Hrishi Ranjan Pathak

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Hrishi Ranjan Pathak This is the official page of Hrishi Ranjan Pathak.He is a teacher of English language and literature.

हिंदी से मेरा रिश्ताहालाँकि मैं अंग्रेज़ी का अध्यापक हूँ,पर हिंदी मेरे रग-रग में बसती है,मेरी बातों में, मेरी भावनाओं मे...
14/09/2026

हिंदी से मेरा रिश्ता

हालाँकि मैं अंग्रेज़ी का अध्यापक हूँ,
पर हिंदी मेरे रग-रग में बसती है,
मेरी बातों में, मेरी भावनाओं में,
मेरी कविताओं में हँसती है।

कुछ कविताएँ हिंदी में लिख लेता हूँ,
हिंदी बोलना सहज लगता है,
शुद्धता की कसौटी पर शायद
हर शब्द मेरा खरा न उतरता है।

अंग्रेज़ी बोलना भी अच्छा लगता है,
पर वहाँ, जहाँ उसे समझने वाले हों,
क्योंकि जिस मिट्टी में पला-बढ़ा हूँ,
वहाँ हिंदी समझने वाले अपने हैं।

शुद्ध हिंदी बोल पाऊँ—
इतना दावा भी नहीं करता,
पर हर दिन थोड़ा बेहतर बोलने का,
एक छोटा-सा प्रयास करता हूँ।

हिंदी ने ही हमें लाड़ से पाला,
हिंदी ने संस्कार दिए,
इसी भाषा में माँ ने पुकारा,
इसी में अपनों ने प्यार दिए।

जीवन का कोई दिन ऐसा नहीं,
जब बिना हिंदी के काम चलता हो,
हर सुख-दुःख, हर रिश्ते में,
बिना हिंदी कोई भाव पलता हो।

हिंदी केवल भाषा नहीं,
मेरे जीवन का संस्कार है,
इसी ने मुझे बोलना सिखाया,
इसी से मेरा व्यवहार है।

इसी की गोद में पला-बढ़ा हूँ,
इस

मुझे जानना इतना आसान नहींकोशिश कितनी भी कर लो,मुझे तुम जान नहीं पाओगे,चंद शब्दों से, चंद जज़्बातों से,मेरी गहराई तक पहुँ...
14/09/2026

मुझे जानना इतना आसान नहीं

कोशिश कितनी भी कर लो,
मुझे तुम जान नहीं पाओगे,
चंद शब्दों से, चंद जज़्बातों से,
मेरी गहराई तक पहुँच नहीं पाओगे।

किसी इंसान को जानने के लिए
सिर्फ़ बातें काफी नहीं होतीं,
उसके साथ कुछ वक्त गुज़ारना पड़ता है,
उसकी ख़ामोशियाँ समझनी पड़ती हैं।

मेरे चंद जज़्बातों से
मेरा फैसला मत करना,
मेरे चंद शब्दों से
मुझे पूरा मत समझना।

मुझे जानना है तो
मेरे साथ थोड़ा वक्त बिताना,
मेरे बदलते रंगों के पीछे
छिपे इंसान को पहचानना।

क्योंकि मैं कोई किताब नहीं
जिसे कुछ पन्ने पढ़कर समझ जाओगे,
मैं एक अधूरी सी कहानी हूँ—
जिसे जीओगे, तभी जान पाओगे।

ऋषि रंजन पाठक
मौलिक स्वरचित

बस मुझे ढूंढ लेनाजब दुनिया अजनबी लगने लगे,तब मुझमें किनारा ढूँढ लेना।जब राहें सारी खो जाएँ,तब मेरा सहारा ढूँढ लेना।जब आँ...
01/09/2026

बस मुझे ढूंढ लेना

जब दुनिया अजनबी लगने लगे,
तब मुझमें किनारा ढूँढ लेना।
जब राहें सारी खो जाएँ,
तब मेरा सहारा ढूँढ लेना।

जब आँखों में नमी उतर आए,
तब मेरा कंधा ढूँढ लेना।
जब कोई अपना साथ न दे,
तब मुझमें अपना ढूँढ लेना।

जब भीड़ में अकेले पड़ जाओ,
तब मेरा सहारा ढूँढ लेना।
जब दिल को कोई बात सताए,
मुझसे वो बात कह देना।

जब आँखों में नमी उतर आए,
तब मुझमें अपना ढूँढ लेना।
जब खुद से भी तुम रूठ जाओ,
बस कोशिश करना, और मुझे ढूंढ लेना।

मौलिक स्वरचित
ऋषि रंजन पाठक

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