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Tech tube 26 "शिक्षा🖋️ ही हमारी शान है, मुस्कुराहट😊 ही हमारी पहचान है। और भारत 🇮🇳देश ही हमारी जान है।।
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यह तुम्हारे- हमारे दरमियान जो चंद लम्हों के फासले  हैऐसा लगे मानो दरिया से समंदर की दूरी होबादल से धरती की मजबूरी हो कलि...
05/07/2024

यह तुम्हारे- हमारे दरमियान जो

चंद लम्हों के फासले है

ऐसा लगे मानो दरिया से समंदर की दूरी हो

बादल से धरती की मजबूरी हो

कलियों से भंवरों की दूरी हो, पर

वक्त के पन्नों ने है इनको बांध रखा

दिन को दिन सांझ को सांझ रखा

टूटेगी वक्त की बेडिया इतना एहसास रखो

रात को ही सही इस मौसम में प्रीत की बरसात रखो

छटेगी यह धूल भरी बादलो की गर्दिश

होगा सवेरा बिखरेगी किरण

बोलेगी कोयल बागों में उनके संग

कलियां भी खिलकर बदलेगी रंग

भंवरों के मन में भी छाएंगे उमंग

दरिया भी मिल गए हैं ,समंदर के संग।

क्या लिखूं किस पर लिखूं

सबका पढ़ने का है, अपना अपना ढंग✍️✍️✍️✍️

इस धरती की प्यास, अब बादल समझने लगा है।पर वो ना समझे जो इस दिल में बसा है किससे कहूं ,यह जो दिल की व्यथा हैयह दुनिया कहे...
29/06/2024

इस धरती की प्यास, अब बादल समझने लगा है।
पर वो ना समझे जो इस दिल में बसा है
किससे कहूं ,यह जो दिल की व्यथा है
यह दुनिया कहेगी तुममें नशा है।
नशे में तो डूबी ,आंखें हैं उनकी
जिसमें एक सुंदर सा चेहरा बसा है
किताबें पढ़ी हैं कई गजलें लिखी है
मगर उस नज़्म का एहसास है अलग
बदलेगी दुनिया ,समझेंगे लोग
यह प्यार नहीं है केवल दो शब्दों का योग!!

यह जो सावन की पहली फुहार है मानो इस दिल पर उनकी जुल्फों की बहार है घटा भी  आसमान पर है इस तरह छाई मानो उनकी रंगत का निखा...
26/06/2024

यह जो सावन की पहली फुहार है

मानो इस दिल पर उनकी जुल्फों की बहार है

घटा भी आसमान पर है इस तरह छाई

मानो उनकी रंगत का निखार है ,

यह जो उनका लुका- छुपी वाला प्यार है

इतना ज्यादा बेशुमार है, कि

उनके शर्माने में ही उनका इकरार है

मेरा मन यूं ही मचलता है उन कलियों पर

उनकी निगाहें ढलती हैं इन गलियों पर

वो जो थिरकेंगी इन लफ्जों की लड़ियों पर

मेरा मन मुस्कुराएगा उनकी अठखेलियों पर ||

05/06/2024

ये गर्दिश जो बादलो में छाये हुए हैं

ये जो नए नए परिणाम आए हुए हैं

चले जो हवा की लहर ये पुरानी

सुनाए जो एक प्यारी कहानी

बढ़े थे जो कदम पास आने के लिए

रुक से गए यूं जमाने के लिए

ये मोजों की बाते समंदर ही जाने

ये दरिया हमें तो लगे हैं बेगाने

सुना है ये मौसम बदलते बहुत हैं

कभी कमल से खिलते कभी लालटेम से जलते रहे हैं

बदलना है उनकी फितरत, ये जमाने की भूल है

मेरे लिए तो बस एक ही वसूल है।

मिलाओ ये हाथ 👋 बदले सिंहासन, बदले ये बिसात

हो बंपर बहाली छाए हर घर में खुशहाली

मेरे मन में भी जगे आस,

हो शायद सावन (S) की मुझ पर बरसात || 🖋️🖋️

04/06/2024

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जैसी सीट पर एक संस्कारी पार्टी का हारना यह दिखता है, कि जनता ने धर्म ,जाति से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार और संविधान के लिए वोट किया । तानाशाही सरकार की गलत नीतियां जनता पर न थोपी जाए इसके लिए एक मजबूत विपक्ष का होना आवश्यक है। और यह एक अच्छे लोकतंत्र का संकेत है।

