28/06/2026
Today class start परमाणु (Atom) असल में होता क्या है?
हमारे आसपास दिखाई देने वाली हर चीज—जैसे पानी, हवा, मिट्टी, लकड़ी, लोहा, सोना, हमारा शरीर और यहाँ तक कि तारे-ग्रह भी—बहुत छोटे-छोटे कणों से मिलकर बने हैं। इन अत्यंत छोटे कणों को परमाणु यानी एटम (Atom) कहा जाता है।
आसान शब्दों में कहें तो:
> परमाणु किसी तत्व का सबसे छोटा कण है, जिसमें उस तत्व के रासायनिक गुण मौजूद रहते हैं।
इस बात को सोने की ईंट के उदाहरण से समझते हैं।
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सोने की ईंट को तोड़ते जाएँ तो क्या होगा?
मान लीजिए हमारे पास शुद्ध सोने की एक बड़ी ईंट है।
सबसे पहले हम उसे दो टुकड़ों में तोड़ देते हैं। दोनों टुकड़े अब भी सोना ही होंगे।
फिर उन टुकड़ों को और छोटा कर दिया। वे भी सोना ही रहेंगे।
इसी तरह हम सोने को लगातार काटते, पीसते और छोटे-से-छोटा करते जाएँ:
सोने की ईंट → छोटा टुकड़ा → सोने का कण → बहुत बारीक कण → सोने का परमाणु
एक अवस्था ऐसी आएगी, जब हमारे पास सोने का केवल एक परमाणु बचेगा। यह सोने की वह सबसे छोटी इकाई होगी, जिसे हम अब भी सोना कह सकते हैं।
लेकिन यदि हम उस परमाणु को भी तोड़ दें, तो उसके अंदर से इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे कण मिलेंगे। ये कण अलग-अलग होकर स्वयं “सोना” नहीं कहलाएँगे।
इसलिए परमाणु को किसी तत्व की सबसे छोटी रासायनिक इकाई कहा जाता है।
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क्या परमाणु वास्तव में कभी नहीं टूटता?
“परमाणु” शब्द का अर्थ ही है—ऐसा कण जिसे और न बाँटा जा सके। प्राचीन समय में वैज्ञानिकों को लगता था कि परमाणु पूरी तरह अविभाज्य है।
लेकिन बाद में पता चला कि परमाणु के अंदर भी छोटे कण मौजूद होते हैं।
इसलिए यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि परमाणु कभी टूट ही नहीं सकता। परमाणु को विशेष परिस्थितियों में तोड़ा या बदला जा सकता है, जैसे:
परमाणु विखंडन में
परमाणु संलयन में
रेडियोधर्मी प्रक्रियाओं में
बहुत अधिक ऊर्जा वाले वैज्ञानिक प्रयोगों में
हाँ, सामान्य तरीके से काटने, पीसने, जलाने या हथौड़े से मारने पर परमाणु नहीं टूटता। इन प्रक्रियाओं में केवल परमाणुओं की व्यवस्था या उनके आपसी संबंध बदलते हैं।
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परमाणु के अंदर क्या होता है?
