12/11/2022
Current Affairs:
International
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G20 Summit 2022: बाली में पीएम मोदी करेंगे ऋषि सुनक और एमानुएल मैक्रा से द्विपक्षीय मुलाकात
November 11, 2022
नई दिल्ली। पीएम नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के भारतवंशी पीएम ऋषि सुनक के बीच पहली शीर्षस्तरीय मुलाकात अगले हफ्ते बाली में होगी। बाली में दोनो नेता जी20 देशों की शीर्ष बैठक में हिस्सा लेने के लिए इंडोनेशिया में होंगे। पीएम मोदी की ब्रिटिश पीएम के अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक भी तय है। कुछ दूसरे राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी पीएम की मुलाकात होगी। पीएम मोदी इन दोनो वैश्विक नेताओं के अलावा कुछ दूसरे देशों के नेताओं से भी मिलेंगे। इसको लेकर भारतीय विदेश मंत्रालयों की बातचीत दूसरे देशों के साथ हो रही है।
ऋषि सुनक से होगी पीएम मोदी की पहली मुलाकात
पीएम मोदी 14 से 16 नवंबर तक बाली शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सूत्रों ने बताया है कि भारत और ब्रिटेन के अधिकारियों के बीच मोदी और सुनक वार्ता को अंतिम रूप दिया जा चुका है। बाली में पीएम मोदी की होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में यह सबसे महत्वपूर्ण होगा। यह पूछे जाने पर कि दोनो देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर बातचीत होगी या नहीं इसके जबाव में सूत्रों ने बताया कि द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात होगी।
दोनों पीएम के बीच एफटीए को लेकर बातचीत होने की संभावना
सुनक के पीएम पद संभालने के बाद जो मोदी ने उनसे टेलीफोन पर बात की थी तब उसमें एफटीए को लेकर खास तौर पर बात हुई थी। दोनो नेताओं ने बाद में सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी थी कि उनके बीच समग्र व संतुलित एफटीए को लेकर सहमति बन गई है। मोदी और सुनक के बीच होने वाली इस मुलाकात में दोनो देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर तय रोडमैप 2030 की दिशा भी तय होने की संभावना है। इस रोडमैप की घोषणा मई, 2021 में मोदी और ब्रिटेन के पूर्व पीएम बोरिस जानसन ने की थी लेकिन उसके बाद वहां लगातार राजनीतिक अस्थिरता होने की वजह से इस बार बात आगे नहीं बढ़ पाई है।
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तालिबान शासन में तबाह हो रहा अफगानिस्तान, UN महासभा में पारित हुआ प्रस्ताव
November 11, 2022
संयुक्त राष्ट्र, । संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर तालिबान पर अफगानिस्तान को तबाह करने का आरोप लगाया है। प्रस्ताव में कहा गया कि तालिबान अफगानिस्तान में महिलाओं एवं लड़कियों के मानवाधिकारों का हनन कर रहा है। उसके शासन में यह देश गंभीर आर्थिक, मानवीय एवं सामाजिक स्थितियों में फंस गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि गत वर्ष अगस्त में तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ और तब से देश में हिंसा जारी है। अलकायदा एवं इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों के साथ ही विदेशी आतंकी भी देश में मौजूद हैं।
इन देशों ने नहीं किया मतदान
संयुक्त राष्ट्र में जर्मनी की राजदूत अंटजे लींडेर्टसे ने आशा व्यक्त की थी कि जर्मनी द्वारा पेश प्रस्ताव को 193 सदस्यीय महासभा ध्वनिमत से मंजूरी देगा। हालांकि प्रस्ताव पर मतदान का आग्रह किए जाने के बाद यह 116-0 से स्वीकार किया गया। रूस, चीन, बेलारूस, बुरुंडी, उत्तर कोरिया, इथोपिया, गिनी, निकारागुआ, पाकिस्तान और जिंबाब्वे समेत 10 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया। जबकि 67 देशों ने मतदान नहीं किया।
मानवाधिकारों के उल्लंघन पर व्यक्त की गई गहरी चिंता
मतदान से पहले जर्मन राजदूत ने महासभा में कहा कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान ने बड़े पैमाने पर आर्थिक तथा मानवीय संकट देखा है, जिससे आधी आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है। इस प्रस्ताव में महिलाओं तथा लड़कियों के खिलाफ दुष्कर्म समेत मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी है।
महिलाओं को पार्क और जिम में जाने पर रोक
लड़कियों के लिए छठी कक्षा से आगे की पढ़ाई पर प्रतिबंध लगा चुके तालिबान ने गुरुवार को महिलाओं के पार्क और जिम में जाने पर भी रोक लगा दी। मालूम हो कि सुरक्षा परिषद की तुलना में महासभा के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं लेकिन वे दुनिया की राय को दर्शाते हैं।