बहुत अरसा हुआ ये बादल बरसा हुआ,अब तुम्ही ही ये जुल्फे लहरा ही दो ।मन को ठंडक मिले उस आशियाने तले दीप शिक्षा का  यूं ही  ...
01/06/2024

बहुत अरसा हुआ ये बादल बरसा हुआ,

अब तुम्ही ही ये जुल्फे लहरा ही दो ।

मन को ठंडक मिले उस आशियाने तले

दीप शिक्षा का यूं ही जलते रहे।

वो किताबें जो पढ़ी थी, पुरानी मगर

हर एक पन्ना मुझे हमेशा नया सा लगा,

उनकी शब्दों के नई नई मुस्कान से

इस वीरान से दिल में एक पौधा जगा

रोज सीचू मैं इसको नए लेख से

ताकि हर एक पल हमको एहसास हो

दूर होते हुए भी ऐसा लगे

जैसे मानो वो मेरे बहुत पास हों ......🖋️

Vote for शिक्षा 🧑‍🏫Vote for संविधान 🧑‍⚖️Vote for रोजगार 🧑‍🔧चुनाव का पर्व देश का गर्व हमने तो वोट कर दिया और आपने 🙏????
20/05/2024

Vote for शिक्षा 🧑‍🏫
Vote for संविधान 🧑‍⚖️
Vote for रोजगार 🧑‍🔧
चुनाव का पर्व देश का गर्व
हमने तो वोट कर दिया और आपने 🙏????

18/05/2024

कलियों से पूछा हमने,

तुम ना कोई श्रृंगार करो

फिर भी कभी उजली कभी गहरी

कभी इतना निखरी- निखरी लगती हो!

कलियां बोली, शायद तुमको है

फूलों से प्यार हुआ

ये देखने का नज़रिया है (बाबू)

जो तुमको इतना एतबार हुआ।

लोग तो दुनिया में हमको

कभी सैया, कभी सेज

कभी सजदे में ही चुनते हैं।

यह सुनते ही मेरे मन में

जो आंसूओ का सैलाब उठा

मानो इस लेखनी से

इस सूखी रुखी धरती पर आब हुआ

सावन आया और यह धरती फिर गुलजार हुई

फिर कलियों से हमने एक छोटा प्रस्ताव रखा

तुम आओ इस दिल की बगिया में

जहां तुम्हे कोई न चुने

वो शरमाई ........वो मुस्काई.....

यूं ही नहीं मैं लिखता हूं ✍️उन सुंदर से अहससो कोउनकी झिलमिलाती आखों में एक मासूम सा चेहरा देखता हूं               यूं ही...
10/05/2024

यूं ही नहीं मैं लिखता हूं ✍️

उन सुंदर से अहससो को

उनकी झिलमिलाती आखों में

एक मासूम सा चेहरा देखता हूं

यूं ही नहीं मैं लिखता हूं ✍️

इस गर्मी में ये हाल हुआ

इस दिल का पंछी बेहाल हुआ

उन सुंदर जुल्फों की छाव में

एक रैन बसेरा ढूंढता हूं

यूं ही नहीं मैं लिखता हूं ✍️

उम्मीद करु ये ऋतु बदले

सावन आए और घटा घिरे

मुस्कानों की बरसातो से इस धरती पर दो फूल खिले

उस माली के आने से

थोड़ा -बहुत झिझकता हूं

यूं ही नहीं मैं लिखता हूं ✍️✍️✍️

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