रौजा सैफन पट्टी, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।
*पंजीकृत अभियोग–* मु0अ0सं0- 391/2026 धारा 2(b)(i)/3(1) उ0प्र0 गिरोह बन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।

आपराधिक इतिहास

1.मु0अ0सं0 17/2016 धारा 147, 427, 504, 506 भादवि, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।
2.मु0अ0सं0 130/2025 धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।
3.मु0अ0सं0 391/2026 धारा 2(b)(i)/3(1) उ0प्र0 गिरोह बन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।

गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम

1.नि0अ0 शम्भूनाथ यादव, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।
2.का0 अजय कुमार प्रथम, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।
3.का0 बुटाई शाह, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।
4.रि0का0 प्रशान्त सिंह, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।
5.रि0का0 मो0 शाहिद, थाना जीयनपुर, जनपद आजमगढ़।

लगता है यूपी का सुल्तान बदलने वाला है, ये भीड़ आज रायबरेली की है जहां अखिलेश जी सिर्फ चाय पीने गए हैं।   वीडियो 📩
24/09/2026

लगता है यूपी का सुल्तान बदलने वाला है, ये भीड़ आज रायबरेली की है जहां अखिलेश जी सिर्फ चाय पीने गए हैं।

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सऊदी अरब में सोते समय आजमगढ़ के क्रेन चालक की मौत, गांव पहुंचा शव तो मचा कोहराम; पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हालगंभीरपु...
23/09/2026

सऊदी अरब में सोते समय आजमगढ़ के क्रेन चालक की मौत, गांव पहुंचा शव तो मचा कोहराम; पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

गंभीरपुर, आजमगढ़। सऊदी अरब में क्रेन चालक के रूप में काम करने वाले आजमगढ़ के 40 वर्षीय चंद्रिका यादव उर्फ राजेश यादव की सोते समय अचानक मौत हो गई। शनिवार सुबह जब उनका शव ताबूत में बंद होकर पैतृक गांव सिंघड़ा पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। शव देखते ही पत्नी, मां और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गमगीन माहौल में गांव के लोग भी परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचते रहे।

चंद्रिका यादव पुत्र विजई यादव सऊदी अरब के रियाद शहर में क्रेन चालक के तौर पर काम करते थे। परिजनों के मुताबिक, 12 सितंबर की शाम वह रोज की तरह ड्यूटी से लौटे थे। खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने चले गए। इसी दौरान रात में सोते समय अचानक उनकी मौत हो गई। उनके साथ रहने वाले लोगों ने घटना की जानकारी परिवार को दी तो घर में मातम छा गया।

कागजी कार्रवाई के बाद भारत लाया गया शव

मौत की सूचना मिलने के बाद परिजनों ने शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की। जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद शव को हवाई मार्ग से दिल्ली लाया गया। इसके बाद सड़क मार्ग से शनिवार सुबह शव को उनके पैतृक गांव सिंघड़ा लाया गया।

चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

शव घर पहुंचते ही पत्नी रेनू यादव, मां लालती यादव और बच्चों की चीख-पुकार से पूरा गांव गमगीन हो गया। चंद्रिका दो भाइयों में बड़े थे। उनके परिवार में दो पुत्र सक्षम और किशन तथा दो पुत्रियां सेजल और साक्षी हैं। चारों बच्चे अविवाहित हैं।

परिजनों के मुताबिक, चंद्रिका ही परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने भरण-पोषण को लेकर भी संकट खड़ा हो गया है। घटना के बाद से पूरे गांव में शोक का माहौल है।

QR कोड से भुगतान का नाटक, चेन लेकर भागे तो पुलिस पर फायरिंग; 2 बदमाश गिरफ्तार, 2 पिस्टल-2 तमंचे समेत हथियारों का जखीरा ब...
23/09/2026

QR कोड से भुगतान का नाटक, चेन लेकर भागे तो पुलिस पर फायरिंग; 2 बदमाश गिरफ्तार, 2 पिस्टल-2 तमंचे समेत हथियारों का जखीरा बरामद

तहबरपुर। आजमगढ़ के तहबरपुर थाना क्षेत्र के मंझारी बाजार में राज ज्वैलर्स की दुकान से सोने की चेन लूटकर भाग रहे दो बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों बदमाशों ने पहले क्यूआर कोड के जरिए भुगतान करने का नाटक किया और खाते में रुपये नहीं आने पर सोने की चेन लेकर भाग निकले। पीछा किए जाने पर बदमाशों ने असलहा निकालकर फायरिंग कर दी। स्थानीय लोगों ने साहस दिखाते हुए दोनों को बैरमपुर गांव में घेरकर पकड़ लिया।

1.10 लाख की चेन लेकर भागे

पुलिस के अनुसार, 17 सितंबर को दो युवक राज ज्वैलर्स की दुकान पर पहुंचे और करीब 8 ग्राम वजन की सोने की चेन, जिसकी कीमत लगभग 1.10 लाख रुपये बताई गई है, खरीदने की बात कही। दोनों ने क्यूआर कोड से भुगतान करने का नाटक किया। दुकानदार के खाते में रकम नहीं पहुंची, लेकिन दोनों चेन लेकर वहां से भागने लगे।

दुकानदार और स्थानीय लोगों ने उनका पीछा किया तो आरोपियों ने कथित तौर पर असलहा निकालकर फायरिंग कर दी। इसके बाद लोगों ने बैरमपुर गांव में दोनों को घेर लिया और पकड़ लिया। सूचना मिलने पर चौकी प्रभारी सूर्यपाल यादव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों को हिरासत में ले लिया।

2 पिस्टल, 2 तमंचे और 18 कारतूस बरामद

पुलिस ने तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से दो .32 बोर पिस्टल, दो .315 बोर तमंचे, 18 जिंदा कारतूस, एक खोखा और तीन खाली मैगजीन बरामद करने का दावा किया है। इसके अलावा एक चापड़, पेचकस, रेती और चोरी की बाइक UP50BL5646 भी बरामद हुई।

चोरी की बाइक पर बदलते थे नंबर प्लेट

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बरामद बाइक को 31 अगस्त को न्यायालय के पास वाहन स्टैंड से चोरी किया था। इसके बाद बाइक की नंबर प्लेट बदलकर वारदातों में इस्तेमाल करते थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चन्द्रेश यादव निवासी जमीनबारी, थाना निजामाबाद और प्रिंस चौहान निवासी कोटवा, थाना रानी की सराय के रूप में हुई है। पुलिस ने मामले में मु.अ.सं. 142/2026, धारा 109, 309(4) बीएनएस और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, वारदात में शामिल छह अन्य साथियों की तलाश की जा रही है।

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