27/05/2022
" शांति से ज़्यादा क्रांति मगन करती है, शील से अधिक अश्लील, अराधना से ज़्यादा दहाड़ना, बनाने से ज़्यादा बिगाड़ना, धीर से ज़्यादा अधीर, से चुपचाप से ज़्यादा मारधाप."
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अस्सी की होने चली दादी ने विधवा होकर परिवार से पीठ कर खटिया पकड़ ली। परिवार उसे वापस अपने बीच खींचने में लगा। प्रेम,...