परमाणु मुख्य रूप से तीन प्रकार के कणों से बना होता है:
1. प्रोटॉन
प्रोटॉन पर धनात्मक यानी पॉजिटिव विद्युत आवेश होता है। यह परमाणु के केंद्र में पाया जाता है।
किसी परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या ही तय करती है कि वह कौन-सा तत्व है।
उदाहरण के लिए:
1 प्रोटॉन = हाइड्रोजन
6 प्रोटॉन = कार्बन
8 प्रोटॉन = ऑक्सीजन
26 प्रोटॉन = लोहा
79 प्रोटॉन = सोना
यदि किसी परमाणु के केंद्र में 79 प्रोटॉन हैं, तो वह सोने का परमाणु ही होगा।
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2. न्यूट्रॉन
न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता। इसलिए यह विद्युत रूप से उदासीन होता है।
न्यूट्रॉन भी प्रोटॉन के साथ परमाणु के केंद्र में मौजूद होता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन मिलकर परमाणु के लगभग पूरे द्रव्यमान का निर्माण करते हैं।
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3. इलेक्ट्रॉन
इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक यानी नेगेटिव विद्युत आवेश होता है।
ये परमाणु के केंद्र के आसपास अलग-अलग ऊर्जा स्तरों या क्षेत्रों में पाए जाते हैं। पुस्तकों में इन्हें अक्सर नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हुए दिखाया जाता है, लेकिन वास्तव में इनकी स्थिति को एक निश्चित गोल रास्ते के बजाय संभाव्यता वाले क्षेत्र के रूप में समझा जाता है।
परमाणु के रासायनिक व्यवहार में इलेक्ट्रॉनों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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परमाणु का केंद्र—नाभिक
परमाणु के बीच के हिस्से को नाभिक या न्यूक्लियस कहा जाता है।
नाभिक के अंदर:
प्रोटॉन
न्यूट्रॉन
मौजूद होते हैं।
नाभिक बहुत छोटा होता है, लेकिन परमाणु का लगभग पूरा द्रव्यमान इसी में केंद्रित रहता है।
इसके बाहर इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं।
इसे ऐसे समझिए जैसे एक बहुत बड़े स्टेडियम के बीच में राई के दाने जितना नाभिक हो और इलेक्ट्रॉनों का क्षेत्र पूरे स्टेडियम में फैला हो। इसका अर्थ है कि परमाणु का बहुत बड़ा हिस्सा वास्तव में खाली स्थान जैसा होता है।
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परमाणु कितना छोटा होता है?
परमाणु इतना छोटा होता है कि उसे साधारण आँख, माइक्रोस्कोप या सामान्य कैमरे से नहीं देखा जा सकता।
एक सामान्य परमाणु का आकार लगभग:
0.1 नैनोमीटर के आसपास होता है।
एक नैनोमीटर, एक मीटर का एक अरबवाँ भाग होता है।
अर्थात:
1 नैनोमीटर = 0.000000001 मीटर
एक मिलीमीटर की मोटाई में भी लगभग एक करोड़ परमाणु एक सीधी कतार में आ सकते हैं। अलग-अलग तत्वों के परमाणुओं का आकार अलग हो सकता है, इसलिए यह संख्या केवल समझाने के लिए अनुमानित है।
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इतने छोटे परमाणु से बड़ी वस्तु कैसे बनती है?
एक अकेला परमाणु बहुत छोटा होता है। लेकिन जब अरबों-खरबों परमाणु आपस में जुड़ते हैं, तो पदार्थ बनता है।
उदाहरण के लिए:
बहुत सारे सोने के परमाणु मिलकर सोने की अंगूठी बनाते हैं।
बहुत सारे लोहे के परमाणु मिलकर लोहे की छड़ बनाते हैं।
हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणु जुड़कर पानी के अणु बनाते हैं।
कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और अन्य परमाणु मिलकर हमारे शरीर की कोशिकाएँ बनाते हैं।
इस प्रकार बड़ी-से-बड़ी वस्तु की शुरुआत अत्यंत छोटे परमाणुओं से होती है।
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परमाणु और अणु में क्या अंतर है?
परमाणु और अणु एक ही चीज नहीं हैं।
परमाणु
किसी तत्व की सबसे छोटी रासायनिक इकाई को परमाणु कहते हैं।
जैसे:
हाइड्रोजन का परमाणु
ऑक्सीजन का परमाणु
सोने का परमाणु
अणु
जब दो या दो से अधिक परमाणु आपस में रासायनिक बंधन से जुड़ते हैं, तो अणु बनता है।
उदाहरण:
पानी का एक अणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं और एक ऑक्सीजन परमाणु से बनता है:
H₂O
अर्थात:
2 हाइड्रोजन परमाणु + 1 ऑक्सीजन परमाणु = पानी का एक अणु
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अलग-अलग पदार्थ अलग क्यों होते हैं?
सभी पदार्थ परमाणुओं से बने हैं, लेकिन सभी परमाणु एक जैसे नहीं होते।
सोने के परमाणु में 79 प्रोटॉन होते हैं, जबकि लोहे के परमाणु में 26 प्रोटॉन होते हैं। इसी अंतर के कारण दोनों के गुण अलग होते हैं।
इतना ही नहीं, एक ही प्रकार के परमाणु अलग-अलग तरीके से व्यवस्थित होकर अलग गुणों वाले पदार्थ भी बना सकते हैं।
उदाहरण के लिए, हीरा और ग्रेफाइट दोनों कार्बन परमाणुओं से बने हैं। फिर भी हीरा बहुत कठोर और चमकदार होता है, जबकि ग्रेफाइट नरम होता है और पेंसिल में उपयोग होता है। इसका कारण कार्बन परमाणुओं की अलग-अलग व्यवस्था है।
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क्या परमाणु स्थिर रहता है?
