14/09/2026
हिंदी से मेरा रिश्ता
हालाँकि मैं अंग्रेज़ी का अध्यापक हूँ,
पर हिंदी मेरे रग-रग में बसती है,
मेरी बातों में, मेरी भावनाओं में,
मेरी कविताओं में हँसती है।
कुछ कविताएँ हिंदी में लिख लेता हूँ,
हिंदी बोलना सहज लगता है,
शुद्धता की कसौटी पर शायद
हर शब्द मेरा खरा न उतरता है।
अंग्रेज़ी बोलना भी अच्छा लगता है,
पर वहाँ, जहाँ उसे समझने वाले हों,
क्योंकि जिस मिट्टी में पला-बढ़ा हूँ,
वहाँ हिंदी समझने वाले अपने हैं।
शुद्ध हिंदी बोल पाऊँ—
इतना दावा भी नहीं करता,
पर हर दिन थोड़ा बेहतर बोलने का,
एक छोटा-सा प्रयास करता हूँ।
हिंदी ने ही हमें लाड़ से पाला,
हिंदी ने संस्कार दिए,
इसी भाषा में माँ ने पुकारा,
इसी में अपनों ने प्यार दिए।
जीवन का कोई दिन ऐसा नहीं,
जब बिना हिंदी के काम चलता हो,
हर सुख-दुःख, हर रिश्ते में,
बिना हिंदी कोई भाव पलता हो।
हिंदी केवल भाषा नहीं,
मेरे जीवन का संस्कार है,
इसी ने मुझे बोलना सिखाया,
इसी से मेरा व्यवहार है।
इसी की गोद में पला-बढ़ा हूँ,
इस