सामान्य परमाणु में प्रोटॉनों और इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर होती है।
प्रोटॉन का आवेश धनात्मक और इलेक्ट्रॉन का आवेश ऋणात्मक होता है। दोनों बराबर होने के कारण पूरा परमाणु विद्युत रूप से उदासीन रहता है।
लेकिन जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन खो देता है या अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर लेता है, तो वह आवेशित कण बन जाता है। इसे आयन कहा जाता है।
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परमाणुओं के जुड़ने से रासायनिक बंधन बनते हैं
परमाणु अधिक स्थिर होने के लिए अपने बाहरी इलेक्ट्रॉनों को साझा कर सकते हैं, दे सकते हैं या ग्रहण कर सकते हैं। इसी कारण परमाणुओं के बीच रासायनिक बंधन बनते हैं।
इन्हीं बंधनों के कारण:
पानी बनता है
नमक बनता है
गैसें बनती हैं
धातुएँ बनती हैं
जीवित शरीर के जटिल पदार्थ बनते हैं
रासायनिक क्रियाओं में परमाणु सामान्यतः नष्ट नहीं होते। वे केवल पुराने संबंध तोड़कर नए संबंध बना लेते हैं।
उदाहरण के लिए, लकड़ी जलने पर उसके परमाणु गायब नहीं होते। वे ऑक्सीजन के परमाणुओं से जुड़कर कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, राख और अन्य पदार्थ बना लेते हैं।
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परमाणु का अधिकांश भाग खाली क्यों कहा जाता है?
नाभिक का आकार पूरे परमाणु की तुलना में बहुत छोटा होता है। इलेक्ट्रॉन भी अत्यंत छोटे होते हैं। इनके बीच का क्षेत्र बहुत विशाल होता है।
इसलिए वैज्ञानिक दृष्टि से परमाणु का अधिकांश आयतन खाली स्थान जैसा होता है।
फिर भी हमारा हाथ मेज के आर-पार नहीं जाता, क्योंकि हमारे हाथ और मेज के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों के बीच विद्युत प्रतिकर्षण होता है। क्वांटम भौतिकी के नियम भी पदार्थों को एक-दूसरे के अंदर आसानी से प्रवेश करने से रोकते हैं।
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क्या हम परमाणु को देख सकते हैं?
परमाणु को सामान्य प्रकाश वाले माइक्रोस्कोप से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि परमाणु दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से भी बहुत छोटा होता है।
वैज्ञानिक विशेष उपकरणों की सहायता से परमाणुओं की स्थिति और संरचना का अध्ययन करते हैं, जैसे:
स्कैनिंग टनलिंग माइक्रोस्कोप
एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप
कण त्वरक
इनसे प्राप्त चित्र अक्सर प्रत्यक्ष साधारण फोटो नहीं होते, बल्कि उपकरणों द्वारा दर्ज संकेतों से तैयार की गई वैज्ञानिक छवियाँ होती हैं।
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संक्षेप में समझें
परमाणु किसी तत्व की सबसे छोटी रासायनिक इकाई है।
सोने को लगातार छोटा करते जाएँ, तो अंत में सोने का एक परमाणु बचेगा। उस परमाणु में सोने के गुण मौजूद होंगे। लेकिन उसे प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन में तोड़ देने पर वे कण स्वयं सोना नहीं रहेंगे।
परमाणु के बीच में नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन और न्यूट्रॉन होते हैं। नाभिक के आसपास इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं।
परमाणु अत्यंत छोटा है, लेकिन इन्हीं छोटे परमाणुओं से पूरी दुनिया बनी हुई है।
> हमारा शरीर हो, पृथ्वी हो या कोई विशाल तारा—हर पदार्थ की बुनियाद अंततः परमाणुओं तक पहुँचती है।